CM योगी ने आषाढ़ में ‘शिक्षा परिवार’ पर की ‘समृद्धि की बारिश’

विजय कुमार निगम वाराणसी:-  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आषाढ़ मास में बाबा विश्वनाथ की धरा से उत्तर प्रदेश के ‘शिक्षा परिवार’ पर ‘समृद्धि की बारिश’ की। उन्होंने शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, उनके आश्रितों, बच्चों, संविदा कर्मियों आदि को बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही शिक्षकों से अपील की कि आप अनुशासित वातावरण बनाकर बच्चों को मेहनत व प्यार से पढ़ाकर गढ़िए। देश का भविष्य अच्छा होगा तो हर नागरिक का भविष्य अच्छा हो जाएगा। स्कूल का वातावरण स्वच्छ, सुंदर, अनुशासित और आध्यात्मिक तेज से परिपूर्ण दिखे। आप बच्चों का ध्यान दें, सरकार आपका ध्यान रखेगी। हर बच्चा स्कूल जाए, यह नागरिकों, शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों का दायित्व है।

सीएम ने सरकार के अन्य विभागों व निजी क्षेत्र से भी अपने कार्मिकों को सामाजिक सुरक्षा गारंटी देने को कहा। 

योगी ने बुधवार को 12  योजना का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने 1.10 करोड़ विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर, स्कूल बैग, स्टेशनरी के लिए 1200 रुपये प्रति विद्यार्थी के हिसाब से उनके अभिभावकों के खाते में कुल 1320 करोड़ की धनराशि का अंतरण किया। इस अवसर पर 10 लाख शिक्षकों व संविदा कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक के साथ एमओयू भी किया गया। यह कार्यक्रम प्रदेश भर में 404 स्थानों पर आयोजित किया गया।

श्री योगी ने बच्चों की दो यूनिफॉर्म, बैग, बुक, स्वेटर, जूता-मोजा आदि के लिए अंतरण की गई राशि का जिक्र कर शिक्षकों से कहा कि आपका दायित्व है कि विद्यालय स्वच्छ व अच्छा लगे।

विद्यालय के आंतरिक अनुशासन को बनाए रखने के लिए बच्चे निर्धारित यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, सर्दी में स्वेटर आदि पहनकर आएं। कल कुछ जगह छोटे बच्चे यूनिफॉर्म में ही बारिश में नहाते दिखे। बच्चे अबोध हैं, उन्हें सही राह दिखाना शिक्षकों का कर्तव्य और राष्ट्रीय दायित्व भी है। शिक्षक बच्चों को बताएं कि दोनों यूनिफॉर्म 3-3 दिन पहनें। गंदा होने पर इसे धोएं। खेलते समय दूसरे कपड़े पहनें और स्कूल से लौटकर वही जूते-मोजे पहनकर न खेलें। विद्यालयीय व सामान्य कामकाज के बारे में बताएंगे तो यह बच्चों के लिए प्रेरणा होगा, साथ ही स्वच्छ भारत मिशन की सफलता को और ऊंचाई तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि नए नामांकन के बाद भी कोई बच्चा इस सुविधा से छूटने नहीं पाएगा। 

श्री योगी ने कहा कि बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग ने भारतीय स्टेट बैंक के साथ एमओयू कर हर शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी है। उत्तर प्रदेश पहला राज्य है, जिसने इसे लागू किया।

