'सिलसिला अदब का’ ने आयोजित की भव्य ‘शायरी नशिस्त – पाँचवीं’ और ‘उर्दू लिपि पर महत्वपूर्ण चर्चा’ - Sahet Mahet

‘सिलसिला अदब का’ ने आयोजित की भव्य ‘शायरी नशिस्त – पाँचवीं’ और ‘उर्दू लिपि पर महत्वपूर्ण चर्चा’


लखनऊ | उर्दू भाषा और साहित्य को बढ़ावा देने वाली संस्था ‘सिलसिला अदब का’ ने रविवार को अपनी पाँचवीं साहित्यिक गोष्ठी ‘शायरी नशिस्त पाँचवीं’ का आयोजन शीरोज़ हैंगआउट, गोमतीनगर, लखनऊ में किया। इस कार्यक्रम की संस्थापक और संयोजक साजिदा सबा साहिबा हैं। कार्यक्रम में लखनऊ भर के अनेक प्रसिद्ध शायरों, साहित्यकारों और उर्दू प्रेमियों ने बड़ी संख्या में शिरकत की। इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई

“उर्दू शायरी में उर्दू रसमुलख़त (लिपि) की अहमियत”,

जिसमें वक्ताओं ने कहा कि नस्तलीक़ लिपि उर्दू शायरी की आत्मा है और इसकी सुंदरता ही उर्दू के अदब को विशिष्ट बनाती है। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल रहे — शहनाज़ सिदरत, सबीरा हबीब, तबस्सुम क़िदवई, कुलसुम तल्हा, ताहिरा हसन, अरशद आज़मी, वसीम हैदर, अश्वनी कुमार, दीपक कबीर और मोहम्मद शमीम। शायरी सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध शायरा सलमा हिजाब साहिबा ने की। मुख्य शायरों में जावेद मलिकज़ादा, हिना रिज़वी हैदर, साजिदा सबा, सुमैया राना, मोइन खैराबादी, रुबीना अयाज़, सलमान ज़फर और सैयद अहमद फ़राज़ शामिल रहे। कार्यक्रम में प्रस्तुत शायरी और विचार-विमर्श ने उर्दू अदब में उर्दू लिपि की अहमियत पर गहरी और प्रेरक रोशनी डाली।

संस्था की संस्थापक साजिदा सबा साहिबा ने कहा — “यह महफ़िल उर्दू भाषा और हमारी तहज़ीब की हिफ़ाज़त की एक कोशिश है। मैं सभी मेहमानों और शायरों का दिल से शुक्रिया अदा करती हूँ जिन्होंने अपनी मौजूदगी से इस कार्यक्रम को यादगार बना दिया।” कार्यक्रम का समापन सामूहिक दुआ और शायरी की गूंज के साथ हुआ।

संस्थान के बारे में:

‘सिलसिला अदब का’ की स्थापना साजिदा सबा ने की है। यह संस्था उर्दू भाषा और साहित्य की तरक़्क़ी के लिए नियमित रूप से मुशायरे, गोष्ठियाँ और शायरी की महफ़िलें आयोजित करती है।


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