श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर जानिए कैसे करें विधिवत पूजा शुभमुहूर्त में

जन्माष्टमी का त्यौहार इस वर्ष 11 और 12 जुलाई दोनों दिन मनाया जाएगा। 11 और 12 अगस्त दोनों ही दिन अष्टमी तिथि के चलते जन्माष्टमी का व्रत और पर्व मनाया जाएगा। 12 अगस्त को अष्टमी तिथि सूर्योदयकाल से शुरू होकर दिन में 11:16 मिनट तक ही रहेगी। हालांकि, मध्यरात्रि के समय अष्टमी तिथि केवल 11 तारीख को ही उपस्थित रहेगी, इसलिए इस दिन जन्माष्टमी व्रत का विशेष महत्व रहेगा। ज्योतिषाचार्य विभोर इंदुसुत कहते हैं कि इस बार जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बनेगा लेकिन 11 तारीख को उदयकालीन तिथि को सप्तमी होगी। सुबह 9:06 मिनट से ही अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। यह तिथि पूरे दिन और रात में व्रत के पारायण के समय भी उपस्थित रहेगी। 12 को 11:16 के बाद होगी नवमी।

वृत परायण
जन्माष्टमी व्रत का पारायण चंद्रमा के दर्शन के बाद ही किया जाता है। इसके बाद ही व्रत पूर्ण माना जाता है। इस बार 11 अगस्त को चंद्रोदय रात्रि 11:41 मिनट पर होगा। वहीं, 12 अगस्त को चंद्रोदय रात्रि 12:18 बजे होगा।

भगवान को लगाएं माखन मिश्री का भोग
भगवान श्रीकृष्ण को मक्खन और मिश्री बेहद प्रिय हैं। ऐसे में इनका भोग विशेष लाभकारी है। ज्योतिषविद भारत ज्ञान भूषण कहते हैं कि विशेष मुहूर्त में पूजन भगवान श्री कृष्ण की विशेष अनुकंपा का योग बनाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन कृतिका नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा, इस दिन चंद्रमा मेष राशि में और सूर्य कर्क राशि में रहेगा। इसके कारण वृद्धि योग भी होगा। 12 अगस्त को पूजा का शुभ समय रात 12:05 मिनट से 12:47 मिनट तक है। पूजा की अवधि 43 मिनट तक रहेगी।

पूजा की विधि

  • चौकी में लाल वस्त्र बिछाएं और भगवान कृष्ण के बालस्वरूप को पात्र में रखें।
  • फिर लड्डू गोपाल को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं।
  • भगवान को नए वस्त्र पहनाएं।
  • अब भगवान को रोली और अक्षत से तिलक करें।
  • अब लड्डू गोपाल को माखन मिश्री का भोग लगाएं। श्रीकृष्ण को तुलसी का पत्ता भी अर्पित करें।
  • भोग के बाद श्रीकृष्ण को गंगाजल भी अर्पित करें।
  • अब हाथ जोड़कर अपने आराध्य देव का ध्यान लगाएं।

गोपाल का पीताम्बरी (पीले वस्त्र) और मोर पंख से श्रृंगार करें। मंदिरों में कृष्ण कन्हैया को सजाने की तैयारियां शुरू कर दी गई है। झूले पर भगवान को झूलाया जाएगा। कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए भक्तों की भीड़ नहीं लगेगी। मंदिर प्रबंधन को प्रशासन की तरफ से जारी आदेशों का सख्ती से पालन करना होगा।

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