
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआइ) से दो हजार रुपये अधिक के भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लगाने को लेकर बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने शुक्रवार को एक्स पर लिखा, पहले खूब बढ़ावा देने के बाद अब सरकार की यूपीआइ लेनदेन पर शुल्क वसूलने की व्यवस्था लोगों की नजर में प्रथमदृष्टया मुनाफाखोरी के पूंजीवादी रवैये के तहत टैक्स वसूली है।
सरकार, जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की इस व्यवस्था को ‘कर’ मानने को तैयार नहीं है। इसे चाहे जो भी नाम दिया जाए, जेब तो अंततः आमजन की ही कटेगी, उसका ही खर्च बढ़ेगा।
मायावती ने आगे लिखा कि बहुसंख्यक जनता गरीबी व जबरदस्त महंगाई की मार से त्रस्त है।

कौन करेगा जनता की चिंता?
उनके बच्चे अशिक्षा, बेरोजगारी व अव्यवस्था आदि से पीड़ित हैं, ऐसे में सरकार की नीति व कार्ययोजना लाभ कमाने वाली व्यावसायिक के बजाय कल्याणकारी होनी चाहिए। जनता की तकलीफ की चिंता सरकार नहीं करेगी तो फिर कौन करेगा?
उन्होंने 14,500 स्कूलाें को 300 करोड़ रुपये से स्मार्ट बनाने की प्रदेश सरकार की घोषणा पर भी सवाल उठाए, लिखा कि दो लाख रुपये से क्या यह संभव होगा? बच्चों को कथित ’स्मार्ट पढ़ाई’ से पहले स्कूल भवन, बेंच-कुर्सी, किताब, शौचालय, मैदान, साफ-सफाई आदि की सही व्यवस्था की जाए।
एक अन्य पोस्ट में विशेष घटक योजना से बने मेडिकल कालेजों में आरक्षण से जुड़े हाईकोर्ट के फैसले को पर कहा कि न्यायालय में सरकार यदि इस बात की पुरजोर पैरवी करती कि योजना के पैसे से सहारनपुर, अंबेडकरनगर, कन्नौज व जालौन में बने मेडिकल कालेजों में अनुसूचित वर्ग के लिए अतिरिक्त आरक्षण की व्यवस्था, सामान्य आरक्षण से अलग है तो शायद कोर्ट इस पर सकारात्मक विचार करता और रोक नहीं लगाता। उन्होंने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में अपेक्षित राहत के लिए अपील करने की मांग की है।