स्थायी शिक्षक और कार्मिकों, जिनका वेतन 10 हजार रुपये से अधिक है, उन्हें 10 लाख रुपये का ग्रुप टर्म इंश्योरेंस कवर, जिसमें एक करोड़ रुपये का पर्सनल एक्सीडेंट कवर, एक करोड़ का स्थायी दिव्यांगता कवर, 1.6 करोड़ का एयर एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर और किसी अनहोनी पर बच्चों की शिक्षा व पुत्रियों के विवाह के लिए एड ऑन कवर प्रदान किया जाएगा। संविदाकर्मियों (वेतन 10 हजार से अधिक होने पर) को 30 से 80 लाख तक पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर, स्थायी/आंशिक दिव्यांगता पर 30 से 15 लाख का इंश्योरेंस कवर, एयर एक्सीडेंट पर 30 से 80 लाख तक इंश्योरेंस कवर, अनहोनी की स्थिति में बच्चों की शिक्षा व पुत्रियों के विवाह के लिए एड ऑन कवर प्रदान किया जाएगा। 10 हजार से कम नेट मासिक वेतन वाले कार्मिकों को जीरो बैलेंस अकाउंट के एटीएम कार्ड या पर्सनल एक्सीडेंटल पॉलिसी के आधार पर दो लाख रुपये का कवर प्रदान किया जाएगा। इससे अल्पवेतन भोगियों को भी सुविधाएं प्रदान होंगी। कैशलेस सुविधा के लिए 450 करोड़ रुपये का वार्षिक भुगतान प्रदेश सरकार करेगी। 

 मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पहले भी संभावनाएं थीं। चल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में उत्तर प्रदेश से शिक्षक जाते थे।

एक बार जब मैंने केंद्रीय मंत्री किरिन रिजिजू से पूछा कि वहां सब लोग बहुत अच्छी हिंदी बोलते हैं तो उन्होंने बताया कि हमारे यहां सभी शिक्षक यूपी से ही आए हैं। मध्य प्रदेश दौरे पर गया तो पता चला कि अलीगढ़, एटा, कासगंज, इटावा, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, मैनपुरी आदि जनपदों के लोग वहां कार्यरत हैं। जब संवाद किया तो पता चला कि उनके पूर्वज शिक्षक के रूप में यहां आए थे। लेकिन, एक समय ऐसा भी आया, जब कुछ लोगों ने निजी स्वार्थ के लिए उत्तर प्रदेश की शिक्षा को बर्बाद कर दिया था। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्ष समाज की आधारशिला है, इसके बिना कुछ भी हो पाना असंभव है।

प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से कहा है कि विकसित भारत की संकल्पना को पूरा करने की आधारशिला शिक्षा ही बनेगी। इसके लिए उन्होंने भारत की परंपराओं पर आधारित राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की। शिक्षा के बिना कुछ भी नहीं कर सकते। शिक्षा की उपेक्षा से ही उत्तर प्रदेश ‘बीमारू’ हो गया था। 9 साल पहले नौकरी के लिए भटकने वालों को यूपी के बाहर हेय दृष्टि से देखा जाता था, लेकिन डबल इंजन सरकार के प्रयास से अब पहचान का संकट नहीं रहा। शिक्षा पर किया गया निवेश कभी व्यर्थ नहीं जाता। शिक्षा का उन्नयन हुआ तो यूपी तेजी से दौड़ता दिख रहा है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में नकल विहीन शिक्षा हो रही है, लेकिन पहले बहुत विचित्र स्थिति थी। दो-तीन महीने तक माध्यमिक शिक्षा की परीक्षाएं चलती थीं, फिर दो-तीन महीने में रिजल्ट आता था। इससे आधा साल बर्बाद हो जाता था और कुछ समय त्योहारों आदि में निकल जाता था, पढ़ाई कब होती? लेकिन अब 14 दिन के भीतर परीक्षा होती है और अगले 15 दिन के भीतर परिणाम आ जाता है। एक महीने के अंदर ही सब कुछ हो जाता है। इस परीक्षा में 56 लाख बच्चे शामिल होते हैं।

मुख्यमंत्री ने तंज कसा कि पहले हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब आदि दूसरे राज्यों के लोग परीक्षा देने बलिया, गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़ आते थे।

