संजीत हत्याकांड : सात और पुलिसकर्मी सस्पेंड, IPS डिप्टी एसपी सहित चार पर पहले ही हो चुकी है कार्रवाई


उत्तर प्रदेश। योगी सरकार ने कानपुर में लैब टेक्नीशियन संजीत यादव हत्याकांड में 11 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की है। इसमें आईपीएस अपर्णा गुप्ता,डीएसपी मनोज कुमार गुप्ता, इंस्पेक्टर रणजीत राय, दो दारोगा राजेश और योगेंद्र प्रताप सिंह सहित छह सिपाही अवधेश, दिशु भारती, विनोद कुमार, सौरभ पांडे, मनीष और शिवप्रसादको लापरवाही बरतने के आरोप में सस्पेंड कर दिया है। 

22 जून की रात लैब टेक्नीशियन संजीत नौबस्ता स्थित हॉस्पिटल से बर्रा पटेल चौक के पास स्थित पैथालॉजी में सैंपल देने के लिए निकला था। सैंपल देकर उसे घर जाना था लेकिन रास्ते से लापता हो गया। गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस ने जब संजीत की कॉल डिटेल निकलवाई तो पता चला कि संजीत की बात राहुल नामक एक युवक, एक युवती सहित कई अन्य लोगों से हुई थी। पिता चमनलाल ने राहुल के खिलाफ बेटे के अपहरण का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। 13 जुलाई को पिता ने पुलिस के कहने पर फिरौती के 30 लाख रुपए से भरा बैग भी अपहर्ताओं के कहने पर गुजैनी पुल से नीचे फेंक दिया था। इसके बावजूद अपहृत बेटा नहीं मिला। अब उसके हत्या होने की पुष्टि पुलिस ने कर दी है। 

अपहरणकर्ताओं  ने परिजनों को करीब 26 बार कॉल किया इस दौरान उनसे करीब आधा-आधा घंटे तक बातचीत हुई फिर भी सर्विलांस टीम उन्हें ट्रेस नहीं कर पाई। 
-अपहरण के बाद से पुलिस ने हॉस्पिटल के कैमरे चेक करने के साथ ही कर्मचारियों से भी पूछताछ की। लेकिन एक महीने तक हॉस्पिटल के आसपास या स्मार्ट सिटी के कैमरों के फुटेज नहीं खंगाले।

परिजनों का कहना है कि वह बर्रा इंस्पेक्टर के कहने पर ही अपहरणकर्ताओं को फिरौती देने गए थे। आरोप है कि पुलिस ने बिना तैयारी के ही बैग तो फिंकवा दिया लेकिन गुजैनी पुल या आसपास टीम को नहीं लगाया। इतना ही नहीं घटनास्थल की जांच पड़ताल करने के बजाय हाईवे के ऊपर से ही लौट गए। 

अपहृत संजीत की तलाश में पुलिस टीमें सचेंडी, मेहरबान सिंह का पुरवा, उन्नाव, कानपुर देहात, फतेहपुर, हमीरपुर,  सहित शहर के आसपास के इलाकों में भी गई। अपहरणकर्ताओं ने अलग-अलग दस स्थानों से फिरौती के लिए पिता चमनलाल को फोन किया। टॉवर डॉटा फिल्ट्रेशन की मदद से पुलिस ने इन सभी से आने वाले कॉल्स का ब्यौरा जुटा उससे भी पुलिस को कोई खास सफलता नहीं मिली। 


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