उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में छात्रों की समस्याओं का तुरंत होगा निवारण, तीन स्तरीय व्यवस्था लागू

 किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) मे मतांतरण, छात्राओं के शोषण, उत्पीड़न और भेदभाव से जुड़े नेटवर्क का मामला सामने आने के बाद प्रदेश के राजकीय और स्वशासी मेडिकल कॉलेजों मे तीन-स्तरीय शिकायत व्यवस्था लागू की गई है।

इसके तहत प्रत्येक मेडिकल कॉलेज मे छात्र कल्याण अधिकारी नामित होगा और शैक्षणिक परिसर मे शिकायत पेटिका स्थापित की जाएगी। इसकी निगरानी प्राचार्य या निदेशक करेंगे।

चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग की महानिदेशक नेहा शर्मा ने मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों और संस्थानों के निदेशकों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। छात्र कल्याण अधिकारी विद्यार्थियों की शिकायतों, उत्पीड़न और भेदभाव से जुड़े मामलों के समाधान के लिए प्राथमिक अधिकारी होगा।

विद्यार्थी पढ़ाई, छात्रावास, सुरक्षा, उत्पीड़न और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें पेटिका मे डाल सकेंगे। अधिकारी प्रतिदिन पेटिका खोलकर शिकायतों को रजिस्टर मे दर्ज करेगा और उनके निस्तारण की कार्रवाई शुरू करेगा। एक सप्ताह के भीतर समस्या का समाधान कराना होगा।

समाधान न होने पर विद्यार्थी प्राचार्य और इसके बाद चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय के छात्र प्रकोष्ठ मे शिकायत दर्ज करा सकेंगे। विभाग शिकायतों का रिकार्ड रखेगा और उनके निस्तारण की निगरानी के साथ विद्यार्थियों से प्रतिक्रिया भी लेगा। हाल में सामने आयी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की जांच रिपोर्ट मे केजीएमयू में उत्पीड़न और मतांतरण से जुड़े नेटवर्क का खुलासा किया गया।

कई प्रोफेसरों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। नेहा शर्मा ने बताया कि नई व्यवस्था का उद्देश्य शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई कर मेडिकल कॉलेजों मे सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है। विद्यार्थियों को शिकायत दर्ज कराने के लिए खुला मंच दिया जा रहा है, ताकि वे बेझिझक अपनी बात रख सकें। जरूरत पड़ने पर शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाएगा।

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