पोषण माह: 2020 की तैयारियों की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा, उत्तम पोषण-उत्तर प्रदेश रोशन’ का दिया मंत्र


लखनऊ। स्वस्थ समाज की कुंजी पोषण की जागरूकता है। कुपोषण से मुक्ति के लिए बच्चों के साथ-साथ महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा अति-आवश्यक है। सुपोषित उत्तर प्रदेश के निर्माण के लिए प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने यह संदेश राष्ट्रीय पोषण माह -2020 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए दिया। शुक्रवार को लोकभवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में मुख्यमंत्री जी ने कहा है अतिकुपोषित बच्चों के अभिभावकों को जिला प्रशासन एक-एक गाय उपलब्ध कराए। साथ ही गाय के पोषण के लिए ₹900 प्रतिमाह की सहायता प्रदान की जाए। गाय न केवल दूध देगी, जिससे स्वास्थ्य अच्छा होगा, बल्कि कम्पोस्ट भी तैयार होगा। बैठक में मुख्यमंत्री जी ने कहा कि स्वस्थ एवं अधिक सक्षम भारत की अवधारणा को साकार करने हेतु तथा महिलाओं और बच्चों का कुपोषण दूर करने हेतु ‘पोषण अभियान’ आदरणीय प्रधानमंत्री जी द्वारा प्रेरित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। पोषण अभियान का उद्देश्य विभिन्न आयु वर्ग में व्याप्त कुपोषण की दरों में कमी लाना है। इसके लिए मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है।
07 सितंबर से प्रारंभ हो रहे राष्ट्रीय पोषण माह-2020 के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश, पोषण माह में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर सके, इस उद्देश्य के साथ सभी विभाग कार्य करें। गोरखपुर व आस-पास के क्षेत्रों में इंसेफेलाइटिस के दंश को हमने नियंत्रित किया है। यह एक सफलतम उदाहरण है। इससे सीखा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पूरे देश में माह सितम्बर ‘राष्ट्रीय पोषण माह’ के रूप में मनाया जाता है।कोविड-19 महामारी के संक्रमण के कारण इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह पर हम डिजिटल टेक्नोलॉजी का प्रयोग करते हुये कार्य करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुपोषण की रोकथाम में महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज, शिक्षा विभाग के मध्य बहुत अच्छा कन्वर्जेन्स होना चाहिए, क्योंकि पोषण सेवायें इनके साथ सीधी जुड़ी हैं। साथ ही कृषि, ग्राम्य विकास, खाद्य एवं रसद, आयुष तथा उद्यान विभागों की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि यह विभाग परिवार के स्वास्थ्य, पोषण एवं आर्थिक स्थिति में सुधार लाने तथा अन्न की उपलब्धता बढ़ाने में सहायक होते हैं, जो कि कुपोषण से बचाव में अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं।

जनसहभागिता से संभव होगा पोषण मुक्त उत्तर प्रदेश

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई भी अभियान तभी सफल हो सकता है, जब उसमें जनता भी सहभागी हो। इस हेतु शासकीय अधिकारियों के अतिरिक्त जन-प्रतिनिधियों, मीडियाकर्मियों, स्वैच्छिक संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी अभियान से जोड़ा जाए, जिससे यह सही अर्थों में जनांदोलन बन सके एवं कुपोषण के स्तर में सुधार आ सके। समस्त जनपदों में डिजिटल पोषण पंचायतों का आयोजन किया जाए। पोषण पंचायत प्रत्येक परिवार तक पहुंचते हुए जागरूकता सृजित करेगी। उन्होंने कहा कि इन पोषण पंचायतों द्वारा स्थानीय स्तर पर पोषण सम्बन्धी समस्याओं के चिन्हीकरण, प्रबंधन एवं समाधान का कार्य भी किया जाए। प्रत्येक परियोजना स्तर पर सूचना और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय के साथ-साथ मोबाइल वैन का प्रयोग किया जाए। पोषण से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाओं एवं जागरूकता संबंधी विषयों को स्थानीय स्तर पर माताओं व प्रत्येक परिवार से जोड़ा जाए।जब तक जागरूकता के माध्यम से व्यवहार परिवर्तन नहीं होगा, तब तक प्रदेश के पोषण आंकड़ों में सुधार नहीं आएगा। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्री, आशा, एएनएम, ग्राम प्रधान , स्वयं सहायता समूह के साथ मिलकर निम्न विषयों पर जन-सामान्य को जागरूक करने का प्रयास हो। इसके साथ ही, ओडीएफ/स्वच्छता अभियान के अन्तर्गत कार्य कर रहे स्वच्छाग्रहियों को भी पोषण अभियान से जोड़ते हुए जागरूकता फैलाई जाए।

