लखनऊ-कानपुर हाईवे पर 107 करोड़ से बनेगा अंडरपास और फुटओवर ब्रिज, दीपावली से शुरू होगा काम.

दीपावली के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) लखनऊ-कानपुर राजमार्ग पर अंडरपास और फुटओवर ब्रिज का निर्माण शुरू होगा। 107 करोड़ की लागत से उन स्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां सड़क पार करने के दौरान सबसे अधिक दुर्घटनाएं होती हैं और स्थानीय आबादी को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

वर्तमान में यूटिलिटी ट्रांसफर करने का काम शुरू कर दिया गया है। यहां 15 दिन बाद सर्विस रोड का निर्माण शुरू होगा। इस बजट से ही एनएचएआइ राजमार्ग की अन्य कमियां भी दूर करेगा। प्रोजेक्ट को 18 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

एनएचएआइ के मुताबिक, राजमार्ग पर दो अंडरपास और एक फुटओवर ब्रिज का निर्माण होगा। पूरी परियोजना पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से 107 करोड़ की स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है। रूट डायवर्जन को लेकर उन्नाव पुलिस व एनएचएआइ अफसरों के बीच जल्द बैठक होगी। प्राधिकरण अफसरों के मुताबिक, नवाबगंज तिराहा और दही चौकी पर अंडरपास बनाए जाएंगे।

स्थानीय लोगों व जनप्रतिनिधियों के अनुरोध पर त्रिभुवन खेड़ा पर फ्लाइओवर बनेगा। ऐसे में जो दोनों बाटल नेक पर ट्रकों की लंबी कतार लगती थी, वह अब नीचे से ही निकल जाएगी और ऊपर ट्रैफिक का संचालन सुगमता से हो सकेगा। इस पूरे काम को करने के लिए नवाबगंज व दही चौकी के पास वन विभाग की तीन हेक्टेयर जमीन पर लगे पेड़ को शिफ्ट करने का काम भी शुरू कर दिया गया है।

कार्यदायी संस्था ड्रेनेज और लाइटिंग की करेगा व्यवस्था

एनएचएआइ ड्रेनेज और आधुनिक रोशनी की उचित व्यवस्था कराएगा। अंडरपास पर 24 घंटे पर्याप्त रोशनी रखने के लिए यहां बड़े-बड़े रोशनदान भी बनाए जाएंगे, जिससे बिजली कटौती के दौरान भी दिन में पर्याप्त रोशनी रहे। बरसात का पानी न भरे उसके लिए ड्रेनेज सिस्टम को अत्याधुनिक तकनीक की मदद से बनाया जाएगा।

अंडरपास के बाक्स को पुश बैक से जमीन के भीतर डाला जाएगा। पुश बैक 55 मीटर लंबा होगा। वर्तमान में सेतु निगम की ओर से यह प्रयोग आलमबाग अवध चौराहे पर किया जा रहा है। यह बाक्स 12 मीटर करीब चौड़ा और पांच मीटर से अधिक ऊंचा होगा।

यूटिलिटी ट्रांसफर से जुड़ा काम शुरू कर दिया गया है। सर्विस लेन बनाने का काम जल्द शुरू होगा। पूरा प्रयास है कि दीपावली के आसपास अंडरपास व फुटओवर ब्रिज का काम शुरू कर दिया जाए। -नवरत्न, परियोजना निदेशक, एनएचएआइ

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