
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने मंगलवार को सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है।
इनमें अमेरिकी नागरिक और भाड़े के सैनिक मैथ्यू एरन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। इन सभी पर म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों से संबंध रखने और भारत-विरोधी ताकतों को सैन्य व ड्रोन ट्रेनिंग देने की साजिश का आरोप है।
इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट में दर्ज हुआ मामला
इस मामले में शुरुआत में आतंकवाद-रोधी कानून गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जांच शुरू की गई थी, लेकिन स्पेशल जंज प्रशांत शर्मा के समक्ष दाखिल अंतिम चार्जशीट में NIA ने UAPA का इस्तेमाल नहीं किया।
इसके बजाय, आरोपियों पर इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट की धारा 21 और 23 के तहत भारत में अवैध प्रवेश, प्रतिबंधित क्षेत्रों में आवाजाही और वीजा नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।

भारत से म्यांमार पहुंचे, ड्रोन की खेप पहुंचाई
NIA के अनुसार, यह समूह मार्च में भारत आया और वैध वीजा का इस्तेमाल कर संरक्षित क्षेत्र मिजोरम पहुंचा। वहां से ये अवैध रूप से सीमा पार कर म्यांमार में दाखिल हुए। म्यांमार में 2021 के तख्तापलट के बाद से सैन्य सरकार के खिलाफ लड़ रहे विद्रोही समूहों से इन्होंने संपर्क साधा।
आरोप है कि इन्होंने यूरोप से भारत के रास्ते म्यांमार तक ड्रोन की एक बड़ी खेप पहुंचाई और विद्रोही संगठनों को ट्रेनिंग दी, जिनके तार भारत के पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी गुटों से भी जुड़े हैं।

ड्रोन हमले में शामिल होने का आरोप
एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि यह समूह म्यांमार में एक नागरिक विमान पर हुए ड्रोन हमले में भी शामिल था। इस साल की शुरुआत में मांडले जाने वाले एक यात्री विमान पर सुसाइड ड्रोन से हमला किया गया था।
NIA ने अब म्यांमार में मौजूद इस नेटवर्क के मुख्य आतंकी मास्टरमाइंड से इनके संबंधों की गहराई से जांच कर रही है।
कौन है मुख्य आरोपी मैथ्यू एरन वैन डाइक?
इस मामले में सबसे बड़ा नाम मैथ्यू एरन वैन डाइक का है, जिसे अमेरिका के डीप स्टेट का हिस्सा माना जाता है। वह सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल (SOLI) का संस्थापक है, जो एक नॉन-प्रॉफिट सिक्योरिटी फर्म है और तानाशाही सरकारों के खिलाफ लड़ने वाले समूहों को ट्रेनिंग देती है।
वैन डाइक इससे पहले लीबिया और सीरिया जैसे गंभीर संघर्ष क्षेत्रों में भी सक्रिय रह चुका है।
मार्च में हुई थी गिरफ्तारी
मार्च में वैन डाइक को कोलकाता एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया था, जबकि यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ एयरपोर्ट से पकड़ा गया था। गिरफ्तारी के करीब सात महीने बाद यह चार्जशीट दाखिल की गई है।
दिल्ली कोर्ट ने इस पूरे मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 अक्टूबर की तारीख तय की है।




