प्रधानमंत्री ने रखी राम मंदिर की आधारशिला, देश को सम्बोधित कर किया भगवान राम का वर्णन


श्री राम भगवान के प्रभावशाली मंदिर में अभिजीत मुहर्त में भूमिपूजन करने के तत्पश्चात मंत्रो के उच्चारण के साथ आधारशिला को स्थापित किया गया। राम मंदिर का शिलान्यास दोपहर 12 बजकर 44 मिनट और 8 सेकेंड पर किया गया है। इस दौरान पीएम मोदी के साथ यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास समेत 175 प्रतिष्ठित अतिथि भी शामिल थे। पीएम मोदी ने सभी पूजा-अर्चना के नियमों का पालन करते हुए इस कार्यक्रम की शुरुवात की थी।

कार्यक्रम की समाप्ति के बाद देशवाशियो को बधाई देते हुए मोदी जी ने देश को सम्बोधित किया। जय श्री राम के साथ शुरू किया सम्बोधन।

पीएम मोदी ने कहा- मुझे यहां आना ही था क्योंकि ‘राम काज कीनु बिन मोहि कहां विश्राम। कई वर्षों तक तप, त्याग, समर्पण चला। इसमें अर्पण भी था, तर्पण भी था। 130 करोड़ देशवासियों की तरफ से नमन करता हूं। आयोजन को जो देख रहा है, वो भाव-विभोर है। टूटना और फिर उठ खड़ा होना, सदियों से जारी इस क्रम से राम जन्मभूमि आज मुक्त हुई है। आस्था, श्रद्धा, संकल्प की प्रेरणा देता रहेगा यह राम मंदिर। केवल अयोध्या की भव्यता ही नहीं पूरे क्षेत्र का अर्थतंत्र बदल जाएगा। पूरी दुनिया से लोग यहां प्रभु राम और माता सीता के दर्शन करने आएंगे। राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया वर्तमान को अतीत से, स्व को संस्कार से, नर को नारायण से जोड़ने का प्रतीक है। युगों-युगों तक कीर्तिपताका फहराती रहेगी। सत्य, अहिंसा, बलिदान को न्यायप्रिय भारत की देन है। इतिहास खुद को दोहरा भी रहा है। सदियों का इंतजार आज समाप्त हो रहा है। पूरा भारत भावुक है। करोड़ों लोगों को तो आज विश्वास ही नहीं हो रहा होगा कि वे इस पावन क्षण को देख रहे हैं।

कोरोना संक्रमण के बीच श्रीराम के कार्य में मर्यादा का जैसा उदाहरण प्रस्तुत किया जाना चाहिए। जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया, तब देशवासियों ने शांति सद्भावना का परिचय दिया था। मंदिर के इतिहास को मिटाने की बहुत कोशिशें हुईं। लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे हैं। हमारी संस्कृति के आधार हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। जैसे दलित, पिछड़ों, आदिवासियों हर वर्ग ने आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी को सहयोग किया। विदेश आक्रांताओं के खिलाफ राजा सुहेलदेव का सहयोग मिला। उसी तरह सबके सहयोग से राम मंदिर का निर्माण हो रहा है।

भारत की आस्था में राम, दिव्यता में राम, दर्शन में राम हैं। राम भारत की आत्मा हैं। तुलसी के राम सगुण राम हैं। नानक और कबीर के राम निर्गुण राम हैं। आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी के रघुपति राम हैं। राम विभिन्न रूपों में मिलेंगे। वह भारत की अनेकता में एकता के सूत्र हैं। तमिल, मलयालम, बांग्ला, कश्मीर, पंजाबी में राम हैं। विश्व के कई लोग खुद को राम से जुड़ा हुआ मानते हैं। कंबोडिया, थाईलैंड, मलेशिया, ईरान में भी राम कथाओं का विवरण मिलेगा। नेपाल और श्रीलंका में तो राम का आत्मीय संबंध जुड़ा है। राम दुनिया के हर रूप में रचे-बसे हैं। आज देशभर के लोगों के सहयोग से राम मंदिर निर्माण का यह पुण्य कार्य शुरू हुआ है। जैसे पत्थरों पर श्रीराम लिखकर राम सेतु बनाया गया था वैसे ही घर-घर, गांव-गांव से श्रद्धापूर्क पूजी शिलाएं यहां ऊर्जा का श्रोत बन गई है। यह मेरा सौभाग्य है कि इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने का निमंत्रण मिला। कन्याकुमारी से क्षीरभवानी, कोटेश्वर से कामाख्या, जगन्नाथ से केदारनाथ, सोमनाथ से काशी विश्वनाथ तक पूरा भारत राममय है। यह मेरा सौभाग्य है कि इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने का निमंत्रण मिला। कन्याकुमारी से क्षीरभवानी, कोटेश्वर से कामाख्या, जगन्नाथ से केदारनाथ, सोमनाथ से काशी विश्वनाथ तक पूरा भारत राममय है। भगवान श्रीराम का चरित्र और आदर्श ही महात्मा गांधी के रामराज्य का मार्ग है। राम आधुनिकता के पक्षधर हैं। राम की प्रेरणा के साथ भारत आज आगे बढ़ रहा है। मानवता ने जब-जब राम को माना है, विकास हुआ है। भटकने पर विनाश हुआ है। हमें संकल्पशक्ति से आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है। तमिल रामायण का जिक्र कर बोले अब हमें आगे बढ़ना है देर नहीं करनी है। यही संदेश श्रीराम का आज के लिए है। सियापति रामचंद्र की जय-जयकार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना सम्बोधन किया समाप्त।


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