18th BRICS Summit : परमाणु बम भी बेअसर, पुतिन-जिनपिंग की कार में क्या खास, इन्हें क्यों कहते हैं चलता-फिरता किला?

ब्रिक्स सम्मेलन 2026 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सुरक्षा व्यवस्था पूरी दुनिया के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। दोनों ही देशों के वैश्विक नेता अपनी-अपनी विशेष आर्मर्ड प्रेसिडेंशियल कारों के साथ भारत पहुंच चुके हैं, जिन्हें सुरक्षा के मानकों पर पहियों पर चलता-फिरता किला कहा जा रहा है। ये कारें इतनी ताकतवर है कि यह किसी भी प्रकार के हमलों को नाकाम करने की क्षमता रखती है। आइए इन दोनों शक्तिशाली नेताओं की आधिकारिक कारों की सुरक्षा खूबियों, इंजन पावर और उनके महत्व के बारे में जानते हैं…

ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने-अपने देशों में बनी खास प्रेसिडेंशियल कारों के साथ भारत पहुंच चुके हैं। जहां रूसी राष्ट्रपति पुतिन पहले ही दिल्ली आ चुके थे, वहीं शी जिनपिंग शनिवार को पहुंचे। बता दें कि इनकी बख्तरबंद कारें सिर्फ लग्जरी और आराम का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा, कूटनीतिक प्रोटोकॉल और उनके देशों की औद्योगिक ताकत का भी प्रतीक हैं।

पुतिन की ऑरस सेनेट (Aurus Senat) और शी जिनपिंग की होंगकी N701 (Hongqi N701) इसी खास श्रेणी की कारें हैं। दोनों वाहनों को आम लग्जरी कारों से अलग, बेहद खास सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इनकी तकनीक और सुरक्षा से जुड़ी कई जानकारियां सार्वजनिक नहीं हैं, जिससे इन कारों को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ जाती है।

ब्रिक्स सम्मेलन के लिए पुतिन और शी जिनपिंग के भारत पहुंचने के साथ ही उनके आधिकारिक काफिले और सुरक्षा व्यवस्था भी चर्चा में हैं। दोनों नेताओं के साथ उनके विशेष बख्तरबंद वाहनों का काफिला भी भारत पहुंचा है। आखिर इन प्रेसिडेंशियल कारों में ऐसा क्या खास है, जो इन्हें दुनिया की सबसे सुरक्षित और खास कारों में शामिल करता है?

शी जिनपिंग की होंगकी का मतलब है ‘लाल झंडा’

शी जिनपिंग जिस कार से दिल्ली पहुंचे, उसका नाम लिमोजिन ‘होंगकी N701’ है। हालांकि इस दौरान उनकी कार को ब्लैक कवर में ले जाते हुए देखा गया। अब अगर कार के बारे में बात करें तो होंगकी का मंदारिन यानी की चीनी में बोली जाने वाली भाषा में अर्थ ‘लाल झंडा’ होता है। यह चीन के सबसे पुराने यात्री कार ब्रांडों में से एक है। इसकी शुरुआत 1958 में हुई थी और लंबे समय तक इसका संबंध चीन के शीर्ष सरकारी अधिकारियों और आधिकारिक कार्यक्रमों से रहा है। आज होंगकी  चीन के लग्जरी कार बाजार में भी मौजूद है, लेकिन N701 आम ग्राहक के लिए बनाई गई कार नहीं है।

होंगकी  N701 आम बाजार में नहीं मिलती

  • दिलचस्प बात यह भी है कि होंगकी  N701 एक विशेष प्रेसिडेंशियल लिमोजीन है। इसे कोई भी आम ग्राहक डीलरशिप से खरीद नहीं सकता।
  • यह कार पहली बार सार्वजनिक रूप से 2022 में शी जिनपिंग की हांगकांग यात्रा के दौरान नजर आई थी। इसके बाद यह चीन के राष्ट्रपति की आधिकारिक यात्राओं से जुड़ी रही है। मिस्र की हालिया यात्रा के दौरान भी N701 उनके काफिले में दिखाई दी।
  • यही वजह है कि इसकी कीमत को सामान्य लग्जरी कार की तरह बताना सही नहीं होगा। यह एक सीमित और विशेष सरकारी इस्तेमाल के लिए तैयार की गई कार है।


