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	<title>Uncategorized Archives - Sahet Mahet</title>
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	<description>Daily Hindi News</description>
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	<title>Uncategorized Archives - Sahet Mahet</title>
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		<title>जिस जहाज ने भारतीय युद्धपोत को मारी टक्कर, वो कितना खतरनाक, भारत ने पाकिस्तान को क्या याद दिलाया?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Sep 2026 13:26:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>अरब सागर में भारत के नौसैनिक जहाज से एक पाकिस्तानी युद्धपोत के टकराने की घटना को लेकर विदेश मंत्रालय ने नाराजगी जाहिर की है। विदेश मंत्रालय ने इस मामले में अपना विरोध दर्ज कराने के लिए पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक को तलब किया। इतना ही नहीं भारत की तरफ से पाकिस्तान में स्थित दूतावास को &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://sahetmahet.com/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%aa/">जिस जहाज ने भारतीय युद्धपोत को मारी टक्कर, वो कितना खतरनाक, भारत ने पाकिस्तान को क्या याद दिलाया?</a> appeared first on <a href="https://sahetmahet.com">Sahet Mahet</a>.</p>
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<p class="wp-block-paragraph">अरब सागर में भारत के नौसैनिक जहाज से एक पाकिस्तानी युद्धपोत के टकराने की घटना को लेकर विदेश मंत्रालय ने नाराजगी जाहिर की है। विदेश मंत्रालय ने इस मामले में अपना विरोध दर्ज कराने के लिए पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक को तलब किया। इतना ही नहीं भारत की तरफ से पाकिस्तान में स्थित दूतावास को भी उनके विदेश मंत्रालय के सामने भी अरब सागर के इस टकराव का मुद्दा उठाने और ऐसी घटनाओं का विरोध करने का निर्देश दिया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><em>ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर भारत और पाकिस्तान के जहाजों के बीच ऐसी क्या घटना हुई कि विदेश मंत्रालय को मुद्दे को राजनयिक स्तर पर उठाना पड़ा है? केंद्र की तरफ से पाकिस्तान के सैन्य इकाइयों को क्या चेतावनी दी गई है? भारत सरकार ने पाकिस्तान को जिस 35 साल पुराने नियम की याद दिलाई है, वह क्या है? यह पीएनएस हुनैन क्या है और यह कितना खतरनाक है? &nbsp;इसके अलावा पहले कब-कब अरब सागर में पाकिस्तान ने इसी तरह की नापाक हरकतों से भारत को भड़काने की कोशिश की है?<strong>&nbsp;आइये जानते हैं&#8230;</strong></em></p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>पहले जानें- 15 सितंबर को भारत-पाकिस्तान के जहाजों के बीच क्या हुआ?</strong></h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जिस घटना को लेकर लेकर विरोध दर्ज कराया गया है, वह मंगलवार (15 सितंबर) की शाम की है।&nbsp;</li>



<li>उत्तरी अरब सागर में ओमान तट से लगभग 220 किमी पूर्व अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाजों के बीच टक्कर की एक घटना हुई।</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>केंद्र की तरफ से पाकिस्तान के सैन्य इकाइयों को क्या चेतावनी दी गई है?</strong></h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>विदेश मंत्रालय ने समुद्र में पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के इस व्यवहार को पूरी तरह से अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर करार दिया है।</li>



<li>पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक को तलब कर स्पष्ट तौर पर कहा गया कि वे सैन्य इकाइयों के संबंधित अफसरों को समुद्र में संचालन के दौरान सावधानी बरतने के लिए कहें।</li>



<li>पाकिस्तान से कहा गया कि उसकी सैन्य इकाइयां दोनों देशों के बीच हुए द्विपक्षीय समझौतों का सम्मान करें और उनके प्रावधानों का ढंग से पालन करें।</li>



<li>इसी के साथ भारत ने पाकिस्तान को भविष्य में इस तरह की खतरनाक घटनाओं की दोबारा होने से रोकने का भी स्पष्ट संदेश दिया।</li>



<li>केंद्र ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय कार्यवाहक राजदूत को निर्देश दिया कि वे पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने मामले में औपचारिक और कड़ा विरोध दर्ज कराएं।</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या है वह 35 साल पुराना नियम, जिसका जिक्र कर भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">भारत सरकार ने पाकिस्तान को अप्रैल 1991 में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय समझौते की याद दिलाई है, जिसके तहत अरब सागर में दोनों देशों को किसी भी तरह के सैन्य अभ्यास, गतिविधि या सैन्य बेड़े की तैनाती को लेकर पहले से जानकारी देनी होती है की याद दिलाई है और इसका पालन करने के लिए कहा गया है। इसे एग्रीमेंट ऑन एडवांस नोटिस ऑफ मिलिट्री एक्सरसाइज, मैन्युअर्स एंड ट्रूप मूवमेंट्स (Agreement on Advance Notice of Military Exercises, Manoeuvres and Troop Movements) के अनुच्छेद 10 की याद दिलाई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>अरब सागर में भारत-पाकिस्तान के टकराव को टालने के नियम क्या?</strong></h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>समझौते के अनुच्छेद 10 के मुताबिक, जब भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाज या पनडुब्बियां अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में तैनात हों, तो उन्हें दुर्घटनाओं से बचने के लिए एक-दूसरे से कम से कम 3 समुद्री मील (लगभग 5.56 किलोमीटर) की सुरक्षित दूरी बनाए रखनी अनिवार्य है।</li>



<li>इस प्रावधान को दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने और समुद्र में एक-दूसरे की सैन्य गतिविधियों का गलत अर्थ या गलतफहमी निकालने से रोकने के लिए शामिल किया गया था।</li>



<li>इस नियम को लागू करने का मकसद अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच किसी भी बेवजह के टकराव या खतरनाक आमने-सामने की स्थिति को टालना है।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">गौरतलब है कि 15 सितंबर की घटना में पाकिस्तानी नौसैनिक पोत पीएनएस हुनैन ने तीन समुद्री मील के इस बफर ज़ोन का उल्लंघन करते हुए तेज गति से भारतीय युद्धपोत के बेहद करीब आकर असुरक्षित पैंतरेबाजी की, जिससे दोनों पोत आपस में टकरा गए।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या है पाकिस्तान का पीएनएस हुनैन, जिसने घटना को दिया अंजाम?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">पीएनएस हुनैन (एफ-273) पाकिस्तान नौसेना का आधुनिक यारमुक-क्लास ऑफशोर पेट्रोल वेसल (कॉरवेट) है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>निर्माण और कमीशनिंग</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>इस पोत का निर्माण रोमानिया के गलाशिया स्थित डामेन शिपयार्ड्स की ओर से किया गया है।&nbsp;</li>