न्यूट्री गार्डन की स्थापना अभिनव प्रयास

पोषण माह के अंतर्गत विशेष अभियान के तहत मुख्यमंत्री जी ने न्यूट्री गार्डन की स्थापना के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि इस अभियान में सामुदायिक स्थानों के साथ-साथ प्रत्येक घर में फल, सब्जी तथा औषधीय पौधे लगाने हेतु प्रोत्साहित किया जाए। भारत में आयुर्वेद की अत्यन्त प्राचीन एवं समृद्ध परम्परा है। अदरक, हल्दी, सहजन, बेल, आंवला, नीम, तुलसी, पुदीना आदि का भोजन में उपयोग करने से प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है , जिससे विभिन्न बीमारियां तथा वायरल संक्रमण से बचाव होता है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सितम्बर माह शाक-सब्जियों एवं फलों के रोपण का उचित समय है। इसलिए ‘पोषण के लिए पौधे’ अभियान के अन्तर्गत किचन गार्डन का विकास प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। न्यूट्री गार्डन के माध्यम से सरकारी स्कूलों, आवासीय स्कूलों, आंगनबाड़ी केन्द्रों, ग्राम पंचायत की भूमि को प्राथमिकता प्रदान की जाए, जिससे गरीब परिवारों, बच्चों, महिलाओं को सीधे लाभ प्राप्त हो सके।

06 माह में कुपोषण की दर में कमी का दिया लक्ष्य

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पोषण माह -2020 का एक प्रमुख उद्देश्य सैम बच्चों को शीघ्र चिन्हांकन है। आगामी 06 माह में प्रदेश के सभी जनपदों में कुपोषण की दरों में 01 प्रतिशत तक कमी लाने के प्रयास हों। इस हेतु बेसलाइन निर्धारित करने के लिए सभी जनपदों में वृहद स्तर पर वजन व लम्बाई मापने का एक दिवसीय अभियान चलाया जाए। इसके साथ ही सभी सैम/मैम बच्चों की स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच की जाए। मुख्यमंत्री जी ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले जनपदों को पोषण पुरस्कार से सम्मानित करने की भी घोषणा भी की।

स्थिति का सतत अनुश्रवण करते रहें अधिकारी

मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि पोषण माह के दौरान जो कार्य आरम्भ किया जाएगा, उसका लक्ष्य तथा लक्ष्यों के सापेक्ष प्रगति का आगामी 03 से 06 माह तक अनुश्रवण किया जाए। लक्ष्यों की उपलब्धि का आकलन मार्च, 2021 में किया जाएगा। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जिलाधिकारी, जिला पोषण समिति की बैठक आहूत कर पोषण माह की गतिविधियों हेतु विभागों के मध्य कन्वर्जेन्स स्थापित करते हुए समेकित रुप से क्षेत्र स्तर पर गतिविधियों का आयोजन कराना सुनिश्चित करें।ब्लॉक स्तर पर भी पोषण समिति पूर्व से गठित है, मुख्य विकास अधिकारी पोषण मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में नामित हैं, वे भी इसका अनुश्रवण गहनता से करें।
मुख्यमंत्री जी ने स्पष्ट किया कि पोषण अभियान का लक्ष्य मात्र एक माह ही नहीं है , बल्कि मार्च , 2021 तक लक्ष्य प्राप्त करने होंगे,इस हेतु जिला स्तर पर प्रत्येक सप्ताह में विभाग स्तर पर समीक्षा के उपरांत मंडलायुक्त और फिर मुख्य सचिव स्तर पर 01 माह में अनुश्रवण किया जाए। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वह स्वयं दो माह में इस कार्यक्रम की प्रगति का अनुश्रवण करेंगे।

कुपोषण से ग्रस्त बच्चों के अभिभावकों से लिया हाल-चाल

मुख्यमंत्री ने बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती सहित पांच आकांक्षात्मक जनपदों में विभिन्न सुपोषण योजनाओं के लाभार्थी बच्चों के अभिभावकों से बच्चों का हाल चाल लिया। मुख्यमंत्री जी ने जन्म के समय और अब बच्चे के वजन, उम्र, ग्रोथ, सरकार द्वारा मिल रहे लाभ आदि के बारे में जानकारी प्राप्त करते हुए सभी के स्वस्थ जीवन की कामना की। बच्चों की माताओं ने अपने पाल्य की सेहत में अपेक्षित सुधार पर मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद भी दिया। मुख्यमंत्री जी ने अभिभावकों को गोवंश पालन का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि गाय से कम्पोस्ट भी मिल सकेगा और दूध भी। जनपद बलरामपुर के गैसड़ी से 03 वर्षीय आर्यन के पिता जी ने बताया कि पैदा होने के समय आर्यन का वजन 02 किलो था अब 12 किलो 900 ग्राम हो गया है। पोषाहार सतत मिल रहा है, इससे बहुत फायदा मिला है। इसी प्रकार 04 साल की सुप्रिया की मां नीलम ने बताया कि अब उनकी बेटी 13 किलो की है। 13 माह की शिशु चेतना की मां ने बताया कि पोषाहार मिलने से वजन लगातार बढ़ रहा है।


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