कौन है CJI सूर्यकांत को गाली देने वाला वकील, सुप्रीम कोर्ट में हाई वोल्टेज ड्रामा करने वाले पर क्यों नहीं होगी FIR?

जों को ‘न्यायिक सेवक’ कहा और फ‍िर CJI सूर्यकांत के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया और कोर्टरूम में कागज भी उछाले. इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उस वकील को कोर्टरूम से बाहर न‍िकाल द‍ि‍या, पर कोर्ट ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई करने से मना कर द‍िया है.

 सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने जजों को ‘न्यायिक सेवक’ कहा और फ‍िर CJI सूर्यकांत के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया और कोर्टरूम में कागज भी उछाले. इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उस वकील को कोर्टरूम से बाहर न‍िकाल द‍ि‍या, पर कोर्ट ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई करने से मना कर द‍िया है.

 सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने जजों को ‘न्यायिक सेवक’ कहा और फ‍िर CJI सूर्यकांत के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया और कोर्टरूम में कागज भी उछाले. इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उस वकील को कोर्टरूम से बाहर न‍िकाल द‍ि‍या, पर कोर्ट ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई करने से मना कर द‍िया है.

‘आप हमें आदेश दे रहे हैं?’ जस्टिस विश्वनाथन ने पूछा सवाल
याचिकाकर्ता की टिप्पणी पर पीठ में शामिल जस्टिस केवी विश्वनाथन ने हैरानी जताई. उन्होंने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या वह अदालत और न्यायाधीशों को आदेश दे रहा है? इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई. आरोप है कि याचिकाकर्ता ने CJI सूर्यकांत के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. इतना ही नहीं, उसने अपने हाथ में मौजूद कागजात भी हवा में उछाल दिए. अचानक हुए इस घटनाक्रम से कोर्टरूम में मौजूद वकील और अन्य लोग हैरान रह गए.

सुरक्षाकर्मियों ने कोर्टरूम से निकाला बाहर
याचिकाकर्ता के व्यवहार को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षाकर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा. सुरक्षाकर्मी प्रबल प्रताप को कोर्टरूम से बाहर लेकर गए. बताया गया कि कुछ समय तक उसे अदालत परिसर में DSP कार्यालय के अंदर रोका गया. इसके बाद सबसे बड़ा सवाल उठा कि क्या याचिकाकर्ता के खिलाफ पुलिस में FIR दर्ज होगी या अदालत की अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी?

हंगामे के बावजूद क्यों नहीं होगी FIR या दूसरी कार्रवाई?
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण रही. अदालत के कामकाज में व्यवधान और न्यायाधीशों के खिलाफ कथित अपशब्दों के इस्तेमाल के बावजूद पीठ ने याचिकाकर्ता के खिलाफ अवमानना या दूसरी दंडात्मक कार्यवाही शुरू नहीं करने का फैसला किया. जस्टिस केवी विश्वनाथन ने स्पष्ट किया कि अदालत उसके खिलाफ कोई कार्रवाई करने का प्रस्ताव नहीं करती. अदालत ने याचिकाकर्ता के मामले से जुड़े दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद उसकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) भी खारिज कर दी.

‘वह बहुत परेशान था, हमें उससे सहानुभूति है’
मामले में अदालत की एक टिप्पणी ने सभी का ध्यान खींचा. जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि याचिकाकर्ता बहुत परेशान था और उसका व्यवहार उसकी हताशा का नतीजा था. अदालत ने कहा कि उसे याचिकाकर्ता के प्रति केवल सहानुभूति है. यही वजह रही कि कोर्ट ने कथित दुर्व्यवहार के बावजूद उसके खिलाफ अवमानना या अन्य दंडात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की.

किस मामले की सुनवाई के दौरान हुआ पूरा विवाद?
प्रबल प्रताप ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. यह विवाद लखनऊ के विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के एक आदेश से जुड़ा था. याचिकाकर्ता चाहता था कि उसके आरोपों के आधार पर पुलिस को FIR दर्ज करने का निर्देश दिया जाए. हालांकि, मजिस्ट्रेट ने सीधे FIR दर्ज करने का आदेश देने के बजाय उसके आवेदन को निजी शिकायत यानी न‍िजी श‍ि‍कायत के रूप में मानकर आगे की प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया था.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की थी याचिका?
मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ प्रबल प्रताप ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया था. हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि निचली अदालत के आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता के पास प्रभावी वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध है. इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी.

सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज की याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड और विवादित आदेश का अध्ययन करने के बाद कहा कि हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं है. इसके बाद याचिकाकर्ता की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी गई. हालांकि, सुनवाई के दौरान हुए हाई वोल्टेज ड्रामे के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने संयम दिखाया और प्रबल प्रताप के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया.

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