देश में सामान्य से 43% कम बरसे बादल, मध्य भारत में सबसे ज्यादा कमी, अब जुलाई से उम्मीदें?

नयी दिल्ली । देश में इस साल जून के महीने में मानसून की रफ्तार काफी धीमी रही है, जिसके कारण देश भर में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल जून महीने में पूरे देश में कुल मिलाकर सामान्य के मुकाबले 43.1 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। मौसम विभाग के अनुसार देश में 28 जून तक केवल 85.2 मिलीमीटर वास्तविक बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि के लिए सामान्य वर्षा का स्तर 149.8 मिलीमीटर होना चाहिए था। जून के पूरे महीने में इक्का-दुक्का दिनों को छोड़कर दैनिक औसत बारिश का ग्राफ हमेशा सामान्य के लाल निशान से काफी नीचे बना रहा है।देश के सभी चारों प्रमुख हिस्सों में बारिश की भारी कमी देखी गई है, जिसका विवरण इस प्रकार है, मध्य भारत में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक रही है।

इस क्षेत्र में सामान्य के मुकाबले 56 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

जून के मध्य से लेकर अब तक यह पूरा क्षेत्र लगातार सूखे जैसे हालातों से जूझ रहा है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी मानसून की सुस्ती का असर दिखा और यहाँ सामान्य से 43 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। यहाँ भी बारिश का ग्राफ लगातार नीचे गिरा है। यहाँ सामान्य से 31 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। जून की शुरुआत में यहाँ अच्छी बारिश हुई थी, लेकिन महीने के दूसरे पखवाड़े में यहाँ भी मानसून काफी कमजोर पड़ गया। अन्य क्षेत्रों की तुलना में यहाँ की स्थिति थोड़ी बेहतर है, जहाँ सामान्य से 29 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। जून के पहले हफ्ते में यहाँ सामान्य से अधिक बारिश हुई थी, लेकिन बाद के दिनों में यहाँ भी गिरावट दर्ज की गई।

जून का महीना खत्म होने को है और देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की कमी का यह आंकड़ा 43 प्रतिशत से अधिक बना हुआ है।

चूंकि खरीफ फसलों की बुआई के लिए जून की बारिश को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में इस कमी के कारण खेती-किसानी पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका काफी बढ़ गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि मौसम वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जुलाई की शुरुआत के साथ मानसून की सक्रियता दोबारा बढ़ेगी, जिससे इस कमी की भरपाई हो सकेगी।

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