<li>इसे जुलाई 2024 में पाकिस्तान नौसेना में शामिल किया गया था।&nbsp;</li>



<li>यह यारमुक-क्लास बैच II-ओपीवी 2600 डिजाइन का तीसरा जहाज है।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">पीएनएस हुनैन को मुख्य रूप से तटीय सुरक्षा, लंबी दूरी की गश्त, और खोज व बचाव अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है। यह जहाज पहले अरब सागर में पनामा ध्वज वाले मालवाहक पोत एमवी गोल्ड ऑटम से 18 विदेशी नाविकों को सुरक्षित बचाने के रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए चर्चा में आया था।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>अरब सागर में पाकिस्तान ने पहले कब-कब की भारत के खिलाफ नापाक हरकत?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">अरब सागर और उससे सटे समुद्री क्षेत्रों में भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के बीच पहले भी कई बार असुरक्षित पैंतरेबाज़ी, उकसावे और टकराव की स्थितियां बन चुकी हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>2011: आईएनएस गोदावरी और पीएनएस बाबर की टक्कर</strong><br>16 जून 2011 को अदन की खाड़ी/समुद्री क्षेत्र में सोमाली समुद्री डाकुओं से छुड़ाए गए मालवाहक पोत स्वेज के दौरान यह घटना हुई। भारतीय युद्धपोत आईएनएस गोदावरी जब व्यापारिक पोत के पास पहुंचा, तो पाकिस्तान के नौसैनिक जहाज पीएनएस बाबर ने पीछे से तेज गति से आकर असुरक्षित पैंतरेबाजी की। इस दौरान दोनों जहाज आपस में टकरा गए, जिससे आईएनएस गोदावरी के हेलीकॉप्टर डेक की सुरक्षा जाली को मामूली नुकसान हुआ था। भारत ने इस पर 1991 के द्विपक्षीय समझौते और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के उल्लंघन का कड़ा विरोध जताया था।</p>
<p>The post <a href="https://sahetmahet.com/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%aa/">जिस जहाज ने भारतीय युद्धपोत को मारी टक्कर, वो कितना खतरनाक, भारत ने पाकिस्तान को क्या याद दिलाया?</a> appeared first on <a href="https://sahetmahet.com">Sahet Mahet</a>.</p>
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		<title>18th BRICS Summit : परमाणु बम भी बेअसर, पुतिन-जिनपिंग की कार में क्या खास, इन्हें क्यों कहते हैं चलता-फिरता किला?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Sep 2026 14:32:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>ब्रिक्स सम्मेलन 2026 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सुरक्षा व्यवस्था पूरी दुनिया के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। दोनों ही देशों के वैश्विक नेता अपनी-अपनी विशेष आर्मर्ड प्रेसिडेंशियल कारों के साथ भारत पहुंच चुके हैं, जिन्हें सुरक्षा के मानकों पर पहियों पर चलता-फिरता किला कहा जा &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://sahetmahet.com/18th-brics-summit-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a5%81-%e0%a4%ac%e0%a4%ae-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a4%bf/">18th BRICS Summit : परमाणु बम भी बेअसर, पुतिन-जिनपिंग की कार में क्या खास, इन्हें क्यों कहते हैं चलता-फिरता किला?</a> appeared first on <a href="https://sahetmahet.com">Sahet Mahet</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><em>ब्रिक्स सम्मेलन 2026 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सुरक्षा व्यवस्था पूरी दुनिया के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। दोनों ही देशों के वैश्विक नेता अपनी-अपनी विशेष आर्मर्ड प्रेसिडेंशियल कारों के साथ भारत पहुंच चुके हैं, जिन्हें सुरक्षा के मानकों पर पहियों पर चलता-फिरता किला कहा जा रहा है। ये कारें इतनी ताकतवर है कि यह किसी भी प्रकार के हमलों को नाकाम करने की क्षमता रखती है। आइए इन दोनों शक्तिशाली नेताओं की आधिकारिक कारों की सुरक्षा खूबियों, इंजन पावर और उनके महत्व के बारे में जानते हैं&#8230;</em></p>



<p class="wp-block-paragraph">ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने-अपने देशों में बनी खास प्रेसिडेंशियल कारों के साथ भारत पहुंच चुके हैं। जहां रूसी राष्ट्रपति पुतिन पहले ही दिल्ली आ चुके थे, वहीं शी जिनपिंग शनिवार को पहुंचे। बता दें कि इनकी बख्तरबंद कारें सिर्फ लग्जरी और आराम का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा, कूटनीतिक प्रोटोकॉल और उनके देशों की औद्योगिक ताकत का भी प्रतीक हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पुतिन की ऑरस सेनेट (Aurus Senat) और शी जिनपिंग की होंगकी N701 (Hongqi N701) इसी खास श्रेणी की कारें हैं। दोनों वाहनों को आम लग्जरी कारों से अलग, बेहद खास सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इनकी तकनीक और सुरक्षा से जुड़ी कई जानकारियां सार्वजनिक नहीं हैं, जिससे इन कारों को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ जाती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ब्रिक्स सम्मेलन के लिए पुतिन और शी जिनपिंग के भारत पहुंचने के साथ ही उनके आधिकारिक काफिले और सुरक्षा व्यवस्था भी चर्चा में हैं। दोनों नेताओं के साथ उनके विशेष बख्तरबंद वाहनों का काफिला भी भारत पहुंचा है। आखिर इन प्रेसिडेंशियल कारों में ऐसा क्या खास है, जो इन्हें दुनिया की सबसे सुरक्षित और खास कारों में शामिल करता है?</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="597" height="335" src="https://sahetmahet.com/wp-content/uploads/2026/09/image-43.png" alt="" class="wp-image-21217" srcset="https://sahetmahet.com/wp-content/uploads/2026/09/image-43.png 597w, https://sahetmahet.com/wp-content/uploads/2026/09/image-43-300x168.png 300w, https://sahetmahet.com/wp-content/uploads/2026/09/image-43-390x220.png 390w" sizes="(max-width: 597px) 100vw, 597px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शी जिनपिंग की होंगकी का मतलब है ‘लाल झंडा’</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">शी जिनपिंग जिस कार से दिल्ली पहुंचे, उसका नाम&nbsp;लिमोजिन &#8216;होंगकी N701&#8217; है। हालांकि इस दौरान उनकी कार को ब्लैक कवर में ले जाते हुए देखा गया।&nbsp;अब अगर कार के बारे में बात करें तो होंगकी का मंदारिन यानी की चीनी में बोली जाने वाली भाषा में अर्थ ‘लाल झंडा’ होता है। यह चीन के सबसे पुराने यात्री कार ब्रांडों में से एक है। इसकी शुरुआत 1958 में हुई थी और लंबे समय तक इसका संबंध चीन के शीर्ष सरकारी अधिकारियों और आधिकारिक कार्यक्रमों से रहा है। आज होंगकी &nbsp;चीन के लग्जरी कार बाजार में भी मौजूद है, लेकिन N701 आम ग्राहक के लिए बनाई गई कार नहीं है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>होंगकी &nbsp;N701 आम बाजार में नहीं मिलती</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>दिलचस्प बात यह भी है कि होंगकी  N701 एक विशेष प्रेसिडेंशियल लिमोजीन है। इसे कोई भी आम ग्राहक डीलरशिप से खरीद नहीं सकता।</li>



<li>यह कार पहली बार सार्वजनिक रूप से 2022 में शी जिनपिंग की हांगकांग यात्रा के दौरान नजर आई थी। इसके बाद यह चीन के राष्ट्रपति की आधिकारिक यात्राओं से जुड़ी रही है। मिस्र की हालिया यात्रा के दौरान भी N701 उनके काफिले में दिखाई दी।</li>



<li>यही वजह है कि इसकी कीमत को सामान्य लग्जरी कार की तरह बताना सही नहीं होगा। यह एक सीमित और विशेष सरकारी इस्तेमाल के लिए तैयार की गई कार है।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><br><strong>N701 की सबसे बड़ी खासियत ही इसका रहस्य है</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>होंगकी  N701 के बारे में सबसे ज्यादा चर्चा इसकी सुरक्षा को लेकर होती है, लेकिन यहां सबसे जरूरी बात यह है कि इसकी सटीक सुरक्षा विशेषताएं आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं हैं।</li>



<li>इसकी आर्मर प्लेट कितनी मोटी है, ग्लास किस स्तर का है, यह किस तरह के हमले या विस्फोट को झेल सकती है या इसमें कौन-कौन से विशेष सुरक्षा सिस्टम हैं, इनमें से ज्यादातर जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।</li>



