चित्रकूट: जगद्गुरु के पद को लेकर संतों में दो फाड़


चित्रकूट। संजय साहू: चित्रकूट में जगद्गुरु के पद को लेकर संतो में विवाद की स्थिति पैदा हो गई है। चित्रकूट के निर्मोही अनी अखाड़े के गोलोक वासी श्री महंत स्वर्गीय रामाश्रय दास जी की तेरहवीं पुण्यतिथि के अवसर पर आज भंडारे का आयोजन किया गया था और इस कार्यक्रम में तीनों अखाड़ों के महंतों के साथ-साथ अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरी महाराज भी आमंत्रित थे। संतों की बैठक के दौरान निर्मोही अनी अखाड़ा के महंत स्वामी राजेंद्र दास जी महाराज ने चित्रकूट कामदगिरि पीठ के स्वामी रामस्वरूपाचार्य जी को फर्जी जगद्गुरु करार देते हुए कहा कि चित्रकूट में अगर कोई जगतगुरु है तो वह स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज ही हैं।

तीनों अखाड़े के महंत और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष खुद को जगतगुरु कहने वाले रामस्वरूपाचार्य को फर्जी करार देता है। इस आयोजन में शामिल होने आए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र देव जी महाराज का कहना था कि क्योंकि कामदगिरि पीठ के स्वामी रामस्वरूपाचार्य जी महाराज ने जगतगुरु पद की गरिमा का पालन नहीं किया है इसलिए वह जगतगुरु के पद के काबिल नहीं है। हम लोग सर्वसम्मति से रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज को ही चित्रकूट का एकमात्र जगतगुरु घोषित करते हैं।

इस पूरे मामले में जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी का कहना था कि कामदगिरि भगवान है क्या भगवान की भी कोई पीठ हो सकती है अगर भगवान की पीठ नहीं हो सकती तो फिर कोई खुद को कामदगिरि पीठ का जगतगुरु घोषित कर सकता है। जगतगुरु की पदवी को लेकर हुए विवाद में अखाड़ा परिषद द्वारा जगद्गुरु पद के अयोग्य करार दिए गए स्वामी रामस्वरूपाचार्य जी से जब इस मामले में उनका पक्ष जानने के लिए पत्रकार उनके आवास पर पहुंचे तो वह तीनों अखाड़ों के महंतों और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरी जी महाराज पर आगबबूला होते हुए स्वामी रामभद्राचार्य जी के लिए भी काफी अपशब्दों का प्रयोग किया।

स्वामी रामस्वरूपाचार्य ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य को नेत्रहीन बताते हुए कहा कि उस नेत्रहीन से क्या बात की जाए। विद्या ददाति विनयम विद्या व्यक्ति को विनम्र बनाती है अगर उन्होंने भाष्य लिखे हैं तो रावण में भी भाष्य लिखे थे अगर रावण को जगतगुरु माना जाए तो अभिमानी रामभद्राचार्य को भी हम जगत गुरु मान लेंगे। स्वामी रामस्वरूपाचार्य सिर्फ इतने में ही नहीं रुके जब उनसे कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जगदगुरू रामभद्राचार्य जी को अपने नवरत्नों में चुना था तो उन्होंने प्रधानमंत्री को भी कटघरे में खड़े करते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री होंगे कोई भगवान नहीं है।

क्या प्रधानमंत्री सिर्फ 9 लोगों को ही सम्मान करेंगे बाकी संतों का सम्मान नहीं करेंगे। कुल मिलाकर जगतगुरु की पद को लेकर चित्रकूट के संतों में छिड़ा यह विवाद क्या गुल खिलाएगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन इस तरह की बयानबाजी से संतों की गरिमा को ठेस जरूर पहुंच रही है।


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