लोकतंत्र में चुनाव को समारोह या जश्न से तेरहवीं में तब्दील करने का कोई तुक नहीं – लोकदल

लखनऊ। कोरोना काल में चुनाव कराने के आयोग के फैसले पर सवालिया निशान लगाते हुए लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि जब दुनिया के 70 देशों में कोरोना के चलते चुनाव टाल दिया गया तो बिहार में चुनाव कराने की इतनी हड़बड़ी क्यों की गई? यह चुनाव भाजपा- के इशारे पर कम समय में कराया जा रहा है।

लोकदल शुरू से ही चुनाव का विरोध कर रहा है। चुनाव के लिए यह अनुकूल समय नहीं है। कोरोना-बाढ़ के बीच जनता निष्पक्ष होकर मतदान करे, बिहार में ऐसे हालात नहीं। बावजूद सरकार येन-केन प्रकारण चुनाव चुनाव चाहती है तो जनता मालिक है। वह देख रही है कि राज्य में किसानों, बेरोजगारों, महिलाओं के लिए सरकार ने कुछ भी नहीं किया।

इन सबकी अनदेखी कर आयोग को चुनाव कराने की जल्दी है। लगता है भाजपा को जिताने की आयोग को हड़बड़ी है। बिहार जैसे राज्य इस वैश्विक महामारी से जूझ रही हो जहां पर कोरोना से कई मंत्रियों की मृत्यु हुई हो ऐसे में चुनाव संभव ही नहीं। कहीं बिजली नहीं है तो कहीं इंटरनेट नहीं है। आयोग की यह कोशिश लोकतंत्र के महापर्व की परिभाषा बदलने की साजिश है।

सिंह ने आगे कहा है कि कोरोना काल में मतदान कराने के लिए चुनाव आयोग जो नियम निर्देशिका लेकर आया है , पहली नजर में वह व्यावहारिक नहीं है।कॉरोना काल में सामाजिक आपातकाल या इमरजेंसी घोषित रूप से है तो ऐसे समय में चुनाव की अनिवार्यता को संवैधानिक विकल्प के आधार पर स्थगित कर देना चाहिए और बिहार के हालात को देखकर राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो लोकदल पहलुओं पर विचार कर सर्वोच्च न्यायालय में फैसले के खिलाफ पीआइएल दायर करेगी। 

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