चीन-पाक की अब खैर नहीं : भारत खरीदेगा 114 नए राफेल, फ्रांस से 3.25 लाख करोड़ की महाडील की तैयारी - Sahet Mahet

चीन-पाक की अब खैर नहीं : भारत खरीदेगा 114 नए राफेल, फ्रांस से 3.25 लाख करोड़ की महाडील की तैयारी


नई दिल्ली (आरएनएस)। रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के तुरंत बाद भारत अब अपनी वायु शक्ति को आसमान की ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है। सीमा पर पाकिस्तान और चीन के अलावा बांग्लादेश जैसे पड़ोसी मुल्कों के साथ बदलते रिश्तों और तल्खी के बीच भारत ने फ्रांस के साथ एक ऐतिहासिक रक्षा सौदे की रूपरेखा तैयार कर ली है। खबर है कि भारतीय वायुसेना के बेड़े में 114 नए राफेल लड़ाकू विमान शामिल करने के प्रस्ताव पर सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसकी लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।

मैक्रों के दौरे से पहले अहम बैठक
इस मेगा डील को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। फरवरी के तीसरे हफ्ते में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत के दौरे पर आ रहे हैं। वह 18 फरवरी को नई दिल्ली में होने वाले एआई शिखर सम्मेलन (्रढ्ढ स्ह्वद्वद्वद्बह्ल) में हिस्सा लेंगे। सूत्रों के मुताबिक, उनके आने से ठीक पहले अगले हफ्ते रक्षा मंत्रालय की एक उच्च-स्तरीय बैठक होने जा रही है, जिसमें इस खरीद प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा होगी। भारतीय वायु सेना के इस प्रस्ताव को रक्षा खरीद बोर्ड से पहले ही शुरुआती मंजूरी मिल चुकी है, जिसे अब अमलीजामा पहनाने की तैयारी है।
80 फीसदी विमान भारत में ही बनेंगे
इस सौदे की सबसे खास बात ‘मेक इन इंडियाÓ है। डील के तहत खरीदे जाने वाले 114 राफेल लड़ाकू विमानों में से लगभग 80 प्रतिशत विमानों का निर्माण भारत में ही किए जाने की योजना है। इस प्रोजेक्ट के तहत वायुसेना को 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर विमान मिलेंगे। इनमें से ज्यादातर विमान फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट और भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियों के सहयोग से भारत में तैयार किए जाएंगे। इस डील के पूरा होने के बाद भारतीय वायुसेना के पास कुल 150 राफेल का शक्तिशाली बेड़ा होगा। इसके अलावा नौसेना के पास भी 26 राफेल मरीन विमान होंगे।
घट रही स्क्वाड्रन क्षमता, बढ़ता खतरा
यह डील भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल जरूरतों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। वर्तमान में वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों की सिर्फ 30 स्क्वाड्रन बची हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते गठजोड़ और अब बांग्लादेश की ओर से उत्पन्न हो रही सुरक्षा चुनौतियों ने खतरे की आशंका को बढ़ा दिया है। ऐसे में यह प्रोजेक्ट वायुसेना को लंबे समय तक 4.5-जेनरेशन-प्लस मल्टीरोल लड़ाकू विमानों की कमी को पूरा करने में मदद करेगा।

रक्षा बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
सरकार ने सेना के आधुनिकीकरण के लिए खजाना खोल दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में पेश किए गए बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए अब तक का सर्वाधिक 7.85 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह कुल बजट का 14.68 प्रतिशत है और पिछले वर्ष के मुकाबले इसमें 15 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की गई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो मोदी सरकार ने रक्षा बजट में निरंतर वृद्धि की है, जो 2021-22 में 4.84 लाख करोड़ से बढ़कर अब 7.85 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।


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