<li>इसलिए इंटरनेट पर N701 को लेकर किए जाने वाले बुलेटप्रूफ, बमप्रूफ या परमाणु हमले से सुरक्षित’ जैसे दावों को आधिकारिक तथ्य नहीं माना जा सकता। उपलब्ध रिपोर्टें भी इसकी सुरक्षा व्यवस्था को काफी हद तक गोपनीय बताती हैं।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>डिजाइन से ही दिखता है प्रेसिडेंशियल रुतबा</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>किसी भी कार को लोग सबसे पहले उसके बाहरी डिजाइन से देखते हैं। होंगकी N701 को पहली नजर में देखने पर इसका बड़ा और लंबा आकार सबसे पहले ध्यान खींचता है। इसमें लंबी बॉडी, बड़ी फ्रंट ग्रिल, क्रोम फिनिश और काफी बड़ा रियर केबिन दिया गया है।</li>



<li>कार के फ्रंट फेंडर पर झंडे लगाने के लिए विशेष माउंटिंग पॉइंट्स भी दिखाई देते हैं। विदेश यात्राओं के दौरान इनका इस्तेमाल आधिकारिक प्रोटोकॉल के तहत किया जाता है। पीछे की तरफ भी इसका डिजाइन काफी सादा लेकिन भव्य रखा गया है। बड़े ग्लास एरिया, क्रोम एलिमेंट और लंबी बॉडी इसे सामान्य लग्जरी सेडान से अलग पहचान देते हैं।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><br><strong>इंजन और सुरक्षा की पूरी जानकारी क्यों नहीं मिलती?</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>N701 की तकनीकी जानकारी का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक नहीं है। इसके इंजन और प्रदर्शन के आंकड़े भी आधिकारिक तौर पर पूरी तरह सामने नहीं आए हैं।</li>



<li>कुछ रिपोर्टों में V8 या V12 इंजन की संभावना बताई गई है, लेकिन इसे आधिकारिक स्पेसिफिकेशन नहीं माना जा सकता। इसी तरह कार की आर्मरिंग और सुरक्षा सिस्टम से जुड़ी कई जानकारियां भी अनुमान और मीडिया रिपोर्टों तक सीमित हैं।</li>



<li>यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि राष्ट्रपति की सुरक्षा वाली कार के बारे में उसकी पूरी तकनीकी क्षमता सार्वजनिक करना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं माना जाता।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><br><strong>हाेंगकी सिर्फ कार नहीं, चीन की पहचान भी</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>बता दें कि होंगकी की कहानी सिर्फ ऑटोमोबाइल तक सीमित नहीं है। चीन में यह ब्रांड लंबे समय से सरकारी नेतृत्व और राष्ट्रीय कार्यक्रमों से जुड़ा रहा है। अब चीन जिस तरह वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है, उसमें होंगकी उसकी घरेलू लग्जरी कार इंडस्ट्री की पहचान बन चुकी है।</li>



<li>ऐसे में शी जिनपिंग की विदेश यात्राओं में N701 का इस्तेमाल सिर्फ सुविधा या सुरक्षा का मामला नहीं है। यह चीन में बनी एक खास कार को राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और आधिकारिक पहचान के साथ पेश करने का तरीका भी है।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><br><strong>N701 विदेश यात्राओं में भी साथ रहती है</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>होंगकी N701 चीन के बाहर भी शी जिनपिंग के साथ नजर आ चुकी है। इसे उनकी सऊदी अरब यात्रा के दौरान भी देखा गया था। मिस्र की हालिया यात्रा में भी यह कार उनके आधिकारिक काफिले का हिस्सा बनी।</li>



<li>इससे पता चलता है कि N701 सिर्फ चीन के भीतर राष्ट्रपति के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है। विदेश यात्रा के दौरान भी इसे आधिकारिक प्रोटोकॉल का हिस्सा बनाया जाता है।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><br><strong>मिस्र में N701 की मौजूदगी का क्या मतलब है?</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>शी जिनपिंग की मिस्र यात्रा करीब दस साल बाद हुई। ऐसे समय में जब चीन और मिस्र के बीच आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक संबंधों का विस्तार हो रहा है, राष्ट्रपति की खास कार का वहां नजर आना भी प्रतीकात्मक महत्व रखता है।</li>



<li>मिस्र की भौगोलिक स्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण है। स्वेज नहर एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच एक अहम समुद्री व्यापार मार्ग है। चीन के लिए मिस्र व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से महत्वपूर्ण साझेदार है। इसलिए काहिरा की सड़कों पर दिखाई देने वाली N701 को केवल एक कार के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। यह चीन की बढ़ती औद्योगिक और कूटनीतिक मौजूदगी का भी प्रतीक बनती है।</li>
</ul>
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		<title> चीन के होते ब्रिक्स में पाकिस्तान का आवेदन क्यों मंजूर नहीं; कैसे मिलती है जगह, भारत की ताकत क्या?</title>
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		<pubDate>Sat, 12 Sep 2026 14:24:51 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
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		<category><![CDATA[BRICS Summit]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारत की मेजबानी में 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन दिल्ली में चल रहा है। रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका और ईरान समेत समूह में शामिल सभी अहम देशों के नेता इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। ब्रिक्स को हमेशा से विकासशील देशों का गठबंधन माना जाता रहा है। यही वजह है कि ब्रिक्स की मूल &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">भारत की मेजबानी में 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन दिल्ली में चल रहा है। रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका और ईरान समेत समूह में शामिल सभी अहम देशों के नेता इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। ब्रिक्स को हमेशा से विकासशील देशों का गठबंधन माना जाता रहा है। यही वजह है कि ब्रिक्स की मूल बैठक के बाद इसके स्थायी सदस्यों की साझेदार देशों के साथ भी मुलाकात होगी। हालांकि, ब्रिक्स में अब तक पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे विकासशील देशों की एंट्री नहीं हो पाई है। खासकर पाकिस्तान को तो ब्रिक्स में आवेदन के बावजूद आज तक जगह नहीं मिली है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><em>ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर ब्रिक्स में अभी कितने सदस्य हैं? कितने देशों ने इसके लिए आवेदन किया है और आगे ब्रिक्स और कितना बड़ा हो सकता है? पाकिस्तान की तरफ से आवेदन किए जाने के बाद भी उसे अब तक इस गठबंधन में एंट्री क्यों नहीं मिली है? भारत के पास वह कौन सी ताकत है, जिसकी वजह से पाकिस्तान का सबसे बड़ा समर्थक चीन तक ब्रिक्स में उसकी पैरवी नहीं करता?&nbsp;<strong>आइये जानते हैं&#8230;</strong></em></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पहले जानें- ब्रिक्स में मौजूदा समय में कितने सदस्य?</strong></p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>अब जानें- अब तक कितने देश कर चुके ब्रिक्स के लिए आवेदन?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">ब्रिक्स की पूर्ण सदस्यता के लिए अब तक 30 से ज्यादा देशों ने औपचारिक रूप से आवेदन किया है या इसमें शामिल होने की इच्छा जताई है। मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया हालिया समय में इस गठबंध से जुड़ने वाले कुछ सदस्य हैं। वहीं, तुर्किये, अजरबैजान और पाकिस्तान जैसे कई देश ब्रिक्स के लिए आवेदन कर चुके हैं और सदस्यता पाने की कतार में हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या है ब्रिक्स में आवेदन का तरीका, कैसे जुड़ते हैं देश?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">ब्रिक्स में नए देशों के शामिल होने की प्रक्रिया पूरी तरह से सर्वसम्मति और पहले से निर्धारित मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>1. सर्वसम्मति का नियम</strong><br>ब्रिक्स का कोई भी फैसला बहुमत के बजाय सभी मौजूदा सदस्यों की सर्वसम्मति से लिया जाता है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई भी एक मौजूदा सदस्य देश किसी नए देश के आवेदन पर असहमति जताता है, तो वह देश संगठन में शामिल नहीं हो सकता।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>2. औपचारिक आवेदन और परामर्श जरूरी</strong><br>ब्रिक्स में शामिल होने के इच्छुक देश को ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहे देश और संगठन के सामने औपचारिक रूप से सदस्यता का आवेदन जमा करना होता है। इसके बाद ब्रिक्स विदेश मंत्रियों और नेताओं के शिखर सम्मेलनों में इस आवेदन पर चर्चा की जाती है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="678" height="452" src="https://sahetmahet.com/wp-content/uploads/2026/09/image-41.png" alt="" class="wp-image-21212" srcset="https://sahetmahet.com/wp-content/uploads/2026/09/image-41.png 678w, https://sahetmahet.com/wp-content/uploads/2026/09/image-41-300x200.png 300w" sizes="(max-width: 678px) 100vw, 678px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>3. मार्गदर्शक सिद्धांत और नियम</strong><br>2023 के जोहानेसबर्ग शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स नेताओं ने सदस्यता विस्तार के लिए औपचारिक मार्गदर्शक सिद्धांत, मानक और मानदंड स्वीकार किए थे। इसके तहत ब्रिक्स की सदस्यता के लिए आवेदन करने वाले देशों का&#8230;</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>सभी मौजूदा ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ सकारात्मक कूटनीतिक संबंध होना अनिवार्य है।</li>



