
पहले से ही विपक्ष के निशाने पर रहे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर अब नए खुलासों के बाद विपक्ष और हमलावर हो गया है और इस्तीफे से लेकर गिरफ्तारी तक की मांग की है। बुधवार को एक अखबार में यह खबर आई कि एसआईआर और मतदाता लिस्ट को लेकर दो आयुक्तों ने कई बिंदुओं पर लिखित रूप से अपनी असहमति जताई थी। फिर भी वह फैसले हुए।
कांग्रेस नेता व लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने इस दौरान न सिर्फ आयोग के काम-काज पर गंभीर सवाल खड़े किए है बल्कि सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे का मांग की है। अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी ने तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार करने जैसी मांग भी की है।
एसआईआर और फॉर्म-6 में बदलाव पर हुआ टकराव
कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने बुधवार को पत्रकारवार्ता में सीईसी ज्ञानेश कुमार पर आयोग को हाईजैक करने और आंतरिक मतभेदों को दबाने जैसे गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग के अन्य दो चुनाव आयुक्तों ने एसआईआर और फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर कई लिखित आपत्तियां व असहमति नोट दर्ज कराए थे, लेकिन सीईसी ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया।
1995 का सुप्रीम फैसला
उन्होंने कहा कि सीईसी का यह रवैया तब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में अपने एक फैसले में यह साफ किया है कि चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त अन्य आयुक्तों से श्रेष्ठ नहीं बल्कि एक बराबर के होते है, बस इस बराबरी में वह पहले नंबर में होते है। सिंघवी ने केंद्र सरकार व चुनाव आयोग पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि एक और गृह मंत्रालय और दूसरी ओर सीईसी मिलकर संवैधानिक संस्थाओं पर आंतरिक बुलडोजर चलाने जैसा काम कर रहे है।

उन्होंने फार्म-6 में अनाधिकृत बदलाव और आईटी सिस्टम से जुड़े फैसलों पर पारदर्शिता की मांग की। वहीं राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी इस मुद्दे पर चुनाव आयोग को घेरा और सीईसी ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने एसआईआर की पूरी प्रक्रिया और पुराने चुनावों को रद करने जैसी मांग भी की।
किसने क्या कहा?
‘वोट चोरी भारतीय जनता के खिलाफ एक अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इसे करने वाले बीजेपी, आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का काम किया है। न्याय होकर रहेगा। मैं चुनाव आयोग और और उनके अफसरों को कह रहा हूं कि आप जो कर रहे हो गलत कर रहे हो। यह देश के खिलाफ है। समय आएगा और हम आपको पकडेंगे आप बचने वाले नहीं हैं। ’
राहुल गांधी, कांग्रेस नेता व लोकसभा में विपक्ष के नेता।
‘24 अप्रैल 2026 को 73 विपक्षी राज्यसभा सांसदों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने राज्यसभा के महासचिव को नया नोटिस दिया था। संसद का मानसून सत्र अभी तक समाप्त नहीं हुआ है। क्या सभापति अब उस लंबित नोटिस पर निर्णय लेंगे?
मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में विपक्ष के नेता।
‘ये एक बेहद गंभीर मामला है। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर संवैधानिक अपराध है। ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है।सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले।’
अखिलेश यादव, सपा प्रमुख।‘ वोट चोरी के सरगना ज्ञानेश कुमार हैं। हम मांग करते हैं कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करके तुरंत उन पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाया जाए और पिछले कुछ सालों में जितने चुनाव हुए हैं, वे सब रद्द करके दोबारा करवाए जाएं।हमारी मांग है कि पिछले तीन सालों में जितने बदलाव वोटर लिस्ट के अंदर किए गए हैं, वे खारिज करके तीन साल पुरानी वोटर लिस्ट को बहाल किया जाए।’
अरविंद केजरीवाल, आप संयोजक।
ममता ने किया देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान
बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले की मतदाता सूची के आधार पर राज्य में विधानसभा चुनाव दोबारा कराने की मांग की है। बुधवार को फेसबुक लाइव पर उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग करते हुए उनके खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। ममता ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने भाजपा के पक्ष में काम किया और कहा कि ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त पद पर बने रहने तक देशभर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।




