हिमालय में भोटेकोशी बाढ़ की असली वजह का खुलासा, नेपाल में तीन दिन बाद क्या होगा?

बुधवार को नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भयानक बाढ़ ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली और हजारों को बेघर कर दिया। इसके बाद रसुवा और नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, तनहुं, गोरखा और नवलपरासी ईस्ट जैसे जिलों से शव बरामद किए गए हैं।

‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, वैज्ञानिक और जलवायु विशेषज्ञ इस बात की जांच कर रहे हैं कि पानी का यह अचानक बहाव किस वजह से हुआ? नेपाल-चीन सीमा और उसके निचले इलाकों में आई इस आपदा के बारे में अब तक जो जानकारी मिली है वह इस प्रकार ।

Trumps Israeli parliament - 2026-08-27T164655.871

नेपाल-चीन सीमा पर क्या हुआ?

बुधवार सुबह रसुवागढ़ी बॉर्डर क्रॉसिंग पर भोटेकोशी नदी का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ा, जिससे लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। शुरू में यह अनुमान लगाया गया कि शायद ग्लेशियर झील के फटने या हिमस्खलन (avalanche) के कारण ऐसा हुआ होगा। लेकिन दिन भर इस अचानक आए बहाव का कोई पक्का कारण पता नहीं चल सका।

बाढ़ रसुवागढ़ी के पास शुरू हुई और रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग में नदी के निचले इलाकों में बसी बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। जब तक यह रिपोर्ट तैयार की गई, सरकार ने 289 लोगों की मौत की पुष्टि कर दी थी, जबकि सैकड़ों लोग लापता थे।

रसुवा और धाडिंग के बीच बने पुल और अन्य बह गए। नुवाकोट के असिस्टेंट चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर कृष्ण प्रसाद हुमागाईं ने कांतिपुर को बताया कि इस इलाके में लोगों की याददाश्त में यह अब तक की सबसे भयानक बाढ़ थी।

WhatsApp Image 2026-08-26 at 11.29.37 PM

क्या एवलांच या भूकंप की वजह से आई बाढ़?

सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि बर्फ और चट्टानों के बड़े पैमाने पर गिरने से एक नदी का रास्ता रुक गया था, जिससे एक अस्थायी प्राकृतिक बांध बन गया; बाद में यह बांध टूट गया और बाढ़ आ गई।

US जियोलॉजिकल सर्वे ने बुधवार सुबह 8:37 बजे तिब्बत में गोसाईंकुंडा से लगभग 47 किलोमीटर उत्तर में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया। वैज्ञानिक अभी यह पक्का नहीं कर पाए हैं कि भूकंप की वजह से भूस्खलन हुआ या उसमें भूकंप की कोई भूमिका थी।

20260827234L

क्या खतरे की कोई चेतावनी दी गई थी?

यह इलाका पहले से ही अचानक आने वाली बाढ़ के लिए संवेदनशील माना जाता है। पिछले साल भी 8 जुलाई को भोटेकोशी नदी में पानी का बहाव अचानक बढ़ गया था। नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने निष्कर्ष निकाला कि पिछली बाढ़ नेपाल-चीन सीमा के पास लेंडे नदी में ग्लेशियर झील के फटने के कारण आई थी।

सेंटिनल इमेजरी का उपयोग करके किए गए सैटेलाइट विश्लेषण से पता चला कि एक ग्लेशियर झील फटी थी, जिससे पानी नीचे की ओर बहने लगा था। वैज्ञानिकों ने यह भी चेतावनी दी थी कि हिमालय के क्षेत्र में कई संभावित खतरनाक ग्लेशियर झीलें मौजूद हैं।लेकिन बुधवार की आपदा वाली जगह पर बर्फ और चट्टान का हिमस्खलन (avalanche) होने की कोई विशिष्ट भविष्यवाणी नहीं की गई थी।

इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के एक अध्ययन में नेपाल, भारत और तिब्बत में 3,624 ग्लेशियर झीलों की पहचान की गई। इनमें से 47 को संभावित रूप से खतरनाक और फटने के जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया, जिनमें से 21 नेपाल में थीं।

20260827232L

वैज्ञानिकों का क्या कहना है?

वैज्ञानिकों का कहना है कि नेपाल-चीन सीमा के पास रासुवागढ़ी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में बर्फ और चट्टान का बड़ा हिमस्खलन हुआ। प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट इमेजरी और नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण के अनुसार यही मुख्य कारण है। मलबा लेंडे नदी (भोटेकोशी की सहायक) में गिरा, जिससे मलबे से भरी असामान्य रूप से तेज बाढ़ आई।

ICIMOD के वैज्ञानिक जांच कर रहे हैं कि क्या संकरे हिस्से में मलबा जमा होकर अस्थायी लैंडस्लाइड डैम बना। गल्छी में त्रिशूली का जलस्तर 30 मिनट में नौ मीटर और मालेखु में सात मीटर बढ़ गया।

रिमोट सेंसिंग विशेषज्ञ सार्थक श्रेष्ठ के मुताबिक, सबूत नेपाल की ओर (स्याफ्रुबेसी के ऊपर) हुए हिमस्खलन को दर्शाते हैं, जिसने नदी रोक दी। चीनी मॉनिटरिंग सिस्टम में तिब्बत पक्ष पर कोई ऐसी घटना नहीं मिली। चीनी संस्थानों के साथ सहयोग जारी है; पूरी तस्वीर समझने में एक-दो हफ्ते लग सकते हैं।

WhatsApp Image 2026-08-26 at 9.43.06 PM

क्या एक और बाढ़ आ सकती है?

वैज्ञानिकों ने आगे खतरे की संभावना से इनकार नहीं किया। गृह मंत्री सूडान गुरुंग ने कहा कि ल्हेंडे नदी अभी पूरी साफ नहीं हुई। कायास्था के अनुसार शुरुआती चिंता थी कि ऊपरी हिस्से में बड़ा पानी जमा हो सकता है, पर झील की पुष्टि के पर्याप्त सबूत नहीं। ICIMOD ने बादलों के कारण सैटेलाइट निगरानी में दिक्कत बताई। कायास्था ने कहा, ‘खतरा बना हुआ है।

बढ़ते तापमान से हिमालय में ग्लेशियर पिघलने, बर्फ-चट्टान टूटने और हिमस्खलन की संभावना बढ़ती है, पर अगली घटना कहाँ होगी, कहना मुश्किल।’ वैज्ञानिक ग्लेशियर झीलों और जोखिम वाले इलाकों पर नजर रखे हुए हैं।चीन ने निचले हिस्से में संभावित खतरनाक घटना की जानकारी दी। जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार नेपाल में चोटचेन और पुरुपे त्सांगपो नदियों के संगम के पास बड़ी झील बनी।

गुरुवार सुबह तक करीब 20 लाख घनमीटर पानी जमा हो चुका था और बहना शुरू हो गया। अगले तीन दिनों में 30 लाख घनमीटर और आ सकता है, जिससे प्राकृतिक बांध टूटने का खतरा है। चीनी अधिकारी निगरानी, बाढ़ सिमुलेशन और आपातकालीन तैयारी कर रहे हैं। ये नदियाँ तिब्बत से निकलकर नेपाल में भोटेकोशी के रूप में त्रिशूली की सहायक नदी बनती हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button