<li>बहुपक्षवाद (मल्टीलेटरलिज्म) और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की प्रतिबद्धता दिखाना जरूरी है।</li>



<li>वैश्विक दक्षिण के विकास और बहुध्रुवीय व्यवस्था के सिद्धांतों का समर्थन करना भी जरूरी है।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>4. औपचारिक आमंत्रण&nbsp;</strong><br>जब सभी मौजूदा सदस्य देश सर्वसम्मति से किसी आवेदन को मंजूरी दे देते हैं, तो शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स नेताओं की ओर से उस देश को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने का आधिकारिक आमंत्रण दिया जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>5. साझेदार देशों का अलग वर्ग भी</strong><br>2024 के कजान शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स ने साझेदार देश (पार्टनर कंट्री) की एक नई श्रेणी शुरू की। इसके माध्यम से पूर्ण सदस्यता न पाने वाले देश भी ब्रिक्स की पहलों, सम्मेलनों और व्यापारिक व्यवस्थाओं से जुड़ सकते हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="738" height="414" src="https://sahetmahet.com/wp-content/uploads/2026/09/image-42.png" alt="" class="wp-image-21213" srcset="https://sahetmahet.com/wp-content/uploads/2026/09/image-42.png 738w, https://sahetmahet.com/wp-content/uploads/2026/09/image-42-300x168.png 300w, https://sahetmahet.com/wp-content/uploads/2026/09/image-42-390x220.png 390w" sizes="(max-width: 738px) 100vw, 738px" /></figure>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>ब्रिक्स में पाकिस्तान-तुर्किये की एंट्री क्यों नहीं?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">पाकिस्तान की तरफ से ब्रिक्स में शामिल होने के लिए साल 2023 में औपचारिक रूप से आवेदन किया गया था। इसके बावजूद उसे अब तक ब्रिक्स की सदस्यता नहीं मिल सकी है। ब्रिक्स में किसी भी देश के शामिल करने की सबसे बड़ी ताकत संस्थापकों को ही दी गई है, जिसमें भारत भी शामिल है। इसे वीटो शक्ति कहा जाता है, जिसके तहत संस्थापक किसी भी देश की एंट्री पर रोक लगा सकते हैं।&nbsp;</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>ब्रिक्स में नए सदस्यों के आने के लिए सभी संस्थापक और स्थायी सदस्यों की सहमति जरूरी है। तुर्किये-पाकिस्तान की स्थायी सदस्यता के आवेदन पर विचार न होने की एक यह बड़ी वजह है।</li>



<li>ब्रिक्स का नियम, जिसमें आवेदन करने वाले देश का सभी सदस्यों से अच्छा कूटनीतिक रिश्ता होना जरूरी है, पाकिस्तान के लिए मुश्किल पैदा करता है। कूटनीतिक स्तर पर आतंकवाद की वजह से वह दुनियाभर में घिर चुका है।</li>



<li>पाकिस्तान को सार्वजनिक तौर पर चीन का समर्थन हासिल है। बीते वर्षों में उसने रूस के साथ भी रिश्ते बढ़ाने की कोशिश की है। हालांकि, भारत के ब्रिक्स में सभी देशों के साथ गहरे रिश्ते हैं, जो पाकिस्तान पर भारी पड़ते हैं।</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>तो भारत से&nbsp;कूटनीतिक तालमेल न रखने वालों की ब्रिक्स में एंट्री नहीं?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">ब्रिक्स में आवेदन के बावजूद जिन देशों की सदस्यता को मंजूरी नहीं मिल पाई, उन्हें ब्रिक्स से जोड़ने के लिए कजान में हुए सम्मेलन में &#8216;ब्रिक्स पार्टनर कंट्री&#8217; यानी साझेदार देशों के तौर पर शामिल करने का नया आयाम जोड़ा गया था। पाकिस्तान और तुर्किये को इसी के चलते ब्रिक्स के साझेदार देश बनने का प्रस्ताव भी दिया गया। हालांकि दोनों ही देशों की तरफ से इस पर अब तक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसके अलावा अजरबैजान ने भी ब्रिक्स की पूर्ण सदस्यता के लिए आवेदन किया है। लेकिन न तो उसकी सदस्यता और न ही उसे साझेदार देश के तौर पर जुड़ने का प्रस्ताव भेजा गया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>पाकिस्तान ब्रिक्स से जुड़ने में दिलचस्पी क्यों ले रहा?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>1. ब्रिक्स से पाकिस्तान को मिल सकते हैं आर्थिक लाभ</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>पाकिस्तान काफी लंबे समय से गंभीर आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ब्रिक्स से जुड़कर वह अपने आर्थिक और वित्तीय विकल्पों को बढ़ाना और विविध करने की कोशिश में जुटा है। </li>



<li>पाकिस्तान पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक पर अपनी निर्भरता को कम करने की भी कोशिश कर रहा है और उसके बजाय ब्रिक्स जैसे संगठनों की वित्त व्यवस्था तक पहुंच हासिल करने की उम्मीद कर रहा है।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>2. ब्रिक्स विकासशील देशों से संपर्क साधने का जरिया</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>ब्रिक्स देश मौजूदा समय में दुनिया की 40% से ज्यादा आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और वैश्विक जीडीपी में लगभग 40% की हिस्सेदारी रखते हैं। यानी पाकिस्तान इससे जुड़कर 20 देशों से सीधा संपर्क रखने के साथ वैश्विक वित्त धारा में भी शामिल होने की राह देख रहा है।</li>



<li>इसके अलावा, ब्रिक्स देशों के पास वैश्विक तेल और खाद्य उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा है। इस समूह का हिस्सा बनने से पाकिस्तान को सदस्य देशों के साथ व्यापार, निवेश और नए भुगतान तंत्रों का फायदा मिल सकता है।</li>
</ul>
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		<title>&#8216;हम एक-दूसरे की खूबियों से सीख सकते हैं&#8217;, पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक में बोले चिनफिंग.</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Sep 2026 14:17:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[international]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
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		<category><![CDATA[head of the State Council. Li Qiang]]></category>
		<category><![CDATA[Li Qiang]]></category>
		<category><![CDATA[Modi Government]]></category>
		<category><![CDATA[News]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस दौरान चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने दोनों देशों के रिश्तों को रणनीतिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे की खूबियों से सीखकर साझा विकास की ओर बढ़ &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस दौरान चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने दोनों देशों के रिश्तों को रणनीतिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे की खूबियों से सीखकर साझा विकास की ओर बढ़ सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चीनी राष्ट्रपति चिनफिंग सात साल बाद शनिवार को भारत आए हैं। चिनफिंग ने पीएम मोदी से सीमा संबंधी मुद्दों, व्यापार और निवेश पर बातचीत की।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="640" height="359" src="https://sahetmahet.com/wp-content/uploads/2026/09/image-40.png" alt="" class="wp-image-21207" srcset="https://sahetmahet.com/wp-content/uploads/2026/09/image-40.png 640w, https://sahetmahet.com/wp-content/uploads/2026/09/image-40-300x168.png 300w, https://sahetmahet.com/wp-content/uploads/2026/09/image-40-390x220.png 390w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></figure>



