‘जनरेशन गटर’ विवाद पर कंगना रनौत का नया वीडियो, बोलीं- क्या आप अपनी बेटी को ऐसा सिखाएंगे?

 भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। ‘जनरेशन गटर’ वाली टिप्पणी पर भारी आलोचना के बाद कंगना ने इंस्टाग्राम पर नया वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा है। वीडियो में कंगना ने कहा, ‘एक्सक्यूज मी, क्या आप अपनी बेटी को ऐसा सिखाएंगी?’ उन्होंने मीडिया और कुछ फेमिनिस्टों पर आरोप लगाया कि वे सड़कों पर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के सामने अनैतिक व्यवहार को सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मतबल बताया

कंगना ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी पूरे जेन-जी के खिलाफ नहीं थी। उन्होंने कहा कि वे कई जेन-जी युवाओं की तारीफ करती हैं, जो स्टार्टअप व नीट जैसे क्षेत्रों में बेहतरीन काम कर रहे हैं लेकिन कुछ युवाओं द्वारा सड़कों पर अभद्र भाषा, अश्लील व्यवहार और दिखावे को उन्होंने ‘जनरेशन गटर’ करार दिया था।

उन्होंने आगे कहा, ‘हम अपनी संस्कृति में बच्चों को समय से पहले यौनिक रूप से उभारने वाले व्यवहार को स्वीकार नहीं करते। बुजुर्गों के सामने शर्मिंदगी महसूस होती है। हम इसे नॉर्मल नहीं होने देंगे।’

कंगना ने ‘फेमिनाजी’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि कुछ लोग युवाओं को ‘पशुवत व्यवहार’ की ओर ले जा रहे हैं, जबकि जीवन का उद्देश्य विकास है, पतन नहीं। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नाम पर दूसरों की गरिमा पर आघात नहीं करनी चाहिए।

क्या है कंगना रनौत का पूरा विवाद?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कंगना ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के छात्र आंदोलन और वायरल रील्स पर टिप्पणी की। उन्होंने कुछ युवा व महिलाओं के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए थे। इस पर सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कंगना पर पलटवार किया और कहा कि ऐसी भाषा मानसिक संतुलन वाली व्यक्ति की नहीं लगती। कंगना ने वीडियो में अपने स्टैंड को दोहराते हुए कहा कि मीडिया उनके खिलाफ हमले कर रहा है क्योंकि वे समाज में गरिमा, अनुशासन और सीमा की बात कर रही हैं।

अंत में गुरु पूर्णिमा की बधाई दी

वीडियो के अंत में कंगना ने गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए युवाओं से अपील की कि वे बुजुर्गों और गुरुओं से सीखें, पशुवत व्यवहार की बजाय विकास की राह चुनें। यह स्पष्टीकरण विवाद को शांत करने की कोशिश लग रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर बहस अभी भी जारी है। कंगना की टिप्पणियां जेन-जी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक अनुशासन के बीच चल रही व्यापक बहस को फिर से एक नया मोड़ दे रही है।

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