
नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच सोमवार को सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच पहली औपचारिक बातचीत हुई। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। मुलाकात ऐसे समय हुई, जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च कर रहे थे। जेपी नड्डा ने बाद में बताया कि बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और उन्होंने प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त कर सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन का सहयोग करने की अपील की।
प्रतिनिधिमंडल में सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल थे। दोनों ने जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों पर विस्तार से चर्चा की। मुलाकात के बाद नड्डा ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि सोमवार सुबह पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत का प्रस्ताव आया। उन्होंने कहा कि सुबह 11:50 बजे से बातचीत शुरू हुई।

मुलाकात के बाद क्या बोले नड्डा?
नड्डा ने आगे कहा कि पहले मौखिक चर्चा हुई और उसके बाद शाम करीब चार बजे प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें लिखित याचिका सौंपी। नड्डा ने कहा कि उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों से अपना धरना समाप्त करने और प्रशासन को सामान्य स्थिति बहाल करने में सहयोग देने का अनुरोध किया है। दूसरी ओर, सीजेपी ने कहा कि अभी तक उनकी किसी भी मांग पर सरकार की ओर से कोई अंतिम आश्वासन नहीं मिला है।
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें?
सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।
- पहली मांग…सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई की है।
- दूसरी मांग… केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है।
- तीसरी मांग… उन नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की है, जिन्होंने कथित तौर पर आत्महत्या की।
सीजेपी संगठन का कहना है कि वर्ष 2026 के नीट-यूजी पेपर लीक और अन्य परीक्षा विवादों के लिए शिक्षा मंत्रालय जवाबदेह है। सीजेपी प्रतिनिधिनंडल का हिस्सा रहे रांका ने कहा कि जेपी नड्डा ने इन मांगों पर सरकार के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा करने के लिए समय मांगा है
क्या सरकार ने कोई आश्वासन दिया?
सीजेपी के एक अन्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि उन्होंने और आशुतोष रांका ने दोपहर से जेपी नड्डा के आवास पर रहकर अपनी सभी मांगें रखीं। उनके अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिया कि इन मांगों पर उचित स्तर पर चर्चा की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी भी मांग को स्वीकार करने का कोई वादा नहीं किया गया है। सौरव दास ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि जेपी नड्डा ने उन्हें आश्वासन दिया है कि जंतर-मंतर और आसपास चल रहे प्रदर्शन स्थल पर आगे कोई सख्त पुलिस कार्रवाई नहीं की जाएगी।
संसद मार्च के दौरान क्या हुआ?
- सोमवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी ‘संसद चलो’ मार्च के तहत संसद की ओर बढ़े। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।
- कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। संसद और आसपास के पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। रैपिड एक्शन फोर्स के जवान तैनात किए गए और एहतियात के तौर पर कुछ मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए।
- इसी दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद परिसर स्थित अपने कार्यालय में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की। हालांकि इस बैठक के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई।
क्या अब आंदोलन खत्म होने की संभावना है?
सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत शुरू होना इस आंदोलन का महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। जेपी नड्डा ने प्रदर्शनकारियों की लिखित याचिका मिलने की पुष्टि की है और कहा है कि उस पर उचित स्तर पर विचार किया जाएगा। वहीं, सीजेपी ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।