<h2 class="wp-block-heading">एक बार फिर भारत में स्वागत</h2>



<p class="wp-block-paragraph">इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, &#8220;आपका हार्दिक स्वागत करते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आपकी सकारात्मक टिप्पणियों के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन से प्राप्त समर्थन और सहयोग के लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं। अब हमारे पास द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का अवसर है। एक बार फिर, भारत में आपका हार्दिक स्वागत है।&#8221;</p>



<h2 class="wp-block-heading">क्या बोले चिनफिंग?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">चीनी राष्ट्रपति चिनफिंग ने कहा कि उन्हें भारत आने का निमंत्रण उनके जन्मदिन 15 जून को मिला। हम पीएम मोदी से 21 बार मिल चुके हैं और कई महत्वपूर्ण समझौतों पर पहुंचे हैं, जिन्होंने चीन-भारत संबंधों को निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर किया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">एक दूसरे की खूबियों से सीख सखते हैं- चिनफिंग</h2>



<p class="wp-block-paragraph">चिनफिंग ने आगे कहा, &#8216;चीन ने हमेशा भारत के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखा और विकसित किया है। हालांकि, हमारे दोनों देशों की राष्ट्रीय परिस्थितियां भिन्न हैं, फिर भी हम एक-दूसरे की खूबियों से पूर्णतः सीख सकते हैं, एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं, साथ मिलकर सफलता प्राप्त कर सकते हैं और साझा विकास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।”</p>
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		<title>जी-7 समूह पर जमकर बरसे पुतिन: बोले- ब्रिक्स की आर्थिक ताकत उनसे कहीं ज्यादा, कैसे समझाया जीडीपी का आंकड़ा?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2026 14:04:19 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
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		<category><![CDATA[News]]></category>
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		<category><![CDATA[Vladimir Putin]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों के आर्थिक दबदबे को खुली चुनौती दी। जी-7 समूह पर तीखा प्रहार किया। पुतिन ने कहा कि वर्तमान में पूरी दुनिया गहरे संरचनात्मक और व्यापक बदलावों के दौर से गुजर रही है। उन्होंने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://sahetmahet.com/%e0%a4%9c%e0%a5%80-7-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b9-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a8/">जी-7 समूह पर जमकर बरसे पुतिन: बोले- ब्रिक्स की आर्थिक ताकत उनसे कहीं ज्यादा, कैसे समझाया जीडीपी का आंकड़ा?</a> appeared first on <a href="https://sahetmahet.com">Sahet Mahet</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों के आर्थिक दबदबे को खुली चुनौती दी। जी-7 समूह पर तीखा प्रहार किया। पुतिन ने कहा कि वर्तमान में पूरी दुनिया गहरे संरचनात्मक और व्यापक बदलावों के दौर से गुजर रही है। उन्होंने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि पश्चिमी देश निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा करने से बुरी तरह डरते हैं और इसी वजह से रूस पर मनमाने और गलत प्रतिबंध थोपे गए हैं। हालांकि इन प्रतिबंधों के बावजूद रूस न केवल आगे बढ़ा है, बल्कि ब्रिक्स देश आपसी सहयोग और मजबूत रिश्तों के दम पर वैश्विक चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर रहे हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>पुतिन ने जीडीपी और वैश्विक विकास का कौन सा गणित समझाया?</strong></h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ठोस तथ्यों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले पांच वर्षों में दुनिया की कुल जीडीपी का 40 प्रतिशत से अधिक उत्पादन अकेले ब्रिक्स देशों ने किया है।&nbsp;</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">इसके उलट तथाकथित जी-7 समूह का योगदान सिमटकर केवल 29 प्रतिशत रह गया है। पुतिन ने तंज कसते हुए कहा कि वे समझ नहीं पाते कि उसे जी-7 या ग्रेट-7 क्यों कहा जाता है, जबकि हकीकत इसके उलट है।&nbsp;</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>उन्होंने विश्व अर्थव्यवस्था के विकास का आंकड़ा समझाते हुए कहा कि समान अवधि में वैश्विक आर्थिक विकास की आधी से अधिक यानी 50 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि ब्रिक्स देशों की वजह से हुई है, जबकि जी-7 समूह का योगदान इसमें केवल 18 प्रतिशत रहा है।</li>



<li>पुतिन ने इस भारी अंतर की सीधी वजह बताते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की आधी से अधिक आबादी बसती है, जिससे उनके पास बेहद गतिशील, विशाल और जीवंत घरेलू बाजार मौजूद हैं।</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>भारत की तकनीकी प्रगति पर क्या बोले पुतिन?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">पुतिन ने भारत की तकनीकी प्रगति को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की आईटी कंपनियां बहुत तेज गति से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स देशों के बीच आज दुनिया का करीब 40 फीसदी व्यापार संचालित होता है। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि भरोसेमंद बिजनेस-टू-बिजनेस संबंध और मजबूत आर्थिक साझेदारियां ही अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। ये साझेदारियां दुनिया के सामने मौजूद संकटों को हल करने में मदद करती हैं। उन्होंने साफ किया कि रूस पूरी दुनिया में केवल विश्वसनीय और उम्मीदों पर पूरी तरह खरे उतरने वाले साझेदारों के साथ अपने संबंध लगातार मजबूत कर रहा है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>वो आंकड़े, जिस आधार पर पुतिन ने ब्रिक्स को बताया आगे</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph"><strong><em>वैश्विक जीडीपी हिस्सेदारी</em></strong><br>पिछले 5 वर्षों में ब्रिक्स देशों ने विश्व की 40% से अधिक जीडीपी बनाई, जबकि जी-7 का हिस्सा केवल 29% रहा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><em><strong>वैश्विक विकास दर में योगदान</strong></em><br>दुनिया की आर्थिक वृद्धि में ब्रिक्स की हिस्सेदारी 50% से अधिक रही, जबकि जी-7 केवल 18% का योगदान दे सका।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><em><strong>जनसंख्या और बाजार</strong></em><br>ब्रिक्स देशों के पास दुनिया की आधी से अधिक आबादी और अत्यंत जीवंत घरेलू बाजार मौजूद हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><em><strong>वैश्विक व्यापार</strong></em><br>वर्तमान में विश्व का लगभग 40 प्रतिशत व्यापार ब्रिक्स देशों के बीच हो रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong><em>भारतीय आईटी की भूमिका</em></strong><br>मंच से पुतिन ने भारत की आईटी कंपनियों की तेज विकास दर की जमकर सराहना की।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर पुतिन का क्या रुख?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जोर देकर कहा कि रूस पर्यटन, उद्योग और व्यापार के क्षेत्रों में दिलचस्प और आशाजनक पहलों के लिए पूरी तरह खुला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर वैश्विक ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने दुनिया भर में विश्वसनीय लॉजिस्टिक और परिवहन मार्ग तैयार करने पर विशेष बल दिया। पुतिन ने कहा कि रूस अपने सहयोगियों के साथ मिलकर आर्कटिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और &#8216;नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर&#8217; जैसे अहम और रणनीतिक व्यापारिक रास्तों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
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		<title>कौन है अमेरिकी मैथ्यू वान डाइक, जिस पर UAPA केस हटने से भारत में मचा सियासी घमासान, मामला क्या?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Sep 2026 13:56:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[international]]></category>
		<category><![CDATA[अपराध]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Big news]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>इस साल मार्च में कोलकाता एयरपोर्ट से पकड़े गए अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वान डाइक को लेकर भारत में छह महीने बाद राजनीति गरमा गई है। दरअसल, वान डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को 13 मार्च को गिरफ्तार किए जाने के बाद इनके खिलाफ देश की आतंक-रोधी एजेंसी- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जांच कर रही &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://sahetmahet.com/%e0%a4%95%e0%a5%8c%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%a5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%82-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8/">कौन है अमेरिकी मैथ्यू वान डाइक, जिस पर UAPA केस हटने से भारत में मचा सियासी घमासान, मामला क्या?</a> appeared first on <a href="https://sahetmahet.com">Sahet Mahet</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">इस साल मार्च में कोलकाता एयरपोर्ट से पकड़े गए अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वान डाइक को लेकर भारत में छह महीने बाद राजनीति गरमा गई है। दरअसल, वान डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को 13 मार्च को गिरफ्तार किए जाने के बाद इनके खिलाफ देश की आतंक-रोधी एजेंसी- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जांच कर रही थी। मंगलवार (8 सितंबर) को एनआईए ने विशेष अदालत के सामने मामले की पहली चार्जशीट दाखिल की। इसमें वान डाइक समेत सभी सात आरोपियों पर आव्रजन और अवैध गतिविधियों के मामलों में तो आरोप बरकरार रखे गए हैं, लेकिन आतंक-रोधी कानून यूएपीए की धाराएं हटा ली गई हैं, जो कि गिरफ्तारी के बाद जांच के दौरान लगाई गई थी। एनआईए के वान डाइक से यूएपीए की धाराएं हटाने को लेकर कांग्रेस से लेकर एआईएमआईएम तक ने अब केंद्र सरकार को घेरा है और उस पर अमेरिका के दबाव में होने का आरोप लगाया है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><em>ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर यह मैथ्यू एरॉन वान डाइक कौन है? उसे छह यूक्रेनी नागरिकों के साथ कब-क्यों गिरफ्तार किया गया? एनआईए ने उससे जुड़े मामले में शुरुआत में क्या आरोप तय किए थे? अब एनआईए की तरफ से जो चार्जशीट दाखिल की गई है, उसमें क्या कहा गया? इस चार्जशीट पर भारत की सियासत में सरगर्मियां कैसे तेज हो गईं?&nbsp;<strong>आइये जानते हैं&#8230;&nbsp;</strong></em></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1857.png" alt="" class="wp-image-20392"/></figure>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>पहले जानें- मैथ्यू एरॉन वान डाइक कौन हैं?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>1. अमेरिकी सेना के साथ युद्ध का अनुभव</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>2. गद्दाफी शासन के दौरान विद्रोही लड़ाकों में शामिल रहे</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>मैथ्यू वान डाइक 2011 के लीबिया गृहयुद्ध के दौरान मुअम्मर गद्दाफी के शासन के खिलाफ विद्रोही लड़ाकों में शामिल हुए थे। एक अमेरिकी नागरिक के लीबिया में इस तरह सैन्य शासन के खिलाफ खड़े होने के बाद वान डाइक की चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुरू हो गई थी।&nbsp;</li>



