पप्पू यादव ने बताया बीजेपी शासन से ज्यादा न्यायप्रिय थी अंग्रेजी सरकार, ‘भरत तिवारी आज के भगत सिंह’

 पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। सरकार पर सवाल उठाते हुए पप्पू यादव ने कहा है कि भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला बताता है कि बीजेपी की कुकर्मी सरकार से इनके आका रहे अंग्रजों की सरकार अधिक न्यायप्रिय थी। पप्पू यादव ने आगे सोशल मीडिया पर बयान देते हुए लिखा है कि उसने हमारे गौरव भगत सिंह जी का एनकाउंटर नहीं किया, जब उन्होंने नेशनल असेंबली में बम फेंका था।

क्या बोले पप्पू यादव?

पप्पू यादव ने कहा कि भरत भूषण तिवारी आज के भगत सिंह हैं। उन्होंने न्याय के लिए अपनी कुर्बानी दी है। ध्यान रहे कि बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव के युवक भारत भूषण तिवारी के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उनके पैतृक गांव में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने के बाद उन्हें गोली मारी गई। यह घटना 17 जून को हुई थी। बिहार पुलिस ने गोलीबारी को आत्मरक्षा बताया था, जबकि ग्रामीणों ने पुलिस के बयान का खंडन करते हुए दावा किया था कि तिवारी को गोली लगने से पहले ही उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था।

भरत तिवारी एनकाउंटर, क्या पुलिसिया साजिश है?

भोजपुर जिले के शाहपुर बिलौटी गांव का भरत तिवारी जवनिया गांव के विस्थापितों के हक और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा था। पुलिस से तीखी बहस का वीडियो वायरल हुआ था।
विवाद के बाद भोजपुर पुलिस ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि भरत मानसिक रूप से विक्षिप्त है। अगले दिन 17 जून को पुलिस ने उसे घेर लिया। भरत तिवारी का वीडियो सामने आया।
परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि भरत तिवारी के सरेंडर करने के बाद पुलिस ने उसे गोली मारा है। पुलिस ने खदेड़कर उसे करीब 4 गोलियां मार दी।
गंभीर हालत में भरत को आरा सदर अस्पताल से पटना पीएमसीएच रेफर किया गया। जहां उसकी मौत हो गई। मां का आरोप है कि समाज की लड़ाई लड़ने वाले उनके बेटे की सोची समझी साजिश के तहत हत्या की गई है।
शव गांव पहुंचते ही भड़के ग्रामीणों ने 7 घंटे तक पटना बक्सर मार्ग को जाम रखा। इस दौरान पुलिस और जनता के बीच झड़प हुई। पुलिस ने लाठीचार्ज किया। बाद में परिवार की मांग पर कार्रवाई और एक्शन शुरू हुआ।

ग्रामीणों के सवाल?

पुलिस के मुताबिक, तिवारी ने ऑपरेशन के दौरान अधिकारियों पर गोली चलाई, जिसके चलते उन्हें जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। पुलिस ने बताया कि टीम पर बार-बार गोली चलाने के बाद आत्मरक्षा में कार्रवाई करते हुए तिवारी के पैर में गोली लगी। हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि तिवारी ने गोलीबारी से पहले अपनी पिस्तौल फेंक दी थी और आत्मसमर्पण कर दिया था। उन्होंने एक वीडियो का भी हवाला दिया है जिसमें कथित तौर पर उन्हें पुलिसकर्मियों के सामने अपना हथियार फेंकते हुए दिखाया गया है। इसी आधार पर उन्होंने सवाल उठाया है कि आत्मसमर्पण करने के बाद उन्हें गोली क्यों मारी गई।

नेताओं ने उठाए सवाल?

ग्रामीणों के अलावा इस मसले पर बीजेपी के नेता विजय कुमार सिन्हा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे सहित शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी भी सवाल उठा रहे हैं। अपनी ही पार्टी से धिरते देख मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस एनकाउंटर के न्यायिक आयोग से जांच की बात कही है। अब भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर की न्यायिक जांच होगी। इस मामले में न्यायिक आयोग पूरे मामले की जांच करेगा। उधर, भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के बाद स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर मीडिया भी इस मामले को लेकर सक्रिय है। लगातार इस घटना की कवरेज हो रही है।

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