बीबीएयू का 11वां दीक्षा समारोह, राजनाथ सिंह बोले- ‘मेक इन इंडिया” की सफलता के पीछे ‘बिलीव इन इंडिया’

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज हम केवल नियम फालो नहीं करते, नियम बनाते भी हैं। आज की युवा पीढ़ी को अपनी पहचान पर गर्व है। अपनी सभ्ययता पर विश्वास है। अपने देश के भविष्य पर भरोसा है। यह नए भारत में बहुत बड़ा परिवर्तन है। यानी यह कहा जा सकता है कि मेक इन इंडिया की सफलता के पीछे बिलीव इन इंडिया की भावना है।

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के अटल बिहारी वाजपेयी प्रेक्षागृह में आयोजित विश्वविद्यालय 11वें दीक्षा समारोह में राजनाथ सिंह ने कहा कि एक समय था जब भारत में स्पेस प्रोग्राम के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे। राकेट साइकिलों और बैलगाड़ी पर ले जाए जाते थे।

लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के विज्ञानियों ने सिद्ध कर दिया कि सफलता संसाधनों की मोहताज नहीं होती। आज देश मंगल तक पहुंच चुका है। सूर्य के अध्ययन के लिए आदित्य एल-1 भेजा जा चुका है। भारत अब ह्यूमन स्पेस फ्लाइट की तैयारी कर रहा है और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की दिशा में हम तेजी से कदम आगे बढ़ा रहे हैं।

रक्षामंत्री ने कहा कि कभी हमारी उपलब्धियों पर दुनिया व्यंग्य करती थी। जब भारत ने मार्स मिशन लांच किया था, तब विदेश में इसका मजाक उड़ाया गया था। न्यूयार्क टाइम्स ने रेसिस्ट कार्टून प्रकाशित किया, लेकिन आज पूरी दुनिया भारत के स्पेस प्रोग्राम की सफलता देखकर हैरान है।

अंग्रेजी की एक कहावत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सफलता की यात्रा अक्सर चार पड़ावों से गुजरती है। पहले लोग आपको नजरंदाज करते हैं। फिर आप पर हंसते हैं। फिर आपका विरोध करते हैं और अंत में वही लोग आपकी सफलता की तारीफ करते हैं।

उन्होंने कहा कि आज भारत में पेटेंट्स पंजीकरण की संख्या कई गुणा बढ़ गई है। 2015 में हम ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में 81वें स्थान पर थे और आज हम 38वें स्थान पर आ गए हैं। कुछ समय में हम शीर्ष तीन में आ जाएंगे। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप ईको सिस्टम बन चुका है।

बड़े लक्ष्य प्राप्त करने के लिए मन को बड़ा रखें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्ति ”छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता” का जिक्र करते हुए कहा कि जीवन में बड़े लक्ष्य प्राप्त करने के लिए मन को बड़ा रखना आवश्यक है। बड़े मन में व्यापक सोच और सकारात्मकता होती है, जिससे व्यक्ति परमानंद की अनुभूति प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने मन को एक वृत्त (सर्किल) की तरह बताते हुए कहा कि जैसे-जैसे उसका दायरा बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे सुख और संतुष्टि का विस्तार होता जाता है। अंबेडकर का मानना था कि व्यक्ति को संवैधानिक तरीके से ही समस्या का समाधान करना चाहिए। उन्होंने तीन मंत्र दिए थे- एजुकेट – शिक्षा। एजिस्टेट – अन्याय को देखकर मन का आंदोलित होना। आर्गनाइज- बाकी लोगों को गलत के प्रति जागरूक करना।

राजनाथ ने तोड़ा प्रोटोकाल, बोले- यह शिक्षण संस्था

राजनाथ सिंह ने मंच पर आते ही कहा कि ब्रजेश जी (ब्रजेश पाठक) यह शिक्षण संस्था है। इसलिए मैं प्रोटोकाल तोड़ रहा हूं और सबसे पहले कुलपति का नाम ले रहा हूं। इसके बाद राजनाथ ने कुलपति राजकुमार मित्तल का नाम लिया, इसके बाद उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और अन्य विशिष्टजन का।

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