पीएम मोदी ने पुतिन को दी ये खास किताब, जानें इसे क्यों कहते हैं तमिल संस्कृति का दस्तावेज.

भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हुई। पीएम मोदी ने पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उन्हें गले लगाया। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और सहयोग से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान पीएम ने रूसी राष्ट्रपति को तमिल कवि तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध रचना तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भी भेंट किया। तमिल की एक सबसे श्रद्धेय प्राचीन कृति तिरुक्कुरल तमिल की एक सबसे श्रद्धेय प्राचीन कृति है।  यह मानव नैतिकता और जीवन में बेहतरी का रास्ता दिखलाता है। संभवतः बाइबल, कुरान और गीता के बाद कुरल का सबसे अधिक भाषाओं में अनुवाद किया गया है। 1730 में तिरुक्कुरल का लैटिन अनुवाद कोस्टांज़ो बेस्ची द्वारा किया गया जिससे यूरोपीय बुद्धिजीवियों को उल्लेखनीय रूप से तमिल साहित्य के सौंदर्य और समृद्धि को जानने में मदद मिली।

तिरुवल्लुवर अत्यंत लोकप्रिय प्राचीन तमिल संत कवि और दार्शनिक थे। दक्षिण भारत में उन्हें वैसे माना जाता है जैसे उत्तर भारत में तुलसीदास या कबीर। उनके काल का अनुमान 200 ई.पू. और 30 ई.पू. के बीच लगाया गया है। उन्होंने 'तिरुक्कुरल' (Thirukkural) की रचना की थी, जिसे तमिल संस्कृति में बेहद पूजनीय माना जाता है। तिरुवल्लुवर का जन्म मायलापुर में हुआ था। तिरुवल्लुवर ने लोगों को बताया कि एक व्यक्ति गृहस्थ या गृहस्थस्वामी का जीवन जीने के साथ-साथ एक दिव्य जीवन या शुद्ध और पवित्र जीवन जी सकता है। उन्होंने लोगों को बताया कि शुद्ध और पवित्रता से परिपूर्ण दिव्य जीवन जीने के लिए परिवार को छोड़कर संन्यासी बनने की आवश्यकता नहीं है।

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