उ.प्र.. के माध्यम से विकसित भारत की संकल्पना को साइंटिफिक तरीके से बढ़ाएगा क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्रः मुख्यमंत्री

विजय कुमार निगम लखनऊ:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मौसम पूर्वानुमान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी  के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में किए गए कार्यों के परिणाम स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना से उत्तर प्रदेश को विशेष लाभ मिलेगा।उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी आबादी का राज्य है। महज 11 फीसदी कृषि योग्य भूमि में यूपी देश का 21 फीसदी खाद्यान्न उत्पादन करता है। समय पर मौसम, बारिश, अतिवृष्टि, अनावृष्टि या ओलावृष्टि की जानकारी नहीं मिलेगी तो हम किसानों के साथ न्याय नहीं कर पाएंगे। क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना मौसम की और सटीक जानकारी प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

      मुख्यमंत्री ने सोमवार को केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह संग बटन दबाकर क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का शुभारंभ किया। इसे लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र को परिवर्तित कर स्थापित किया गया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि हम लोग सीजन में अतिवृष्टि-अनावृष्टि, आकाशीय बिजली आदि के संबंध में मेट्रोलॉजिकल व अन्य विभागों की बैठक में चर्चा करते थे कि समय पर सटीक जानकारी मिलने से सही रणनीति संभव होती है। आज केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में लखनऊ खुद को मेट्रोलॉजिकल रीजनल सेंटर के रूप में स्थापित कर रहा है। य़ह उत्तर प्रदेश के माध्यम से विकसित भारत की संकल्पना को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के प्रति आभार भी जताया। 

       मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद इस विषय पर अपेक्षित ध्यान न देने का परिणाम था कि अन्नदाता किसान अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाए। प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनधन की हानि को रोकने वाले प्रयास भी अधूरे रहे। 

      मुख्यमंत्री ने कहा कि 13 मई को आंधी-तूफान से प्रदेश के कुछ जनपदों में जनधन की काफी हानि हुई थी। बैठक में मैंने पूछा कि अर्ली वार्निंग सिस्टम क्यों काम नहीं कर रहा था। पता चला कि सिस्टम तो काम कर रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की सक्रियता का अभाव है। फिर रात में पूरे प्रदेश के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मैंने कहा कि जब आपको अलर्ट मिल रहा है तो आपको भी स्थानीय स्तर पर लोगों व संस्थाओं को अलर्ट करना चाहिए। इस बैठक के चौथे-पांचवें दिन भी आपदा आई, लेकिन तीन घंटे पहले सबके मोबाइल पर अलर्ट आना प्रारंभ हो गया।

       मौसम की पूर्व जानकारी किसानों की आमदनी बढ़ाने और आकाशीय बिजली, अतिवृष्टि, अनावृष्टि व ओलावृष्टि के कारण होने वाली जनधन की हानि को रोकने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमने इसरो से भी अनुरोध किया था कि राज्य सरकार चाहती है कि उसके पास अपना सेटेलाइट हो, जो मौसम की और सटीक जानकारी उपलब्ध करा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य ने जबसे बुद्धिमत्ता का उपयोग प्रारंभ किया होगा, उसके लिए सबसे पहले मौसम की जानकारी, आकाश में चमकती बिजली, बादलों से होने वाली वर्षा जैसी स्थितियां कौतूहल का विषय बनीं। ऋषि-मुनियों ने स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पंचांग का निर्माण किया। आज भी ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर की गई गणना मौसम की सटीक जानकारी का आधार बनती है। 

       मुख्यमंत्री ने कहा कि क्लाईमेट चेंज होने से मौसम चक्र में लगभग एक महीने का अंतर आया है। यही हाल रहा तो देश-दुनिया के सामने भीषण खाद्यान्न संकट खड़ा हो सकता है। हमने स्वार्थ के लिए प्रकृति का दोहन किया है तो प्रकृति भी हमसे विमुख होती दिख रही है। यदि हम संस्कारों को पुनर्जीवित और धऱती मां के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन कर लें तो इसे सुधारने में मदद मिल सकती है। समय पर मौसम विभाग की जानकारी मिलने से किसानों व अर्थव्यवस्था को होने वाली क्षति तथा खाद्यान्न संकट टालने में सफल हो सकते हैं।  मुख्यमंत्री ने आकाशीय बिजली से मौतों पर दुख जताते हुए कहा कि किसान, सह किसान (बटाईदार) व पारिवारिक सदस्य की आपदा में मौत होने पर सरकार मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा के तहत तत्काल पांच लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराती है। गंगा, यमुना, सरयू, राप्ती व गंडक समेत कई नदियों में बाढ़ आती है। अलग-अलग समय में बाढ़ के कारण भी राज्य में जनधन की हानि होती है। उत्तर प्रदेश में मौसम की सटीक जानकारी देने के लिए डॉप्लर स्थापित हो रहे हैं, लेकिन उ.प्र. स्पेसिफिक सेटेलाइट स्थापित हो। इसके लिए प्रदेश में केंद्र बन सके तो उत्तर प्रदेश सरकार इसमें हरसंभव सहयोग करेगी। इसके साथ ही मुख्ममंत्री ने भारतीय मौसम विज्ञान की तारीफ करते हुए कहा कि सही जानकारी मिलने का लाभ यूपी को मिलता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उ.प्र. में 450 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन, ब्लॉक स्तर पर 2000 ऑटोमेटिक रेनगेज स्थापित हुए हैं। इसके माध्यम से वर्षा की सटीक जानकारी किसानों को उपलब्ध कराते हैं। यह उपकरण वर्षा, तापमान, वायु की गति और दिशा का रियल टाइम डेटा एकत्र कर स्टडी करने में मदद करते हैं। आजमगढ़, वाराणसी, अलीगढ़, झांसी, लखनऊ में एक्सबैंड डॉप्लर वेदर राडार स्थापित किए जा रहे हैं, यह आंधी-तूफान, भारी वर्षा, ओलावृष्टि आदि की निगरानी करने में मदद करेंगे। आकाशीय बिजली के डिटेक्शन सेंसर लगाए गए हैं। भारत सरकार के सचेत प्लेटफॉर्म से एमएमएस अलर्ट भी समय पर मिलते हैं। इसके जरिए भी सहारनपुर व अन्य जनपदों में जनधन की हानि रोकने में सफलता मिली।            मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चरल, वेजिटेबल उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। देश की कुल कृषि भूमि का 11 फीसदी हिस्सा उ.प्र. के पास है, जिसमें 86 फीसदी भूमि सिंचित है। यहां किसान तीन फसल उत्पादन करता है। यूपी देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 35-36 फीसदी योगदान देने की क्षमता रखता है, आवश्यकता है कि इसे तकनीक के साथ जोड़कर समयबद्ध रूप से बढ़ाया जाए। इसमें मौसम विभाग की भी बड़ी भूमिका है। उत्तर प्रदेश में अच्छी तकनीक लाने, क्वाटंम कंप्यूटिंग या मौसम विभाग के अन्य कार्यक्रम लागू होंगे तो राज्य सरकार हरसंभव सहयोग करेगी।

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