यह देख लगा कि दाल में कुछ काला है। उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों के नौजवानों के  भविष्य से खिलवाड़ करने वाले ऐसे सारे अड्डे हमने बंद कराए। मुख्यमंत्री ने तंज कसा कि उ.प्र. के एक नेता तो कहते थे कि नकल करना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है ,लेकिन देश के भविष्य और अखंडता के साथ खिलवाड़ का अधिकार किसी को नहीं है। आचार्य चाणक्य, डॉ. राधाकृष्णन, मदन मोहन मालवीय हमारे आदर्श हैं।

चाणक्य जैसा गुरु होगा तो देश कभी विपन्न नहीं हो सकता और विदेशी ताकतें आंख उठाकर नहीं देख सकतीं। 

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि आपने 9 वर्ष में काफी मेहनत और प्रयास किए हैं। ऑपरेशन कायाकल्प, प्रोजेक्ट अलंकार, निपुण भारत आदि योजनाओं के अंतर्गत किए गए प्रयास सराहनीय हैं। स्कूल हमारे लिए मंदिर है। जिन स्कूलों में आपने अध्ययन किया है, वहां यदि सुविधाएं नहीं हो पाई थीं तो अब आपकी भी जिम्मेदारी है कि उन स्कूलों की उन्नति के लिए हरसंभव योगदान दें।

मुख्यमंत्री ने पुराने विद्यालयों का जिक्र कर कहा कि बालक-बालिकाओं के गवर्नमेंट इंटर कॉलेज, शासकीय सहायता प्राप्त निजी क्षेत्र के संचालित विद्यालयों आदि ने कई पीढ़ियां तैयार कीं।

किसी समय वहां प्रवेश के लिए सिफारिशें लगानी पड़ती थीं, लेकिन एक समय के बाद उन स्कूल-कॉलेजों की हालत बहुत खराब हो गई। कोई देखभाल नहीं करने वाला रहा। फिर भी शिक्षक, प्रधानाचार्य हिम्मत नहीं हारते थे, बल्कि मनोयोग से जुटे रहते थे। समय के साथ गिरावट आई, शासन ने संसाधन नहीं उपलब्ध कराए तो वे स्कूल-कॉलेज भी जीर्ण-शीर्ण हो गए। प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा परिषद ने लगभग हजार विद्यालयों के लिए पैसा दिलाया, जिससे भव्य भवन, अच्छे फर्नीचर, अच्छी लैब, डिजिटल लाइब्रेरी आदि बनी। जिन संस्थाओं ने पीढ़ियों को गढ़ा, उनके लिए हमारा भी यह दायित्व रहा। हो पाई थीं तो अब आपकी भी जिम्मेदारी है कि उन स्कूलों की उन्नति के लिए हरसंभव योगदान दें।

मुख्यमंत्री ने पुराने विद्यालयों का जिक्र कर कहा कि बालक-बालिकाओं के गवर्नमेंट इंटर कॉलेज, शासकीय सहायता प्राप्त निजी क्षेत्र के संचालित विद्यालयों आदि ने कई पीढ़ियां तैयार कीं।

किसी समय वहां प्रवेश के लिए सिफारिशें लगानी पड़ती थीं, लेकिन एक समय के बाद उन स्कूल-कॉलेजों की हालत बहुत खराब हो गई। कोई देखभाल नहीं करने वाला रहा। फिर भी शिक्षक, प्रधानाचार्य हिम्मत नहीं हारते थे, बल्कि मनोयोग से जुटे रहते थे। समय के साथ गिरावट आई, शासन ने संसाधन नहीं उपलब्ध कराए तो वे स्कूल-कॉलेज भी जीर्ण-शीर्ण हो गए। प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा परिषद ने लगभग हजार विद्यालयों के लिए पैसा दिलाया, जिससे भव्य भवन, अच्छे फर्नीचर, अच्छी लैब, डिजिटल लाइब्रेरी आदि बनी। जिन संस्थाओं ने पीढ़ियों को गढ़ा, उनके लिए हमारा भी यह दायित्व रहा।

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