
भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कीव में यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा से मुलाकात के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत, कूटनीति और समझौते के जरिए ही संभव है। जयशंकर ने संकेत दिया कि रूस और यूक्रेन दोनों की सहमति होने पर भारत शांति प्रयासों में सहयोग करने, यहां तक कि मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए भी तैयार है। दोनों नेताओं के बातचीत में काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा, भारत-यूक्रेन व्यापार, AI, डिजिटल तकनीक, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा हुई। यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया मुलाकात के बाद हो रहा है।
‘नई दिल्ली अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार’
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के साथ बातचीत के दौरान जयशंकर ने भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि इस संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं निकल सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थायी और स्वीकार्य समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है। जयशंकर ने कहा कि अगर भारत किसी भी तरह से मदद कर सकता है, तो हम तैयार हैं। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि अगर रूस और यूक्रेन दोनों सहमत हों तो नई दिल्ली शांति प्रयासों में सहयोग करने और अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
‘यह संघर्ष सिर्फ आर्थिक दबाव से खत्म नहीं होगा’
कीव में जयशंकर ने आगे कहा कि यह संघर्ष, जो आज अपने पांचवें साल में है, सिर्फ इसलिए हल नहीं होगा कि कोई तेल, एल्युमिना, खनिज, धातु या खाद खरीद रहा है या नहीं। यह संघर्ष बातचीत, कूटनीति और समझौते से ही हल होगा। इसीलिए हम इसे बढ़ावा देंगे। उन्होंने यह बात उस सवाल के जवाब में कही, जिसमें उनसे पूछा गया था कि अगर अमेरिका रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाता है तो क्या भारत रूसी तेल की खरीद कम करने की योजना बना रहा है।

भारत-यूक्रेन व्यापार में कई क्षेत्रों में सहयोग
भारत-यूक्रेन व्यापार संबंधों के भविष्य की संभावनाओं पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा,’जहां तक हमारे आपसी सहयोग के भविष्य की संभावनाओं का सवाल है, हम अच्छी तरह जानते हैं कि यूक्रेन में बड़ी ताकत और क्षमताएं हैं। भारत भी तेजी से विकास कर रहा है।’ प्रगति के कुछ प्रमुख क्षेत्र डिजिटल क्षमताएं, नवाचार और स्टार्टअप हैं। AI की दुनिया स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और यहां तक कि शासन के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा कर रही है। भारत और यूक्रेन इन बदलते घटनाक्रमों पर चर्चा करेंगे और भविष्य की साझेदारी के लिए खास क्षेत्रों पर भी बातचीत करेंगे।
फार्मा से लेकर कृषि और मशीनरी तक फैला है व्यापार
भारत-यूक्रेन व्यापार संबंधों पर जयशंकर ने कहा, ‘हमारा व्यापार कई क्षेत्रों में फैला हुआ है- फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य और कृषि तथा खाद से लेकर मशीनरी, रसायन और उपभोक्ता सामान तक। जाहिर है, पिछले चार वर्षों में युद्ध की स्थिति और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों के कारण इस व्यापार में कुछ रुकावटें आई हैं।’ इसके बावजूद व्यापारिक संबंधों में मजबूती भी देखने को मिली है और कुछ नई संभावनाएं भी सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि आज की बातचीत में मौजूदा मुद्दों के साथ-साथ भविष्य की संभावनाओं पर भी चर्चा और ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
शिक्षा भी भारत-यूक्रेन सहयोग का अहम हिस्सा
मैं यह भी बताना चाहता हूं कि शिक्षा लंबे समय से हमारे सहयोग का एक अहम क्षेत्र रहा है। अभी कई भारतीय छात्र यूक्रेन में पढ़ाई कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने यूक्रेन के विदेश मंत्री के माध्यम से उन अधिकारियों का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने युद्ध के दौरान भारतीय छात्रों का ध्यान रखा।
‘यह दौर युद्ध का नहीं है’
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, ‘सबसे पहले मैं युद्ध के मुद्दे पर बात करना चाहूंगा, जो दुर्भाग्य से अब अपने पांचवें साल में है। भारत का हमेशा से यही मानना रहा है कि यह दौर युद्ध का नहीं है और समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेंगे।’ सिर्फ दो दिन पहले बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि अंतहीन युद्ध की जगह अब युद्ध की समाप्ति होनी चाहिए। संघर्ष का हर बीतता दिन और ज्यादा मौतें और तबाही ही लाता है। जाहिर है, इसका रास्ता संबंधित पक्षों को ही खोजना होगा। लेकिन अगर भारत किसी भी तरह से मदद कर सकता है, तो हम तैयार हैं।
काला सागर में जहाजों की सुरक्षा पर भी हुई चर्चा
दोनों विदेश मंत्रियों ने काला सागर में सुरक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रमों पर भी विस्तार से चर्चा की। इस दौरान वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हालिया हमलों का मुद्दा भी बातचीत में शामिल रहा।
भारत के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि अतीत में ऐसी घटनाओं में भारतीय नाविक भी प्रभावित हुए हैं।
3 से 5 सितंबर तक चलेगा जयशंकर का दौरा
जयशंकर का तीन दिवसीय राजनयिक दौरा 3 से 5 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान वह यूक्रेन और पोलैंड की यात्रा करेंगे। दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना तथा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम घटनाक्रमों पर चर्चा करना है।




