
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 29 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कमांड अस्पताल (मध्य कमान) में ‘सैन्य चिकित्सा विभाग’ का वर्चुअल उद्घाटन किया। यह देश का पहला समर्पित शैक्षणिक एवं परिचालन विभाग है जो विशेष रूप से सैन्य चिकित्सा पर केंद्रित है।
इसका उद्देश्य युद्धकालीन चिकित्सा तैयारियों को मजबूत करना, अनुसंधान को बढ़ावा देना, स्वदेशी सिद्धांत विकसित करना और भविष्य के युद्धक्षेत्रों व मानवीय आपदाओं के लिए विशेषज्ञता तैयार करना है। यह विभाग सेना चिकित्सा सेवा महानिदेशालय के तत्वावधान में स्थापित किया गया है और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं की परिचालन चिकित्सा तैयारियों में एक महत्वपूर्ण कदम है।
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए आर्थिक और सामाजिक विकास जरूरी है, लेकिन किसी भी देश की संप्रभुता और प्रगति की बुनियाद उसकी सेना की शक्ति और मनोबल में है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह विभाग सैनिकों को उन्नत चिकित्सा सहायता देकर राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा और उन्हें यह भरोसा दिलाएगा कि जरूरत के समय उन्हें उचित देखभाल मिलेगी।

इस विभाग में सैन्य आघात और क्षति नियंत्रण, युद्ध मनोचिकित्सा व लचीलापन, पर्यावरणीय एवं परिचालन चिकित्सा, सैन्य चिकित्सा रसद, सीबीआरएनई चिकित्सा प्रतिक्रिया, आपातकालीन एवं गंभीर चिकित्सा, आपदा चिकित्सा, एचएडीआर के साथ-साथ अनुसंधान, ऑडिट और डेटा एनालिटिक्स पर काम होगा। यह तकनीक-आधारित युद्धक्षेत्र चिकित्सा, सिमुलेशन प्रशिक्षण, टेलीमेडिसिन और मेडिकल डिसीजन सपोर्ट में नवाचार को भी बढ़ावा देगा।
विभाग को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। पहले चरण में शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू होंगे, इसके बाद एचएडीआर और सीबीआरएनई चिकित्सा में उत्कृष्टता केंद्र बनेंगे और अंततः यह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सैन्य चिकित्सा केंद्र बनेगा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि जिस तरह एयरोस्पेस मेडिसिन पायलटों की चुनौतियों का अध्ययन करता है, उसी तरह सैन्य चिकित्सा युद्ध की शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का अध्ययन करेगी। यह विभाग हमारे सैनिकों की तैनाती वाले कठिन क्षेत्रों और मौसमों के लिए विशेष चिकित्सा प्रोटोकॉल विकसित करेगा।
रक्षा मंत्री ने ‘निवारक स्वास्थ्य सेवा’ को पहली रक्षा पंक्ति बताया। उन्होंने रोग निगरानी, टीकाकरण, स्वच्छता, पोषण और फिटनेस पर जोर देते हुए कहा कि एआई, वियरेबल डिवाइस और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स से सैनिकों के स्वास्थ्य की रीयल-टाइम निगरानी की जा सकेगी।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह विभाग युवाओं को सैन्य चिकित्सा में सुपर-स्पेशलाइजेशन का नया करियर मार्ग देगा और भारत को चिकित्सा अनुसंधान में वैश्विक पहचान दिलाएगा।
इस अवसर पर सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, मध्य कमान के जीओसी एन सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, डीजी एएफएमएस सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।




