
कई प्रकार की अनियमितताएं उजागर हुई हैं। इस मामले में चंपत राय के लेटर बम ने हड़कंप मचाया हुआ है। वहीं, इस पूरे मामले में नियमों की धज्जियां उड़ाए जाने की बात सामने आई है। मामले में खुलासा हुआ है कि ट्रस्ट ने अपने स्तर से कर्मचारियों की भर्तियां कराई। इसमें बैंक की भी बड़ी भूमिका रही। मामले में सामने आया है कि बैंक के चीफ मैनेजर ने बाकायदा लेटर बनाया। इसमें 46 लोगों के नाम शामिल किए और उसे आउटसोर्सिंग कंपनी को भेज दिया गया। पत्र में कहा गया कि इन लोगों को नौकरी पर रख लिया गया है। कागजी प्रक्रिया को पूरी करा लें। इससे उनकी सैलरी का मुद्दा हल हो सके।
नियम-कायदों को तोड़ा गया
मामले की जांच में हैरान करने वाला खुलासा सामने आया है। नियमों के अनुसार, आउटसोर्सिंग कंपनी अपने स्तर से कर्मचारियों की भर्ती करती है। इसके बाद संबंधित विभाग को मैनपावर उपलब्ध करवाती है। मामले में पूरा खेल करते हुए भर्ती प्रक्रिया को ही पलट दिया गया। इसने अब हलचल बढ़ा दी है।
मामले में सामने आया है कि कंपनी को सीधे कर्मचारियों के नाम भेजे गए। उनकी अपने स्तर से नियुक्ति की गई। यह भी सामने आया है कि सभी को हाउसकीपिंग स्टाफ के तौर पर नियुक्त किया गया था। उनसे गणना कार्य कराया जा रहा था।

फर्जी रसीदें मिलने का दावा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही पुलिस को चंदे की कथित तौर पर फर्जी रसीदें मिलने का मामला सामने आया है। पुलिस इनको वेरिफाई करा रही है। इन रसीदों को किसने और कहां छपवाया? पुलिस अब इसकी जांच में जुटी है। पुलिस ने रिमांड पर लिए गए अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय से इस संबंध में पूछताछ की है। तीनों 40 घंटे की पुलिस रिमांड पर लिए गए थे।