<li>मार्च 2011 में लीबिया की सेना ने ब्रेगा में उन्हें घात लगाकर बंदी बना लिया गया। उन्होंने गद्दाफी की जेलों में लगभग छह महीने कारावास में बिताए। हालांकि, गद्दाफी के मारे जाने के बाद वे &nbsp;अगस्त 2011 में जेल से भागने में सफल रहे।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>3. युद्ध क्षेत्र के खतरों के बीच डॉक्यूमेंट्री बनाई</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>लीबिया में अपने युद्ध और जेल के फुटेज के आधार पर वान डाइक ने पॉइंट एंड शूट नाम से डॉक्यूमेंट्री बनाई, इसने प्रतिष्ठित ट्रिबेका फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का अवॉर्ड जीता।</li>



<li>वान डाइक सीरिया में रूस समर्थिक राष्ट्रपति बशर अल-असद के खिलाफ गृहयुद्ध में भी कूदे। यहां उन्होंने नॉट एनीमोर: अ स्टोरी ऑफ रेवोल्यूशन डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन किया और साथी पत्रकार जेम्स फोली की हत्या के बाद बनी डॉक्यूमेंट्री जिम: दे जेम्स फोली स्टोरी (2016) में सिनेमैटोग्राफर के तौर पर में कार्य किया।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>4. सैन्य प्रशिक्षण के लिए बनाया मुखौटा संगठन</strong></p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>भारत में कैसे गिरफ्तार हो गए वान डाइक?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">मैथ्यू एरॉन वान डाइक की भारत में गिरफ्तारी एक जुबान फिसलने की घटना और इमिग्रेशन अधिकारियों की मुस्तैदी के चलते हुई थी।&nbsp;<em>दरअसल हुआ कुछ यूं&#8230;.</em></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>13 मार्च 2026 को वान डाइक भारत से एक दक्षिण एशियाई देश (नाम का खुलासा नहीं) की यात्रा करने के लिए कोलकाता हवाई अड्डे पर थे।&nbsp;</li>



<li>इमिग्रेशन काउंटर पर जब अधिकारी ने उनसे भारत में घूमने पर सवाल किया, तो वान डाइक की जुबान फिसल गई और उन्होंने मिजोरम जाने की बात कह दी।</li>



<li>बता दें कि भारत में पूर्वोत्तर के राज्यों में जाने के लिए विदेशी नागरिकों के पास प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (पीएपी) होना अनिवार्य रूप से जरूरी है।&nbsp;</li>



<li>जब इमिग्रेशन अधिकारी ने उनसे यह परमिट मांगा, तो वान डाइक इसे पेश नहीं कर सके। इसके बाद अधिकारी ने तुरंत उन्हें विस्तृत पूछताछ के लिए अलग बिठा दिया।</li>



<li>यहां पूछताछ में हुए खुलासों के बाद लखनऊ एयरपोर्ट से छह यूक्रेनी नागरिक पकड़े गए। बाद में सभी को गिरफ्तार किया गया और जांच एनआईए के पास चली गई।</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>वान डाइक ने ऐसा क्या खुलासा किया कि लग गया यूएपीए?</strong></h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>कोलकाता एयरपोर्ट पर आव्रजन अधिकारियों से पूछताछ में वान डाइक ने खुलासा किया वे और उनके कुछ साथी पर्यटक वीजा पर भारत आए और बिना परमिट के असम होते हुए मिजोरम गए। वहां से वे अवैध रूप से म्यांमार की सीमा में घुसे।&nbsp;</li>



<li>म्यांमार के विक्टोरिया कैंप पहुंचकर उन्होंने वहां के जनजातीय सशस्त्र समूहों, जैसे- कुकी-चिन आर्मी को ड्रोन युद्ध, संचालन, असेंबली और जैमिंग तकनीक का प्रशिक्षण दिया था। इसके अलावा यूरोप से भारत के रास्ते म्यांमार में ड्रोन की खेप भेजे जाने का भी खुलासा हुआ।</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading"><br><strong>जांच एजेंसियों ने वान डाइक का पूरा नेटवर्क कैसे पकड़ा?</strong></h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>वान डाइक के पकड़े जाने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उनके रिकॉर्ड्स और होटलों की सी-फॉर्म&#8217; प्रणाली की जांच की। इस सिस्टम पर विदेश से आने वाले पर्यटकों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जाती है।&nbsp;</li>



<li>विश्लेषण पर सामने आया कि वान डाइक के साथ छह यूक्रेनी नागरिक भी जुड़े थे। इनकी पहचान की गई और उन्हें देश से बाहर भागने से पहले ही लखनऊ, दिल्ली के हवाई अड्डों से गिरफ्तार कर लिया गया।</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>एनआईए ने उससे जुड़े मामले में शुरुआत में क्या आरोप तय किए थे?</strong></h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>मामले की शुरुआत में एनआईए ने वान डाइक और बाकी आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धारा 18 (आपराधिक साजिश के लिए सजा) और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।</li>



