संविधान, प्रशासनिक दस्तावेज के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन का माध्यम

मोतिहारी: महात्मा गाँधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय में संविधान दिवस मानाया गया। इस अवसर पर गाँधी अध्ययन एवं राजनीतिशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित वेबीनार में प्रो. एम.एम. सिमवाल हेमवती नन्दन बहुगुणा विश्वविद्यालय ने कहा कि हमारे देश का संविधान एक प्रशासनिक दस्तावेज ही नहीं है सामाजिक विकास का एक साधन भी है। संविधान देश को स्थायित्व देता है। इसलिए संविधान की भावना का आदर देशवासियों की तरफ से सम्मान अपेक्षि है। उन्होंने संविधान में मूल कर्तव्यों पर ध्यान दिलाया।

प्रो. संजीव कुमार शर्मा, माननीय कुलपति ने राष्ट्रीयता एवं संवैधानिक विकास में बिहार के साहित्यकारों तथा सामाजिक आन्दोलनों की भूमिका पर शोध करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रो. राजीव कुमार, अध्यक्ष राजनीतिशास्त्र विभाग ने कहा कि देश की स्वतंत्रता व स्थायी राजनीतिक व्यवस्था के निर्माण में लाखों लोगों ने जान गंवायी है। लालबहादुर शास्त्री एवं इन्दिरा गाँधी की अचानक मृत्यु पर शांतिपूर्ण रूप से सत्ता का हस्तांतरण हुआ।

प्रो. गोपाल रेड्डी, माननीय उपकुलपति ने संविधान को देश की महत्वपूर्ण धरोहर कहा और सक्षम विपक्ष की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रो. सुनिल महावर, अध्यक्ष गाँधी एवं शांति विभाग ने सभी बुद्धिजीवियों एवं शिक्षाविदों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

रिपोर्ट: रविशंकर मिश्रा

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