
अमेरिका और ईरान के बीच आखिरकार वह डील साइन हो गई है, जिसका इंतजार पिछले कई हफ्तों से पूरी दुनिया कर रही थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने बुधवार को आपसी समझौते (MoU) पर डिजिटली साइन कर दिए हैं। इसके साथ ही 108 दिन से चल रही जंग पर ब्रेक लग गया है। होर्मूज स्ट्रेज को फिर से खोलने और आगे की बातचीत शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।
डील के लिए अमेरिका ने ईरान की कई अहम शर्तों को मंजूरी दी है। डील के तहत अमेरिका ईरान का फ्रीज फंड रिलीज करेगा। इसके साथ ही ईरान के इकोनॉमिक रीडेवलपमेंट के लिए 2800 करोड़ रुपए का पैकेज भी देगा। डील से पहले ट्रम्प ने कहा- यह समझौता आसान नहीं था।
ट्रम्प बोले- यह आसान नहीं था
डील साइन होने से ठीक पहले ट्रम्प ने कहा कि यह समझौता आसान नहीं था। इसे अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की बातचीत करनी पड़ी। ट्रम्प लगातार दावा करते रहे कि ईरान के टॉप लीडरशिप की मंजूरी के बाद ही यह इस समझौते की बात आगे बढ़ी है। डील के बाद उन्होंने कहा- यह मिडिल ईस्ट में शांति कायम करने के लिहाज से बड़ा कदम होगा।
पीस डील तत्काल प्रभाव से लागू
बता दें कि रविवार 14 जून को जेडी वेंस और गालिबाफ ने समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक साइन किए थे। इसके बाद बुधवार 17 जून की देर रात ट्रम्प ने मैक्रों के साथ डिनर के दौरान फ्रांस के पैलेस ऑफ वर्साय से और पेजेशकियान ने तेहरान से डिजिटल हस्ताक्षर किए। दोनों नेताओं के साइन पूरा होते ही ट्रम्प ने जोर से कहा- It’s signed! (इस पर साइन हो गए हैं)। इसी के साथ ही अमेरिका-ईरान पीस डील तत्काल प्रभाव से लागू हो गई।
अभी सिर्फ शुरुआत, फाइनल डील बाकी
अमेरिकी अफसरों का कहना है मौजूदा MoU एक पॉलिटिकल फ्रेमवर्क है, अंतिम समझौता नहीं। कई टेक्निकल और सेसेंटिव मुद्दों पर अभी विस्तार से बातचीत होनी है। इसलिए आने वाले दो महीने तय करेंगे कि इस समझौते से मिडिल ईस्ट में शांति कायम होगी या यह सिर्फ एक टेम्पररी सीजफायर होगा।

इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड सस्ता
डील का सबसे अहम हिस्सा होर्मूज स्ट्रैट से जुड़ा है। रॉयटर्स अमेरिका ने ईरानी पोर्ट्स पर लगी नाकाबंदी हटाने पर सहमति दी है, जबकि ईरान ने कॉमर्शियल शिप्स की सुरक्षित आवाजाही तय करने का भरोसा दिया है। समझौते की खबर आते ही इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड 1% सस्ती हुआ, क्योंकि बाजार को उम्मीद है कि ईरानी क्रूड की वजह से फिर से ग्लोबल मार्केट में तेजी लौटेगी।
न्यूक्लियर प्रोग्राम पर असली लड़ाई अभी बाकी
दी गार्डियन (The Guardian) की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि, जंग रोकने और होर्मूज खोलने पर सहमति बन गई है, लेकिन ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम का मुद्दा अभी पूरी तरह हल नहीं हुआ है। डील के तहत ईरान ने दोहराया है कि वह न्यूक्लियर प्रोग्राम डेवलप नहीं करेगा और एनरिच्ड यूरेनियम के मुद्दे पर आगे बातचीत करेगा। यही वजह है कि अगले 60 दिनों की बातचीत को सबसे अहम माना जा रहा है।
दुनिया की नजर अगले 60 दिनों पर
इस डील के बाद फिलहाल जंग थमती नजर आ रही है और ग्लोबल मार्केट ने भी राहत की सांस ली है। लेकिन न्यूक्लियर प्रोग्राम, पाबंदियों को वापस लेने, लेबनान की स्थिति और रीजनल सिक्योरिटी जैसे मुद्दे अभी पूरी तरह सुलझे नहीं हैं। यही वजह है कि ट्रम्प और पेजेशकियन की इस ऐतिहासिक डील के बाद अब दुनिया की नजर अगले 60 दिनों की बातचीत पर टिक गई है।
अब आखिरी में इस डील से जुड़े 12 अहम सवाल और उनके जवाब….
