उत्तर प्रदेश में भाजपा की महा तैयारी: पीएम मोदी और अमित शाह करेंगे ताबड़तोड़ जनसभाएं

उत्तर प्रदेश में तीसरी बार सरकार बनाने के लिए भाजपा पूरी ताकत झोंकने जा रही है। पार्टी सबसे बड़े सूरमाओं को प्रदेश के हर जिले तक उतारेगी। चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभाएं मंडल, जबकि गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सभाएं जिला स्तर पर की जाएंगी। प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में इस रणनीति पर मुहर लग चुकी है।

जनसभाओं को लेकर पहली वरीयता उन मंडलों और जिलों को दी जाएगी, जहां भाजपा का प्रदर्शन 2022 एवं 2024 में कमजोर रहा है। शहरी एवं मजबूत सीटों को अंत में मथा जाएगा।

भाजपा ने 2027 में यूपी की सत्ता प्राप्त कर 2029 के लोकसभा चुनाव में सीटों की संख्या दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इससे पहले के चुनावों में छह क्षेत्रों के एक-एक केंद्र पर मोदी की सभा कराई जाती थी।

हर हाल में तीसरी बार जीत जरूरी

भाजपा जानती है कि दिल्ली का राजनीतिक रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर निकलता है। पार्टी 2029 को भी लक्ष्य बनाकर बढ़ रही है, ऐसे में प्रदेश में हर हाल में तीसरी बार जीत जरूरी मानी जा रही। पार्टी के प्रदर्शन पर नजर डालें तो 2017 विधान सभा एवं 2019 लोकसभा चुनाव की तुलना में 2022 विस एवं 2024 लोस चुनाव में पार्टी का ग्राफ नीचे आया है।

पिछले लोकसभा को मानक मानें तो प्रदेश में सपा को ज्यादा विधान सभा सीटों पर जीत मिली। सपा ने 18 जिलों में भाजपा से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाई। वर्ष 2017 के मुकाबले 2022 में भाजपा 57 सीटें हार गई, जबकि सपा ने 64 लोकसभा सीटें बढ़ाकर आत्मविश्वास जुटा लिया।

कई मोर्चों पर एक साथ ताकत

मिशन-2027 में जुटी भाजपा कई मोर्चों पर एक साथ ताकत लगा रही है। प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में अमित शाह ने साफ कर दिया कि वो चुनावी कमान संभालेंगे। पार्टी ने इसके लिए पहले बूथ प्रबंधन का तार कसते हुए प्रदेश के सभी 1918 मंडलों के 177516 बूथों का एक ही दिन में सत्यापन कर लिया।

अब प्रदेशभर के सभी 18 मंडलों में प्रधानमंत्री की सभाएं आयोजित करने का लक्ष्य है, साथ ही 98 संगठनात्मक जिलों तक शाह और नवीन की जोड़ी पहुंचेगी। मध्य नवंबर तक सभी जिलों एवं विधान सभा प्रभारियों को सूची बनाने के लिए कहा गया है। इसके बाद भाजपाई दिग्गज प्रदेशभर में आक्रामक रणनीति के साथ प्रचार करेंगे।

एमएलसी चुनाव में उभरा सवर्णों में आक्राेश

पार्टी माानती है कि यूजीसी को लेकर जहां सवर्णों में आक्राेश एमएलसी चुनाव में भी उभरा, वहीं एसआईआर को लेकर विपक्ष का नैरेटिव नुकसान पहुंचा सकता है, ऐसे में बूथों एवं शक्ति केंद्र संयोजकों के साथ बैठक कर कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करने की रणनीति बनाई गई है। इससे पहले प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी एवं नितिन नवीन उप्र के अलग-अलग क्षेत्रों में बैठक कर वातावरण बनाएंगे।

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