GST Council की बैठक में कई बड़े फैसले: रजिस्ट्रेशन से ITC और रिफंड से टैक्स रेट तक, 10 बदलावों की पूरी लिस्ट.

वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद की 57वीं बैठक में देश के व्यापारियों और करदाताओं के हित में कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई इस अहम बैठक 10 बड़े फैसले लिए गए। मीटिंग का मेन फोकस टैक्स दरों में बदलाव के बजाय ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर रहा।

सबसे बड़े सुधार के तहत अब जीएसटी अधिकारियों से मनमानी गिरफ्तारी का अधिकार पूरी तरह छीन लिया गया है। इस बैठक के बाद ‘जीएसटी 2.0’ की दिशा में कदम बढ़ाते हुए कागजी कार्रवाई और इंस्पेक्टर राज को खत्म कर, पूरा सिस्टम डेटा और ऑटोमेशन पर आधारित कर दिया गया है।

अभी सुधारों की जरूरत क्यों पड़ी?

अब टैक्स के रेट तय हो चुके हैं, इसलिए काउंसिल का पूरा ध्यान इस बात पर है कि रोजमर्रा के काम कैसे आसान हों। व्यापारियों का ज्यादा वास्ता रेट से नहीं, बल्कि रजिस्ट्रेशन, रिटर्न और रिफंड (GST Registration and Refund) से पड़ता है। अब सिस्टम बेचने वाले और खरीदने वाले के बिलों का पक्का मिलान करता है, जिससे फर्जीवाड़ा तुरंत पकड़ में आ जाता है।

मीटिंग में हुए ये 10 बड़े बदलाव

जीएसटी काउंसिल की 57वीं मीटिंग में 10 बड़े सुधार हुए। जिनमें जीएसटी रजिस्ट्रेशन के प्रोसेस को आसान बनाने वाले बड़े सुधार भी शामिल हैं।

1. जीएसटी रजिस्ट्रेशन: आसान होगा प्रोसेस

अब ‘लो-रिस्क’ यानी कम जोखिम वाले व्यापारियों को सिस्टम खुद 3 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन दे रहा है। इसमें किसी अफसर का कोई दखल नहीं होता। 61% रजिस्ट्रेशन इसी तरीके से हो रहे हैं। रजिस्ट्रेशन फॉर्म अब और भी आसान होगा। नाम, पते या डायरेक्टर बदलने जैसे बदलावों के आवेदन अब सिस्टम खुद-ब-खुद (ऑटोमैटिक) मंजूर कर लेगा।

2. रिटर्नः पुरानी गलतियों को सुधारने में छूट

अभी रिटर्न में फर्क होने पर साल में करीब 95,000 नोटिस अपने आप बन जाते हैं, जिनमें से वसूली ना के बराबर (0.08%) है। ये सिर्फ डेटा एंट्री की गलतियां होती हैं। अब अगर कोई बेचने वाला अपने बिल में कोई कमी करता है, तो वह सीधे अपनी सेल्स स्टेटमेंट में बदलाव करेगा और इसका फायदा खरीदार को अपने आप मिल जाएगा। पुरानी गलतियों और गलत भरे गए रजिस्ट्रेशन नंबर को सुधारने की छूट मिलेगी।

3. रिफंडः सिस्टम 3 दिन में देगा रिफंड

रिफंड क्लेम को स्वीकार करने का समय 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दिया गया है। 90% मामलों में अब रिफंड कोई अफसर नहीं, बल्कि सिस्टम खुद 3 दिन में पास कर देगा। ‘कैश लेजर’ में पड़ा आपका फालतू पैसा भी पूरी तरह ऑटोमैटिक तरीके से आपके खाते में आ जाएगा।

4. कानूनी विवाद और नोटिस

10,000 रुपए से कम के मामले में कोई नोटिस नहीं भेजा जाएगा। नोटिस भेजने, सुनवाई करने और आदेश देने का एक तय स्टैंडर्ड होगा।

5. इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े फायदे

ईमानदार खरीदार: अगर किसी खरीदार के पास सही बिल है, उसे माल मिल चुका है और उसने पूरा पेमेंट कर दिया है, तो उसे बचाने के लिए अफसरों की एक कमेटी बनेगी। यह कमेटी 3 महीने में अपनी रिपोर्ट देगी।
आम खर्चों पर क्रेडिट: अब कर्मचारियों के हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, टेलीकॉम टावर, फैक्ट्री के बाहर की पाइपलाइन और एक्सपायर हो चुके फ्री सैंपल (जिन्हें नष्ट करना जरूरी है) पर भी ITC मिलेगा।
डबल टैक्स नहीं: एक ही लाइन में बार-बार खरीदी-बेची जाने वाली सर्विस (जैसे एजेंट के जरिए 7,500 रुपए तक के होटल की बुकिंग, रेस्टोरेंट और ट्रांसपोर्ट) पर अब डबल टैक्स नहीं लगेगा।
सर्विस और मशीनों पर रिफंड: अब इनपुट सर्विस और प्लांट/मशीनरी पर चुकाए गए टैक्स का भी रिफंड मिलेगा। इससे फार्मा और FMCG जैसे सेक्टर्स के व्यापारियों का फंसा हुआ पैसा (वर्किंग कैपिटल) फ्री होगा।

6. व्यापार और जिंदगी हुई आसान (Ease of Doing Business)

कारोबार बंद करना: छोटे टैक्सपेयर्स के लिए बिजनेस बंद करने (कैंसिलेशन) का प्रोसेस ऑटोमैटिक होगा। अब आखिरी रिटर्न भरना भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा होगा।
छोटे व्यापारियों को छूट: 5 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाले व्यापारी, जो सिर्फ सीधे ग्राहकों को माल बेचते हैं, वे अब साल में एक बार रिटर्न भरेंगे और टैक्स तिमाही (Quarterly) जमा करेंगे।
रास्ते में माल की चेकिंग: अब सड़क पर कोई भी अफसर यूं ही गाड़ी नहीं रोक सकेगा। गाड़ी रोकने के लिए जॉइंट कमिश्नर रैंक के अफसर की मंजूरी और पक्की खुफिया जानकारी होनी चाहिए। माल की चेकिंग सिर्फ उसी राज्य में होगी जहां से माल चला है या जहां पहुंचना है। बीच के राज्य (ट्रांजिट स्टेट) रास्ते में गाड़ी नहीं रोक सकेंगे।

7. गिरफ्तारी, मुकदमा और जुर्माना

जीएसटी से गिरफ्तारी का अधिकार पूरी तरह हटा दिया गया है। मुकदमा (प्रॉसिक्यूशन) चलाने की सीमा 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए कर दी गई है। सामान्य जुर्माना 25,000 रुपए से घटाकर 10,000 रुपए कर दिया गया है। यह इसलिए मुमकिन हुआ क्योंकि अब सारा खेल डेटा और सिस्टम का है, डराने-धमकाने की जरूरत नहीं रही।

8. एक्सपोर्टः विदेशी क्लाइंट वालों को फायदा

अगर कोई भारतीय कंपनी विदेश में अपनी ही ब्रांच के जरिए विदेशी क्लाइंट को सर्विस देती है, तो उसे एक्सपोर्ट का फायदा मिलेगा। अगर कोई विदेशी क्लाइंट अपना सामान भारत भेजकर उस पर काम (जैसे टेस्टिंग, रिपेयरिंग, रिसर्च) करवाता है, तो उसे भी सर्विस एक्सपोर्ट माना जाएगा।

9. ई-कॉमर्सः छोटे सेलर्स को मिलेगा फायदा

पहले हर राज्य में माल बेचने के लिए वहां ऑफिस दिखाना पड़ता था। अब छोटे सेलर किसी ई-कॉमर्स कंपनी (जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट) के दूसरे राज्य वाले गोदाम को ही अपना पता (प्रिंसिपल प्लेस ऑफ बिजनेस) दिखा सकेंगे। यानी वे अपने ही राज्य में बैठकर पूरे देश में माल बेच सकेंगे। हर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए टैक्स के नियम एक जैसे होंगे, चाहे उनका बिजनेस मॉडल कुछ भी हो।

10. टैक्स रेट पर क्या हुए बदलाव?

इस बैठक में किसी भी चीज के रेट नहीं बदले गए हैं। रेट बदलने पर विचार अब साल में सिर्फ एक बार एक अलग बैठक में किया जाएगा। फिलहाल पूरा फोकस नियमों की कमियों को दूर करके जीएसटी के प्रोसेस को आसान बनाने पर है।

जीएसटी सुधारों पर क्या बोला CMAI?

क्लॉथिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CMAI) के अध्यक्ष संतोष कटारिया ने जीएसटी काउंसिल के नए फैसलों का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि टैक्स अधिकारियों से गिरफ्तारी का अधिकार छीनना और मुकदमों पर लगाम लगाना एक बेहतरीन कदम है। हालांकि, उन्होंने 2,500 रुपए से महंगे कपड़ों पर 18% जीएसटी जारी रखने पर निराशा भी जताई। कटारिया ने कहा,

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button