लखनऊ। फाइलों में अटकी योजनाएं, वर्षों तक लंबित अनुमतियां और विभागों के बीच तालमेल की कमी। कभी उत्तर प्रदेश की पहचान मानी जाने वाली ये समस्याएं अब बीते दौर की बात बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लिमेंटेशन (प्रगति) ने शासन की सोच, कार्यशैली और नतीजों तीनों को बदल दिया है।
नए भारत की नई सोच के साथ अब समस्या पर नहीं, बल्कि समयबद्ध तरीके से समाधान पर चर्चा होती है। ‘प्रगति’ पोर्टल आज केवल समीक्षा तंत्र नहीं, बल्कि नए भारत की नई कार्यसंस्कृति का सशक्त माडल बन चुका है।
प्रगति भारत सरकार द्वारा 2015 में शुरू किया गया सूचना संचार प्रौद्योगिकी आधारित प्लेटफार्म है, जो प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में डिजिटल डैशबोर्ड और वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाओं, कार्यक्रमों और आम जनता की शिकायतों की निगरानी और समीक्षा करता है।
अपने सरकारी आवास में मीडिया से मुखातिब मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन से प्रेरित प्रगति माडल ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब दृढ़ इच्छाशक्ति, तकनीकी माध्यम और जवाबदेही एक मंच पर आती हैं, तो परिणाम अपने आप सामने आते हैं।
डिजिटल गवर्नेंस और सहकारी संघवाद के जरिये जटिल से जटिल परियोजनाओं को भी समयबद्ध ढंग से पूरा करना संभव हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों में योजनाएं तो बनती थीं लेकिन पूरी नहीं हो पाती थीं। प्रगति माडल ने प्रदेश को देश का इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन बना दिया है।