बरेली: 18 माह बाद किया गया चार शवों का अंतिम संस्कार, यह है पूरा मामला


बरेली। सोनू अंसारी: बरेली में आज 18माह बाद चार शवो का अंतिम संस्कार विधिवत किया गया तो हर कोई दंग रह गया । जी हां सुनने में बड़ा ही अजीबो गरीब लग रहा होगा मगर यह सच है । चार डेड बॉडी का डेढ़ साल बाद अंतिम संस्कार क्या है यह पूरा मामले देखते है इस रिपोर्ट में।

शव यात्रा में शामिल होते लोग एक साथ एक ही परिवार के चार लोगों की डेड बॉडी को शमशान भूमि लेजाते यह लोग आज डेढ़ साल बाद इनका अंतिम संस्कार कर इनको मुक्ति देंगे । दरअसल मामला बरेली की तहसील मीरगंज के गांव पैगानगरी है ,जहाँ  डेढ़ साल पहले मकान और प्रोपर्टी के चक्कर में  दामाद और बेटी ने अपने ही माँ ,बाप और दो  बहनों को  मारकर घर के अंदर ही दफना दिया । पुलिस जांच में मामले का दिलदहला देने वाले घटना का खुलासा हुआ।

मृतक  हीरालाल की  बड़ी बेटी ने प्रेम विवाह शीशगढ़ के एक गांव के रहने वाले नरेंद्र गंगवार से किया था,नरेंद्र और उसकी पत्नी की शादी के बाद से ही अपनी सास ससुर से संपत्ति को लेकर झगड़ा होता रहता था। मृतक हीरालाल अपने गांव की जमीन दुर्गाप्रसाद को बटाई पर देकर रुद्रपुर चले गए थे, वहां पर दामाद नरेंद्र और उसकी बड़ी बेटी ने करीब एक साल पहले अपने सास ससुर के साथ दोनो बेटियों को इतना मारा कि उनकी मौके पर ही मौत हो गयी।

जिसके बाद दामाद और बेटी ने चारों लोगो के शवो को घर के अंदर ही गाड़ दिए। मामला का खुलासा तब हुआ, जब बटाईदार ने हीरालाल और उनकी पत्नी बेटियों के बारे में उसके दामाद और बेटी से पूछा तो नरेंद्र गंगवार और उसकी पत्नी ने कहानियां बनाना शुरू कर दिया। सब अलग अलग मौत की बात कर रहे थे। जिसके बाद बटाईदार को शक हुआ ओर उंन्होने रुद्रपुर जॉकर पूछताछ की। घर बंद होने पर उंन्होने पड़ोसियों से जानकारी प्राप्त की तो पड़ोसियों ने बताया कि 1 साल से यह मकान नही खुला है।

जिसके बाद दुर्गाप्रसाद का शक और यकीन मे बदल गया, उन्होने पुलिस को इसकी सूचना दी। जिसके बाद रुद्रपुर की पुलिस ने नरेंद्र से शक्ति से पूछताछ की तो उसने बताया कि उसने और पत्नी ने मिलकर अपने सास ससुर और दो बेटियों की हत्या करके चारो लोगो के शवों को घर के अंदर ही गाड़ दिए हैं। जिसके बाद पुलिस ने घर पहुंच चारो शवो को बरामद कर हत्या का खुलासा किया। आज रविवार को ग्राम पैगानगरी मे चारों कंकाल शवों का अंतिम संस्कार किया गया। जिसके बाद करीब 18 माह बाद चारों लोगो की भटकती आत्माओं को शांति मिली।


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