
पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक अस्थिरता और चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। इसे महसूस करते हुए सरकार अब 2047 के विकसित भारत के लिए अपने रोड मैप को नया आयाम देने की तैयारी में है। इसी क्रम में बुधवार और गुरुवार को मंत्रिपरिषद की दो दिवसीय चिंतन बैठक होगी।
माना जा रहा है कि इसमें आठ से दस प्रजेंटेशन होंगे और सभी मंत्रालयों को निर्देश दिए जाएंगे उसके क्रियान्वयन में तेजी लाएं। विकास की दिशा ऐसी रखी जाएगी जो स्थायी और तात्कालिक तौर पर उसका लाभ भी दिखे।
वर्तमान में सरकार के सामने दो तरह की चुनौतियां हैं। पहली चुनौती वैश्विक है जिसके कारण सप्लाई चेन, मैन्यूफैक्चरिंग, आयात निर्यात और आत्मनिर्भरता के सवाल हैं। तो घरेलू स्तर पर रोजगार जैसा सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक मुद्दा है।
सूत्रों के अनुसार इस चिंतन शिविर में इन सभी विषयों के मद्देनजर चर्चा होगी। पुरानी योजनाओं के असर की समीक्षा भी होगी और भविष्य का रोड मैप भी तैयार होगा।

वर्ष 2021 में सरकार ने विभिन्न सेक्टर के लिए सचिवों के दस समूह बनाए थे जो स्केटहोल्डर से पूरी चर्चा कर प्लान तैयार करेगा। उन समूहों के प्रजेंटेशन पर चर्चा होगी और प्रधानमंत्री मंत्रिसमूह को संबोधित करेंगे।
माना जा रहा है कि सरकार ईज आफ लिविंग के साथ साथ उद्योग व्यापार में कानूनी अड़चनों को दूर करने, सुधार, रोजगार सृजन और सामाजिक सुरक्षा के विषय पर ही ज्यादा केंद्रित रहेगी।
मैन्यूफैक्चरिंग के साथ साथ सप्लाई चेन में आत्मनिर्भरता के लिए कुछ सुधार किए जाएंगे। ऐसे उद्योंगों को प्राथमिकता दी जाएगी जो रोजगार सृजन में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। स्किल भी सरकार की प्राथमिकता में है और इसकी समीक्षा होगी।
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से फिर से सभी मंत्रियों के साथ साथ सचिवों को भी संवाद बढ़ाने को कहा जा सकता है। बताया जाता है कि इस तरह के चिंतन शिविर आगे भी होते रहेंगे ताकि समय के साथ उसमें बदलाव कर गति तेज की जा सके।




