SIR विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाएगी कांग्रेस, विपक्षी दलों से किया संपर्क

SIR विवाद के बीच, कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गुरुवार को महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए विपक्षी दलों से संपर्क किया है।

इसके अलावा, कांग्रेस ने अपनी राज्य इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे 25 सितंबर को अपने-अपने राज्य के चुनाव आयोग कार्यालयों तक विरोध मार्च निकालें और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और उन्हें पद से हटाने की मांग करें।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने तीन सदस्यीय चुनाव पैनल के भीतर मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ को लेकर बार-बार चिंताएं जताई थीं।

दो सदस्यों ने 14 बार जताई आपत्ति

रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि इस देशव्यापी प्रक्रिया की देखरेख तीनों कमिश्नरों ने की है, लेकिन संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्तियां दर्ज कराईं।

जिनमें से चार आपत्तियां तो एक ही दिन में दर्ज की गईं और ये आपत्तियां उन फैसलों और आदेशों को लेकर थीं, जिनके बारे में उनका कहना था कि ये उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए थे।

इस दावे के बाद सियासी हलकों में भूचाल आ गया है। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है, वहीं बीजेपी ने इसे स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी बताया है।

मतभिन्नता पर चुनाव आयोग की सफाई

अंदरूनी मतभिन्नता ही नहीं अनभिज्ञता और मुख्यचुनाव आयुक्त की तरफ से एकतरफा कुछ फैसले लिए जाने की खबरों के बाद जहां सियासत तेज हो गई, वहीं आयोग ने विज्ञप्ति जारी कर सफाई दी और कहा कि कुछ विषयों पर विचारों में मतभिन्नता होना गलत नहीं है लेकिन हाल के महीनों में देशभर में एसआईआर समेत 40 नई पहल शुरू हुई और सभी सर्वसम्मत फैसले से हुए हैं।

यह और बात है कि देर रात तक दोनों चुनाव आयुक्त एसएस संधु और विवेक जोशी की ओर से कोई व्यक्तिगत सफाई नहीं आई। दरअसल बुधवार को छपे एक खबर में जहां दस महीने के अंदर दोनों आयुक्तों की ओर से विभिन्न मसलों पर 14 आपत्तियों की बात कही गई थी वहीं मुख्यरूप से आपत्ति फार्म 6 को लेकर थी। जिसमें नए वोटर के लिए भी अपने पिता और दादा के वोट लिस्ट की जानकारी मांगी गई थी।

आयुक्तों की आपत्ति थी कि ऐसा बदलाव तभी किया जा सकता है जब कानून मंत्रालय की ओर से गजट में ऐसा संशोधन किया जाए। हालांकि आयोग केक सूत्रों का कहना है कि यह आरोप ही गलत है क्योंकि फआर्म 6 में संशोधन किया ही नहीं गया। हां, उसके साथ एक घोषणापत्र संलग्न किया गया।

ईसीआई पर योग ने क्या कहा?

दूसरा बड़ा सवाल नए एकीकृत सॉफ्टवेयर यानी ईसीआई नेट, जिसमें ईआरओ नेट शामिल है को केंद्रीकृत करके उससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले ईआरओ और एईआरओ जैसे अधिकारियों को दूर कर दिया गया या फिर उनके अधिकारों को सीमित कर दिया गया।

जबकि आयोग की सफाई है कि इसीआईनेट अनधिकृत छेड़छाड़ रोकने के लिए साइबर सुरक्षा प्रोटोकाल के तहत काम करते हैं इसलिए राष्ट्रीय डेटाबेस में मानक साइबर सुरक्षा उपाय किए गए हैं। अधिकृत अधिकारियों को शक्ति प्रदान है। गोवा में जो व्यवधान आया था वह तकनीकी खामियों के कारण था।

SIR पर चुनाव आयुक्तों में मतभेद 

यह कदम मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच उठाया गया है। इस विवाद की शुरुआत एक मीडिया रिपोर्ट से हुई थी, जिसमें SIR को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों के बीच मतभेदों का जिक्र किया गया था।

चुनाव आयुक्त संधू व जोशी ने क्या कहा?

खबर के अनुसार चुनाव आयुक्त संधू व जोशी ने काम-काज के बंटवारे से जुड़े विवाद पर भी कैबिनेट सचिव से अपने अधिकारी मनीष गर्ग की शिकायत भी की।

आयोग के सूत्रों का कहना है कि कई मुद्दों पर चर्चा के दौरान मतभिन्नता हो सकती है। लेकिन अधिकतर मुद्दों पर अंतिम निर्णय में सर्वसम्मति थी। यह और बात है कि आयोग की ओर से इसके साक्ष्य के तौर पर कोई दस्तावेज उपलब्ध नही कराए गए। सूत्रों ने कहा कि एसआइआर की पारदर्शिता पर कोई सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी मई 2026 के निर्णय में एसआइआर की प्रक्रियाा को जाचा था और सही पाया था। वहीं एसआइआर पहलीबार नहीं हो रहा है। इससे पहले भी नौ बार हो चुका है।

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