<li>जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया था कि आरोपी भारत-विरोधी प्रतिबंधित संगठनों से संपर्क में हैं और उन्हें ड्रोन तकनीक की तस्करी कर रहे हैं। साथ ही उन पर म्यांमार में सशस्त्र समूहों को युद्ध प्रशिक्षण देने की एक बड़ी आतंकवादी साजिश में शामिल होने के आरोप लगे।</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading"><br><strong>अब एनआईए की तरफ से दाखिल चार्जशीट में क्या आरोप तय?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">एनआईए ने 8 सितंबर को दिल्ली की विशेष अदालत में मैथ्यू एरॉन वान डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ औपचारिक चार्जशीट दाखिल की है। इसमें एजेंसी ने उन पर आव्रजन और विदेशी अधिनियम के तहत आरोप तय किए हैं। हालांकि, चार्जशीट में यूएपीए से जुड़ी धारा गायब है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>आरोपियों ने संरक्षित क्षेत्र मिजोरम में प्रवेश करने के लिए जरूरी प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (पीएपी) हासिल नहीं किए थे।</li>



<li>आरोपियों ने मिजोरम के जरिए अवैध रूप से म्यांमार की सीमा में प्रवेश किया और म्यांमार में जनजातीय सशस्त्र बलों को ट्रेनिंग दी।</li>



<li>प्रशिक्षण देने के बाद ये सभी मार्च 2026 में अनधिकृत रास्ते से अवैध रूप से वापस भारत की सीमा में दाखिल हुए।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">एनआईए के अधिकारियों के मुताबिक, वान डाइक मामले में चार्जशीट दाखिल करने की समयसीमा 8 सितंबर 2026 तक की ही थी। इसलिए मामले में शुरुआती जांच के बाद आव्रजन और विदेशी अधिनियम के तहत आरोपों वाली चार्जशीट दाखिल कर दी गई। इसके साथ ही यूएपीए की धाराओं में लगे आरोपों की जांच जारी है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">एनआईए का कहना है कि बीएनएस (आपराधिक केस) की धारा में जांच से यह पता चलेगा कि इन विदेशी नागरिकों की गतिविधियां भारत की एकता, अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा को खतरा पहुंचाने या आतंकवादी साजिश का हिस्सा थीं या नहीं। यानी एजेंसी ने यूएपीए लगाने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया है, हालांकि इसके लिए जांच पर जोर दिया है।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading"><br><strong>वान डाइक से यूएपीए हटने पर भारत में कैसे उठा सियासी तूफान?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मोदी सरकार और एनआईए पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या एनआईए ने पूरी और निष्पक्ष जांच के बाद यूएपीए के आरोप हटाए हैं या फिर मोदी सरकार ने अमेरिकी अधिकारियों के इशारे और दबाव में आकर तुरंत ऐसा किया है? विपक्षी दल ने सरकार से तीखा सवाल किया कि अमेरिकी नागरिक को दी गई इस कानूनी रियायत के बदले भारत सरकार अमेरिका से किस तरह के लाभ या सौदेबाजी की उम्मीद कर रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कांग्रेस ने इस पूरे मामले को कूटनीतिक दबाव और धौंस करार देते हुए आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के संवेदनशील मामले में ढील दे रही है।&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://sahetmahet.com/%e0%a4%95%e0%a5%8c%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%a5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%82-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8/">कौन है अमेरिकी मैथ्यू वान डाइक, जिस पर UAPA केस हटने से भारत में मचा सियासी घमासान, मामला क्या?</a> appeared first on <a href="https://sahetmahet.com">Sahet Mahet</a>.</p>
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		<title>आतंकी ट्रेनिंग मामला: NIA ने 1 अमेरिकी और 6 यूक्रेनियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट.</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Sep 2026 14:40:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[international]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने मंगलवार को सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। इनमें अमेरिकी नागरिक और भाड़े के सैनिक मैथ्यू एरन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। इन सभी पर म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों से संबंध रखने और भारत-विरोधी ताकतों को सैन्य &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://sahetmahet.com/%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a4%be-nia-%e0%a4%a8%e0%a5%87-1-%e0%a4%85/">आतंकी ट्रेनिंग मामला: NIA ने 1 अमेरिकी और 6 यूक्रेनियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट.</a> appeared first on <a href="https://sahetmahet.com">Sahet Mahet</a>.</p>
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<p class="wp-block-paragraph">नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने मंगलवार को सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इनमें अमेरिकी नागरिक और भाड़े के सैनिक मैथ्यू एरन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। इन सभी पर म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों से संबंध रखने और भारत-विरोधी ताकतों को सैन्य व ड्रोन ट्रेनिंग देने की साजिश का आरोप है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट में दर्ज हुआ मामला</h2>



<p class="wp-block-paragraph">इस मामले में शुरुआत में आतंकवाद-रोधी कानून गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जांच शुरू की गई थी, लेकिन स्पेशल जंज प्रशांत शर्मा के समक्ष दाखिल अंतिम चार्जशीट में NIA ने UAPA का इस्तेमाल नहीं किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके बजाय, आरोपियों पर इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट की धारा 21 और 23 के तहत भारत में अवैध प्रवेश, प्रतिबंधित क्षेत्रों में आवाजाही और वीजा नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1847.png" alt="" class="wp-image-20353"/></figure>



<h2 class="wp-block-heading">भारत से म्यांमार पहुंचे, ड्रोन की खेप पहुंचाई</h2>



<p class="wp-block-paragraph">NIA के अनुसार, यह समूह मार्च में भारत आया और वैध वीजा का इस्तेमाल कर संरक्षित क्षेत्र मिजोरम पहुंचा। वहां से ये अवैध रूप से सीमा पार कर म्यांमार में दाखिल हुए। म्यांमार में 2021 के तख्तापलट के बाद से सैन्य सरकार के खिलाफ लड़ रहे विद्रोही समूहों से इन्होंने संपर्क साधा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आरोप है कि इन्होंने यूरोप से भारत के रास्ते म्यांमार तक ड्रोन की एक बड़ी खेप पहुंचाई और विद्रोही संगठनों को ट्रेनिंग दी, जिनके तार भारत के पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी गुटों से भी जुड़े हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1848.png" alt="" class="wp-image-20354"/></figure>



<h2 class="wp-block-heading">ड्रोन हमले में शामिल होने का आरोप</h2>



<p class="wp-block-paragraph">एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि यह समूह म्यांमार में एक नागरिक विमान पर हुए ड्रोन हमले में भी शामिल था। इस साल की शुरुआत में मांडले जाने वाले एक यात्री विमान पर सुसाइड ड्रोन से हमला किया गया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">NIA ने अब म्यांमार में मौजूद इस नेटवर्क के मुख्य आतंकी मास्टरमाइंड से इनके संबंधों की गहराई से जांच कर रही है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">कौन है मुख्य आरोपी मैथ्यू एरन वैन डाइक?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">इस मामले में सबसे बड़ा नाम मैथ्यू एरन वैन डाइक का है, जिसे अमेरिका के डीप स्टेट का हिस्सा माना जाता है। वह सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल (SOLI) का संस्थापक है, जो एक नॉन-प्रॉफिट सिक्योरिटी फर्म है और तानाशाही सरकारों के खिलाफ लड़ने वाले समूहों को ट्रेनिंग देती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वैन डाइक इससे पहले लीबिया और सीरिया जैसे गंभीर संघर्ष क्षेत्रों में भी सक्रिय रह चुका है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">मार्च में हुई थी गिरफ्तारी</h2>



