जानलेवा बने चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध का कानून लेकर आएगी सरकार, इससे घायल लोगों को मिलेगा मुआवजा भी

मांझा के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर अंकुश लगाने के लिए एक कड़ा कानून बनाने पर विचार कर रही है।राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि प्रस्तावित कानून के तहत पीड़ितों के लिए मुआवजे पर भी विचार किया जा रहा है, जिसका नाम संभवतः यूपी घातक मांझा (निर्माण, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध) अधिनियम रखा जाएगा। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को सूचित किया गया कि चीनी मांजा अब ऑनलाइन उपलब्ध है और इस संबंध में अखबारों में भी खबर छपी है। इसपर कोर्ट ने निर्देश दिया कि पक्षकारों के अधिवक्ता इस पहलू पर भी गौर करें। कोर्ट ने आदेश दिया था कि प्रस्तावित अधिनियम पर विचार-विमर्श में तेजी लाई जानी चाहिए और अगली सुनवाई की तारीख से पहले यथाशीघ्र, अधिनियम के रूप में कुछ ठोस रूप सामने आना चाहिए।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ को यह भी सूचित किया गया कि पुलिस अधिनियम में संशोधन पर विचार किया जा रहा है और अवैध व्यापार के खिलाफ हाल ही में एक प्रवर्तन अभियान चलाया गया था।

हाईकोर्ट को यह जानकारी स्थानीय वकील मोतीलाल यादव द्वारा दायर 2018 की एक जनहित याचिका और इसके साथ जुड़ी अन्य याचिका की सुनवाई के दौरान दी गईं। याची वकील स्वयं उपस्थित हुए और उन्होंने उत्तर प्रदेश में चीनी मांझा के आयात, बिक्री और उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाने के निर्देश देने का अनुरोध किया।

कोर्ट कई बार कह चुकी है एक्शन लेने की बात 
अदालत के पहले दिए आदेश के तहत, डीजीपी राजीव कृष्ण, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद, राज्य कर विभाग की प्रमुख सचिव कामिनी रतन, पर्यावरण विभाग की प्रमुख सचिव वी. हेकली झिमोनिया और अवसंरचना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार 13 जुलाई को सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। अदालत ने इन अफसरों को आगे सुनवाई पर पेशी से छूट प्रदान कर दी है।

पिछली सुनवाई में, पतंगों और पारंपरिक पतंग उड़ाने की सामग्री का व्यापार करने वाले निर्माताओं और व्यापारियों की ओर से हस्तक्षेपकर्ता अधिवक्ता एसएमएच रिजवी उपस्थित हुए थे। उन्होंने तर्क दिया था कि चीनी मांझे के खिलाफ कार्रवाई की आड़ में, अधिकारी पारंपरिक और हानिरहित पतंग उड़ाने की सामग्री को भी जब्त कर रहे हैं और व्यापारियों को परेशान कर रहे हैं।

पीठ ने राज्य के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि जो व्यवसायी अवैध और निषिद्ध गतिविधियों में लिप्त नहीं हैं, उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को तय की है।

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