
नई दिल्ली: भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने भारत-अमेरिका संबंधों और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को लेकर कुछ अहम सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक्स पर चार अहम बिंदु शेयर करते हुए कहा कि भारत को अमेरिका के साथ रिश्ते जरूर मजबूत करने चाहिए, लेकिन किसी भी स्थिति में उस पर निर्भर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां दोनों देशों के हित अलग हों, वहां भारत को अपने स्वतंत्र फैसले लेने होंगे।
कंवल सिब्बल ने कहा कि अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक, तकनीकी और सैन्य ताकत है। उसके साथ करीबी संबंध भारत के लिए कई अवसर लेकर आते हैं। लेकिन यही रिश्ते तब दबाव का कारण भी बन सकते हैं, जब दोनों देशों के हित अलग-अलग हों। उनका कहना है कि भारत और अमेरिका की विदेश नीति और प्राथमिकताएं कभी पूरी तरह एक जैसी नहीं हो सकतीं।

रूस पर अमेरिकी दबाव का किया जिक्र
सिब्बल ने कहा कि अमेरिका लगातार चाहता रहा है कि भारत रूस से दूरी बनाए। यूक्रेन युद्ध के दौरान भी भारत पर रूस की आलोचना करने और रक्षा सहयोग कम करने का दबाव बनाया गया। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपने स्वतंत्र रुख को कायम रखा और रूस से रक्षा और ऊर्जा संबंध जारी रखे। उन्होंने कहा कि भारत की संप्रभु विदेश नीति का सम्मान होना चाहिए और रूस से रक्षा खरीद अमेरिका के खिलाफ नहीं है।
पाकिस्तान, ट्रंप और दोहरे रवैये पर सवाल
उन्होंने कहा कि एक ओर अमेरिका भारत से रूस से दूरी बनाने को कहता है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान को गैर-नाटो सहयोगी बनाए रखता है और उसके एफ-16 बेड़े को समय-समय पर समर्थन देता है। सिब्बल ने आरोप लगाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद युद्धविराम कराने का दावा किया, भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर को सार्वजनिक महत्व देकर पाकिस्तान की स्थिति मजबूत की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अब इसी रिश्ते का इस्तेमाल कश्मीर और सिंधु जल संधि जैसे मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने में कर रहा है।
व्यापार और तेल पर भी उठाए सवाल
सिब्बल ने कहा कि बाइडेन प्रशासन ने कभी भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया था ताकि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें न बढ़ें। लेकिन बाद में ट्रंप ने उसी रूसी तेल की खरीद पर भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगा दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को ‘टैरिफ किंग’ बताकर व्यापार वार्ता में दबाव बनाने की कोशिश करता रहा। इसी वजह से दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता अभी तक पूरी नहीं हो सकी।
चीन से निपटने की भारत की अपनी नीति
पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि भारत ने चीन के साथ सीमा विवाद और गलवान जैसे तनावों का सामना मुख्य रूप से अपने दम पर किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए कई समझौते किए, विशेष प्रतिनिधियों की व्यवस्था बनाई और सैन्य व कूटनीतिक बातचीत जारी रखी। उन्होंने यह भी कहा कि हिंद महासागर में भारत की मजबूत स्थिति है और इसी कारण भारत ने इंडो-पैसिफिक जैसी अवधारणाओं का समर्थन किया, लेकिन हाल में अमेरिका द्वारा अपने ‘इंडो-पैसिफिक कमांड’ से ‘इंडो’ शब्द हटाना भी एक महत्वपूर्ण संकेत है।
बांग्लादेश से मालदीव तक अमेरिकी नीति पर टिप्पणी
सिब्बल ने कहा कि अमेरिका की दक्षिण एशिया नीति कई बार भारत के हितों के अनुरूप नहीं रही। उन्होंने बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार, म्यांमार, श्रीलंका और मालदीव का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका ने इन मामलों में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भारत की चिंताओं के अनुरूप कदम नहीं उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान एक साथ अमेरिका और चीन दोनों के साथ रिश्ते मजबूत करता रहा है।
भारत को संतुलित विदेश नीति जारी रखनी चाहिए
कंवल सिब्बल ने कहा कि भारत को अमेरिका के साथ अपने रिश्ते मजबूत रखने चाहिए, क्योंकि निवेश, तकनीक और कई वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों के साझा हित हैं। लेकिन साथ ही भारत को ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), जी-20 और ग्लोबल साउथ जैसे मंचों पर अपनी स्वतंत्र भूमिका जारी रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी रणनीतिक स्वायत्तता है और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र निर्णय लेना ही देश के लिए सबसे सही रास्ता है।