N701 की सबसे बड़ी खासियत ही इसका रहस्य है

  • होंगकी  N701 के बारे में सबसे ज्यादा चर्चा इसकी सुरक्षा को लेकर होती है, लेकिन यहां सबसे जरूरी बात यह है कि इसकी सटीक सुरक्षा विशेषताएं आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं हैं।
  • इसकी आर्मर प्लेट कितनी मोटी है, ग्लास किस स्तर का है, यह किस तरह के हमले या विस्फोट को झेल सकती है या इसमें कौन-कौन से विशेष सुरक्षा सिस्टम हैं, इनमें से ज्यादातर जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
  • इसलिए इंटरनेट पर N701 को लेकर किए जाने वाले बुलेटप्रूफ, बमप्रूफ या परमाणु हमले से सुरक्षित’ जैसे दावों को आधिकारिक तथ्य नहीं माना जा सकता। उपलब्ध रिपोर्टें भी इसकी सुरक्षा व्यवस्था को काफी हद तक गोपनीय बताती हैं।

डिजाइन से ही दिखता है प्रेसिडेंशियल रुतबा

  • किसी भी कार को लोग सबसे पहले उसके बाहरी डिजाइन से देखते हैं। होंगकी N701 को पहली नजर में देखने पर इसका बड़ा और लंबा आकार सबसे पहले ध्यान खींचता है। इसमें लंबी बॉडी, बड़ी फ्रंट ग्रिल, क्रोम फिनिश और काफी बड़ा रियर केबिन दिया गया है।
  • कार के फ्रंट फेंडर पर झंडे लगाने के लिए विशेष माउंटिंग पॉइंट्स भी दिखाई देते हैं। विदेश यात्राओं के दौरान इनका इस्तेमाल आधिकारिक प्रोटोकॉल के तहत किया जाता है। पीछे की तरफ भी इसका डिजाइन काफी सादा लेकिन भव्य रखा गया है। बड़े ग्लास एरिया, क्रोम एलिमेंट और लंबी बॉडी इसे सामान्य लग्जरी सेडान से अलग पहचान देते हैं।


इंजन और सुरक्षा की पूरी जानकारी क्यों नहीं मिलती?

  • N701 की तकनीकी जानकारी का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक नहीं है। इसके इंजन और प्रदर्शन के आंकड़े भी आधिकारिक तौर पर पूरी तरह सामने नहीं आए हैं।
  • कुछ रिपोर्टों में V8 या V12 इंजन की संभावना बताई गई है, लेकिन इसे आधिकारिक स्पेसिफिकेशन नहीं माना जा सकता। इसी तरह कार की आर्मरिंग और सुरक्षा सिस्टम से जुड़ी कई जानकारियां भी अनुमान और मीडिया रिपोर्टों तक सीमित हैं।
  • यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि राष्ट्रपति की सुरक्षा वाली कार के बारे में उसकी पूरी तकनीकी क्षमता सार्वजनिक करना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं माना जाता।


हाेंगकी सिर्फ कार नहीं, चीन की पहचान भी

  • बता दें कि होंगकी की कहानी सिर्फ ऑटोमोबाइल तक सीमित नहीं है। चीन में यह ब्रांड लंबे समय से सरकारी नेतृत्व और राष्ट्रीय कार्यक्रमों से जुड़ा रहा है। अब चीन जिस तरह वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है, उसमें होंगकी उसकी घरेलू लग्जरी कार इंडस्ट्री की पहचान बन चुकी है।
  • ऐसे में शी जिनपिंग की विदेश यात्राओं में N701 का इस्तेमाल सिर्फ सुविधा या सुरक्षा का मामला नहीं है। यह चीन में बनी एक खास कार को राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और आधिकारिक पहचान के साथ पेश करने का तरीका भी है।


N701 विदेश यात्राओं में भी साथ रहती है

  • होंगकी N701 चीन के बाहर भी शी जिनपिंग के साथ नजर आ चुकी है। इसे उनकी सऊदी अरब यात्रा के दौरान भी देखा गया था। मिस्र की हालिया यात्रा में भी यह कार उनके आधिकारिक काफिले का हिस्सा बनी।
  • इससे पता चलता है कि N701 सिर्फ चीन के भीतर राष्ट्रपति के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है। विदेश यात्रा के दौरान भी इसे आधिकारिक प्रोटोकॉल का हिस्सा बनाया जाता है।


मिस्र में N701 की मौजूदगी का क्या मतलब है?

  • शी जिनपिंग की मिस्र यात्रा करीब दस साल बाद हुई। ऐसे समय में जब चीन और मिस्र के बीच आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक संबंधों का विस्तार हो रहा है, राष्ट्रपति की खास कार का वहां नजर आना भी प्रतीकात्मक महत्व रखता है।
  • मिस्र की भौगोलिक स्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण है। स्वेज नहर एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच एक अहम समुद्री व्यापार मार्ग है। चीन के लिए मिस्र व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से महत्वपूर्ण साझेदार है। इसलिए काहिरा की सड़कों पर दिखाई देने वाली N701 को केवल एक कार के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। यह चीन की बढ़ती औद्योगिक और कूटनीतिक मौजूदगी का भी प्रतीक बनती है।

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