
जैसे आसार थे, वैसा ही हुआ भी। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत भरपूर हंगामे के साथ हुई। राम मंदिर चढ़ावा चोरी और नीट-यूजी पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी पहले से किए बैठे विपक्षी दलों ने लगातार हंगामा और नारेबाजी की।
चूंकि, बाहर सड़क पर चल रहे काकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन ने भी माहौल को गर्म कर दिया था, इसलिए सरकार ने भी जबरन सदन चलाने और विधायी कार्य निपटाने का कोई इरादा नहीं दिखाया।

मंगलवार को शुरू होगी सदन
लोकसभा और राज्यसभा में पीठ से जरूर शांति बनाए रखने और चर्चा शुरू करने की अपील की जाती रही, लेकिन विपक्ष के तेवर नरम न पड़ते देख दोनों सदनों को बार-बार कुछ-कुछ देर तक स्थगित करने के बाद अंतत: मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को दोनों सदनों का माहौल लगभग एक जैसा रहा। लोकसभा में सुबह 11 बजे प्रश्नकाल शुरू हुआ ही था कि कांग्रेस और सपा सहित सभी विपक्षी दलों के सदस्य चढ़ावा चोरी और नीट-यूजी पेपर लीक के मुद्दा उठाकर हंगामा-नारेबाजी करने लगे। कुछ सदस्य नारे लिखे तख्तियां भी लिए थे।
विपक्ष खेमे से कुछ समय के लिए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, सपा नेता अखिलेश यादव सहित अन्य प्रमुख विपक्षी नेता आए, लेकिन सत्ता पक्ष की ओर से पहली पंक्ति के नेता सदन के बाहर हालात संभालने की जिद्दोजहद में लगे रहे। यहां संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू और अर्जुन राम मेघवाल मोर्चा संभाले हुए थे।

विपक्ष का चढ़ावा चोरी-नीट लीक पर विरोध
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सदन नियमों से संचालित होता है। यहां तख्तियां नहीं लहराई जा सकतीं। इस पर भी विपक्ष के तेवर कम न हुए तो दोपहर 12 बजे तक सदन स्थगित कर दिया गया। बार-बार ऐसे ही हालात बनने के कारण 12, दो, ढाई और तीन बजे तक स्थगन के बाद आखिरकार मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
वहीं, राज्य सभा में सुबह सबसे पहले नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाई गई। फिर करीब 11.30 बजे सभापति डा. सीपी राधाकृष्णन ने जैसे ही शून्यकाल के आरंभ की घोषणा की, वैसे ही नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे खड़े हो गए। उन्होंने नीट-यूजी पेपर लीक का मामला उठाते हुए कहा कि यह लाखों बच्चों के भविष्य की बात है। जंतर-मंतर पर हजारों छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं, पुलिस उन्हें मार रही है।

उनके समर्थन में कांग्रेस, सपा, डीएमके और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य खड़े होकर नारेबाजी करने लगे। इस पर सभापति ने तुरंत ही सदन 12 बजे तक स्थगित कर दिया। 12 बजे शुरु हुआ तो कांग्रेस की ओर से जयराम रमेश ने चढ़ावा चोरी पर नारेबाजी शुरू कर दी। फिर यूं ही हंगामा होता रहा और तीन-चार बार के आंशिक स्थगन के बाद दोपहर दो बजे सदन मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
आज से सदन चलाने की होगी कोशिश
राज्यसभा में सोमवार के लिए राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक सूचीबद्ध था। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के अपमान पर तीन वर्ष की कैद के प्रविधान वाला यह विधेयक गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किया जाना प्रस्तावित था, लेकिन हंगामे के कारण इसे पेश नहीं किया जा सका। हालात को भांपते हुए सरकार ने भी हंगामे के बीच इसे प्रस्तुत किया जाना उचित नहीं समझा।

वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू का कहना है कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक हो गई है। उसमें राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक सहित अन्य विधेयकों पर चर्चा के लिए समय का आवंटन हो गया है।
सरकार मंगलवार से सदन को सुचारू चलाते हुए विधायी कार्य आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी और विपक्ष से चर्चा में भाग लेने की अपील करेगी। हालांकि, परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को लाए जाने को लेकर अभी कोई चर्चा नहीं हुई है।