Q. क्या होर्मूज पूरी तरह खुल गया है
A. अमेरिका चाहता है कि रास्ता पूरी तरह और बिना किसी फीस के खुले। लेकिन ईरान कह रहा है कि ओमान के साथ मिलकर वह स्ट्रैट मैनेज करेगा और आने वाले समय में में कुछ सर्विस फीस भी ले सकता है। यहीं से नया विवाद शुरू हो रहा है।
Q. ईरान को क्या आर्थिक फायदा मिलेगा
A. डील के तहत पाबंदियां कम करने, फ्रीज फंड रिलीज करने और 300 अरब डॉलर तक के रिकंस्ट्रक्शन पैकेज पर बातचीत हो रही है। ईरान का दावा है कि उसे अरबों डॉलर की राहत मिलेगी, लेकिन अमेरिका ने अभी सभी दावों की पुष्टि नहीं की है।
Q. न्यूक्लियर प्रोग्राम पर क्या सहमति बनी
A. ईरान ने कहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। IAEA की निगरानी में उसके एनरिच्ड यूरेनियम स्टॉक और न्यूक्लियर एक्टिविटी पर नई व्यवस्था तैयार होगी। हालांकि यूरेनियम को खत्म करना है या सिर्फ कमजोर करना है, इस पर दोनों पक्षों की राय अलग-अलग है।

Q. क्या ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम बंद होगा
A. अमेरिका चाहता है कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह खत्म हो। लेकिन ईरान कह रहा है कि वह अपना प्रोग्राम बंद नहीं करेगा, सिर्फ तय नियमों के तहत आगे बढ़ेगा। यही फाइनल बातचीत का सबसे बड़ा मुद्दा माना जा रहा है।
Q. इजराइल इस डील से खुश क्यों नहीं है
A. इजराइल सीधे बातचीत का हिस्सा नहीं था। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने दिए जाएंगे, चाहे डील हो या नहीं। इजराइल लेबनान और सीरिया में अपना मिलिट्री एक्शन जारी रखने की बात भी कह चुका है।
Q. लेबनान को लेकर विवाद क्या है
A. ईरान का कहना है कि डील में लेबनान में भी सीजफायर शामिल है। हालांकि, इजराइल इस बात को नहीं मानता। नेतन्याहू साफ कह चुके हैं कि उनकी डिफेंस फोर्स साउथ लेबनान से पीछे नहीं हटेगी।
Q. भारत को क्या फायदा होगा
A. भारत अपने तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गल्फ से खरीदता है। जंग के दौरान तेल महंगा हुआ, रुपया प्रेशर में आया और एक्सपोर्ट पर असर हुआ। अब तेल सस्ता होने और सप्लाई नॉर्मल होने से भारत की इकोनॉमी को राहत मिलने की उम्मीद है।
Q. क्या भारत का इम्पोर्ट बिल कम होगा
A. हां। तेल की कीमतों में गिरावट से भारत का इम्पोर्ट बिल घट सकता है। इससे महंगाई पर प्रेशर कम होगा और सरकारी ऑयल कंपनियों को भी राहत मिलेगी।
Q. क्या भारत का खाड़ी देशों के साथ ट्रेड बढ़ेगा
A. होर्मूज खुलने के बाद शिपिंग आसान होगी। इंजीनियरिंग गुड्स, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, केमिकल, फार्मा, टेक्सटाइल और मशीनरी जैसे सेक्टरों को फायदा मिल सकता है।
Q. क्या शिपिंग खर्च तुरंत कम हो जाएंगे
A. नहीं। जहाजों की आवाजाही शुरू हो गई है, लेकिन वॉर रिस्क इंश्योरेंस, फ्रेट रेट और शिपिंग शेड्यूल नॉर्मल होने में अभी कुछ हफ्ते और लग सकते हैं।
Q. ग्लोबल मार्केट ने इस डील पर कैसे रिएक्ट किया
A. डील की खबर आते ही ऑयल प्राइस करीब 5% तक गिर गए। वॉल स्ट्रीट और दूसरे शेयर बाजारों में भी तेजी देखने को मिली, क्योंकि इनवेस्टर्स को लगा कि मिडिल ईस्ट में बड़ा संकट फिलहाल टल गया है।
Q. क्या यह फाइनल पीस डील है
A. नहीं। अभी सिर्फ MoU और सीजफायर फ्रेमवर्क लागू हुआ है। अगले 60 दिन में फाइनल डील पर बातचीत होगी। अगर किसी पक्ष ने शर्तें नहीं मानीं, तो पूरा समझौता फिर संकट में पड़ सकता है।




