
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य सरकारी सेवाओं में ऐसी पारदर्शी और निष्पक्ष चयन व्यवस्था को मजबूत करना है, जिसमें योग्यता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले और योग्य अभ्यर्थियों को अपनी प्रतिभा के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में समूह ‘ख’ के अधिकारियों की भर्ती के लिए अपनाई गई नई चयन प्रक्रिया इसी सोच का परिणाम है। लंबे अंतराल के बाद बोर्ड में 40 अधिकारियों की नियमित भर्ती पूरी होने से विभाग की कार्यक्षमता बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को नई गति मिलेगी।
मंगलवार को वन मंत्री डा. अरुण कुमार सक्सेना की अध्यक्षता में बोर्ड में नवचयनित 40 अधिकारियों ने मुख्यमंत्री से उनके आवास पर मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि बोर्ड की जिम्मेदारी सीधे पर्यावरण और लोगों के स्वस्थ जीवन से जुड़ी है।

अधिकारी अपनी तकनीकी दक्षता का इस्तेमाल पूरी जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ करें। उन्होंने नवचयनित अधिकारियों को प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने तथा विभागीय कार्यप्रणाली के साथ मैदानी स्तर की चुनौतियों को समझने के निर्देश दिए।
बोर्ड में समूह ‘ख’ के 26 सहायक पर्यावरण अभियंता और 14 सहायक वैज्ञानिक अधिकारी समेत कुल 40 अधिकारियों का चयन किया गया है। इनमें 21 अधिकारी विभिन्न आइआइटी से शिक्षित हैं, जबकि अन्य ने देश और प्रदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है।
चयनित अधिकारियों में आठ महिलाएं भी शामिल हैं। यह भर्ती चयन प्रक्रिया में किए गए बदलाव के बाद हुई है। पहले बोर्ड में समूह ‘ख’ के अधिकारियों की भर्ती मुख्य रूप से साक्षात्कार के आधार पर होती थी।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर 1995 की पुरानी विनियमावली में संशोधन कर चयन प्रक्रिया को लिखित परीक्षा और साक्षात्कार आधारित द्विस्तरीय व्यवस्था में बदला गया।
नई व्यवस्था में लिखित परीक्षा को 85 प्रतिशत और साक्षात्कार को 15 प्रतिशत अंक का वेटेज दिया गया, जिससे शैक्षणिक और तकनीकी योग्यता को चयन का प्रमुख आधार बनाया गया।
इन अधिकारियों को सीधे क्षेत्र में तैनाती देने के बजाय पहले एक माह का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके तहत एक सप्ताह का कार्यक्रम आइआइएम, लखनऊ में आयोजित हो रहा है।




