
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के महत्वाकांक्षी ‘जीरो पॉवर्टी उत्तर प्रदेश’ अभियान के तहत प्रदेश के गरीब और वंचित परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम रंग लाने लगी है। हालिया समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 4,25,101 अत्यंत गरीब परिवारों (34 प्रतिशत) को उनकी पात्रता के अनुसार सभी सरकारी योजनाओं से शत-प्रतिशत आच्छादित (संतृप्त) किया जा चुका है। प्रदेश सरकार का आकलन है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के वर्तमान लक्ष्य पूरे होते ही यह आंकड़ा 30 प्रतिशत और बढ़ जाएगा, जिससे प्रदेश में एक बहुत बड़ी आबादी गरीबी रेखा से स्थायी रूप से बाहर आ जाएगी।
पहले और दूसरे चरण का रिपोर्ट कार्ड
इस महाअभियान के प्रथम चरण में राशन कार्ड, निराश्रित महिला पेंशन, श्रमिक (बीओसीडब्ल्यू) कार्ड, आयुष्मान भारत, दिव्यांग व वृद्धावस्था पेंशन, किसान सम्मान निधि और पीएम/सीएम आवास जैसी आठ बुनियादी योजनाओं को शामिल किया गया था। इनमें राशन कार्ड में 97%, निराश्रित महिला पेंशन में 98%, श्रमिक कार्ड में 95% तथा आयुष्मान भारत योजना में 92% की बड़ी उपलब्धि दर्ज की जा चुकी है। वहीं, दूसरे चरण की योजनाओं में शौचालय सहायता, स्वयं सहायता समूह (SHG) और स्कूल नामांकन में यूपी ने 100 प्रतिशत संतृप्तिकरण का ऐतिहासिक आंकड़ा छू लिया है।

हाथरस बना प्रदेश का टॉपर, उन्नाव पायदान में सबसे नीचे
योजनाओं को धरातल पर उतारने और गरीब परिवारों तक लाभ पहुंचाने के मामले में जिलों की रैंकिंग भी जारी की गई है। इस सूची में हाथरस 78 प्रतिशत की शानदार उपलब्धि के साथ पूरे उत्तर प्रदेश में पहले स्थान पर काबिज है। इसके बाद गाजियाबाद, शामली, मुजफ्फरनगर, बदायूं, अमरोहा, महाराजगंज, मेरठ, बागपत और गोरखपुर शीर्ष दस (Top 10) जिलों में शामिल हैं। इसके विपरीत आगरा, मऊ, प्रयागराज, बांदा, बलिया, फतेहपुर, फिरोजाबाद, श्रावस्ती, बहराइच और उन्नाव का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा, जिसमें उन्नाव पूरे प्रदेश में अंतिम स्थान पर है।
युवाओं को हुनर और स्वरोजगार की सौगात
इस अभियान का एक सबसे मजबूत स्तंभ युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए प्रदेश में 18 से 35 वर्ष के लगभग 19 लाख युवाओं की पहचान की गई है। अब तक 43,647 युवाओं को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया जा चुका है और 1,14,715 युवाओं को स्किलिंग कार्यक्रमों के लिए चिन्हित किया गया है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) और आईटीआई (ITI) के माध्यम से हजारों युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा गया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, विश्वकर्मा श्रम सम्मान और ओडीओपी (ODOP) के जरिए युवाओं को नौकरी के साथ-साथ स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर दिए जा रहे हैं।
कॉरपोरेट और सामाजिक संगठनों का मिला साथ
योगी सरकार ने इस अभियान को पूरी तरह से समावेशी बनाने के लिए सामाजिक संगठनों और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) संस्थाओं की भागीदारी को भी जोड़ा है। विभिन्न संस्थाओं के साथ हुए एमओयू (MoU) के तहत अब आजीविका विकास, प्लेसमेंट, स्वास्थ्य सेवाएं, मोतियाबिंद ऑपरेशन, टीबी उन्मूलन, पोषण किट, स्कूल किट और दिव्यांगजनों के लिए सहायक उपकरण उपलब्ध कराने जैसे सामाजिक कार्य तेज गति से किए जाएंगे। सरकार का अंतिम लक्ष्य हर पात्र व्यक्ति को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है।




