पीएचडी विभाग ने निजी मकान के परिसर में लगा दिया जलापूर्ति योजना, 5 वर्ष बाद भी नहीं मिल रहा है ग्रामीणों का लाभ

रोहतास: पीएचईडी के द्वारा कई जलापूर्ति योजना शुरू की गयी है। विभाग की नजर में इन जलापूर्ति योजनाओं से लोगों को लाभ मिल रहा है। परन्तु जहां यह योजना संचालित है। वहां के लोगों के मन में यह सवाल पनप रहा है कि आखिर किस मापदंड के तहत विभाग ने योजना को चालू कर दिया है। रोहतास जिले के करगहर प्रखंड क्षेत्र के धनेज गांव में 35 लाख 63 हजार रुपए की लागत से वर्ष 2015 में बनाया गया पेय जलापूर्ति योजना का लाभ यहां के लोगों को नहीं मिल रहा है। जिसको लेकर ग्रामिंणो में आक्रोश हैं। ठेकेदार ने इस योजना को एक घर के परिसर में संचालित कर दिया है। जिसके कारण इस योजना का लाभ सिर्फ उसी घर के लोगों को मिल रहा है। गांव में लगाया गया पाइप जहां तक मरम्मत के अभाव में बर्बाद हो रहा है।


ग्रामीणों की मानें तो एक निजी मकान के परिसर में इसका मोटर संचालित होने से पानी की सप्लाई गांव में नहीं किया जाता है। जमीन के अंदर बिछाया गया पाइप भी मरम्मत के अभाव में बर्बाद हो रहा है। जिससे लोगों को पेय जलापूर्ति का लाभ मिल भी नहीं रहा है, लेकिन विभाग की नजर में यह योजना चालू हो गई है। ऐसे में ठेकेदार एवं विभाग का दोहरा मापदंड स्पष्ट दिखता है। यहां पंप हाउस में विद्युत कनेक्शन एवं बिजली सप्लाई के लिए स्पेशल ट्रांसफार्मर भी लगा है।

अगर इसी तरह पीएचडी विभाग लापरवाह बना रहा तो हर घर नल का जल पहुंचाने का सीएम नीतीश कुमार का सपना सपना ही रह जाएगा और लोगों को गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत होना स्वभाविक है। ऐसे में विभागीय अधिकारी खुद सवालों के घेरे में हैं कि आखिर किसी के निजी मकान के परिसर में बिना स्थलीय जांच किए योजना शुरू कैसे कर दी गई।

रिपोर्ट: आशुतोष कुमार

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