<p class="wp-block-paragraph">मार्च में वैन डाइक को कोलकाता एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया था, जबकि यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ एयरपोर्ट से पकड़ा गया था। गिरफ्तारी के करीब सात महीने बाद यह चार्जशीट दाखिल की गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दिल्ली कोर्ट ने इस पूरे मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 अक्टूबर की तारीख तय की है।</p>
<p>The post <a href="https://sahetmahet.com/%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a4%be-nia-%e0%a4%a8%e0%a5%87-1-%e0%a4%85/">आतंकी ट्रेनिंग मामला: NIA ने 1 अमेरिकी और 6 यूक्रेनियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट.</a> appeared first on <a href="https://sahetmahet.com">Sahet Mahet</a>.</p>
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		<title>पीएम मोदी के लिए बेल्जियम के प्रधानमंत्री ला रहे थे &#8216;इंडिया गेट&#8217;, जानें फिर क्या हुआ ?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 14:58:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[international]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
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		<category><![CDATA[Modi Government]]></category>
		<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारत और बेल्जियम के बीच रणनीतिक और ऐतिहासिक संबंधों को एक मीठा कूटनीतिक स्पर्श का प्रयास अधूरा रह गया। दरअसल&#160;बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक बेहतर खास तोहफा लेकर आ रहे थे पर वह भारत नहीं पहुंच पाया।&#160;बेल्जियम के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने बताया कि&#160;वे&#160;अपनी भारत यात्रा &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://sahetmahet.com/%e0%a4%aa%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%ae-%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%ae/">पीएम मोदी के लिए बेल्जियम के प्रधानमंत्री ला रहे थे &#8216;इंडिया गेट&#8217;, जानें फिर क्या हुआ ?</a> appeared first on <a href="https://sahetmahet.com">Sahet Mahet</a>.</p>
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<p class="wp-block-paragraph">भारत और बेल्जियम के बीच रणनीतिक और ऐतिहासिक संबंधों को एक मीठा कूटनीतिक स्पर्श का प्रयास अधूरा रह गया। दरअसल&nbsp;बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक बेहतर खास तोहफा लेकर आ रहे थे पर वह भारत नहीं पहुंच पाया।&nbsp;बेल्जियम के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने बताया कि&nbsp;वे&nbsp;अपनी भारत यात्रा के दौरान पीएम मोदी के लिए प्रसिद्ध बेल्जियन चॉकलेट से बना &#8216;इंडिया गेट&#8217; का एक भव्य मॉडल साथ ला रहे थे। हालांकि, लंबी दूरी की यात्रा नाजुक चॉकलेट सहन नहीं कर सकी।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1805.png" alt="" class="wp-image-20193"/></figure>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>सफर के दौरान बेल्जियम के प्रधानमंत्री के खास तोहफे के साथ क्या हुआ?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने पीएम मोदी के सामने&nbsp;खुद इस दिलचस्प लेकिन निराशाजनक घटना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वह प्रधानमंत्री मोदी को बेहतरीन बेल्जियन चॉकलेट से तैयार किया गया इंडिया गेट का मॉडल सौंपना चाहते थे। लेकिन भारत पहुंचने से पहले ही रास्ते के सफर में यह नाजुक तोहफा पूरी तरह खराब हो गया। प्रधानमंत्री डी वेवर ने चुटीले अंदाज में अपनी इस कूटनीतिक विफलता को स्वीकार करते हुए कहा, &#8220;चॉकलेट कूटनीति के लिए तो अच्छी है, लेकिन कूटनीतिक यात्रा के लिए उतनी अच्छी नहीं है।&#8221; उन्होंने यह भी बताया किया कि दिल्ली में स्थित असली इंडिया गेट तो लगभग एक सदी से शान से खड़ा है, लेकिन चॉकलेट से बना उसका यह छोटा मॉडल भारत तक का अपना सफर भी पूरा नहीं कर सका। हालांकि, उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है और बताया कि इसका एक दूसरा मॉडल बेल्जियम में सुरक्षित रखा है, जिसे वह जल्द ही सही-सलामत पीएम मोदी तक पहुंचाने का रास्ता निकालेंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>इस अनोखे उपहार के लिए इंडिया गेट के मॉडल को ही क्यों चुना गया था?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">चॉकलेट से बने इस उपहार के लिए इंडिया गेट के मॉडल का चयन कोई इत्तेफाक नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक बहुत ही गहरा राजनयिक और ऐतिहासिक संदेश छिपा था। प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के अनुसार, इंडिया गेट का यह मॉडल जानबूझकर चुना गया था क्योंकि यह सीधे तौर पर भारत और बेल्जियम के साझा इतिहास और भविष्य की मजबूत साझेदारी से जुड़ा हुआ है। यह मॉडल दोनों देशों के बीच के उन पुराने ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है, जिनकी नींव एक सदी पहले रखी गई थी।</p>
<p>The post <a href="https://sahetmahet.com/%e0%a4%aa%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%ae-%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%ae/">पीएम मोदी के लिए बेल्जियम के प्रधानमंत्री ला रहे थे &#8216;इंडिया गेट&#8217;, जानें फिर क्या हुआ ?</a> appeared first on <a href="https://sahetmahet.com">Sahet Mahet</a>.</p>
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		<title>&#8216;यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में भारत मदद के लिए तैयार&#8217;: कीव पहुंचे जयशंकर, बोले- बातचीत से निकलेगा समाधान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 14:53:49 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
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		<category><![CDATA[जयशंकर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। &#160;विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कीव में यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा से मुलाकात के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://sahetmahet.com/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a8-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87/">&#8216;यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में भारत मदद के लिए तैयार&#8217;: कीव पहुंचे जयशंकर, बोले- बातचीत से निकलेगा समाधान</a> appeared first on <a href="https://sahetmahet.com">Sahet Mahet</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। &nbsp;विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कीव में यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा से मुलाकात के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत, कूटनीति और समझौते के जरिए ही संभव है। जयशंकर ने संकेत दिया कि रूस और यूक्रेन दोनों की सहमति होने पर भारत शांति प्रयासों में सहयोग करने, यहां तक कि मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए भी तैयार है। दोनों नेताओं के बातचीत में काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा, भारत-यूक्रेन व्यापार, AI, डिजिटल तकनीक, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा हुई। यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया मुलाकात के बाद हो रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>‘नई दिल्ली अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार’</strong><br>यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के साथ बातचीत के दौरान जयशंकर ने भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि इस संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं निकल सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थायी और स्वीकार्य समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है। जयशंकर ने कहा कि अगर भारत किसी भी तरह से मदद कर सकता है, तो हम तैयार हैं। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि अगर रूस और यूक्रेन दोनों सहमत हों तो नई दिल्ली शांति प्रयासों में सहयोग करने और अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>‘यह संघर्ष सिर्फ आर्थिक दबाव से खत्म नहीं होगा’</strong><br>कीव में जयशंकर ने आगे कहा कि यह संघर्ष, जो आज अपने पांचवें साल में है, सिर्फ इसलिए हल नहीं होगा कि कोई तेल, एल्युमिना, खनिज, धातु या खाद खरीद रहा है या नहीं। यह संघर्ष बातचीत, कूटनीति और समझौते से ही हल होगा। इसीलिए हम इसे बढ़ावा देंगे। उन्होंने यह बात उस सवाल के जवाब में कही, जिसमें उनसे पूछा गया था कि अगर अमेरिका रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाता है तो क्या भारत रूसी तेल की खरीद कम करने की योजना बना रहा है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1804.png" alt="" class="wp-image-20189"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>भारत-यूक्रेन व्यापार में कई क्षेत्रों में सहयोग</strong><br>भारत-यूक्रेन व्यापार संबंधों के भविष्य की संभावनाओं पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा,&#8217;जहां तक हमारे आपसी सहयोग के भविष्य की संभावनाओं का सवाल है, हम अच्छी तरह जानते हैं कि यूक्रेन में बड़ी ताकत और क्षमताएं हैं। भारत भी तेजी से विकास कर रहा है।&#8217; प्रगति के कुछ प्रमुख क्षेत्र डिजिटल क्षमताएं, नवाचार और स्टार्टअप हैं। AI की दुनिया स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और यहां तक कि शासन के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा कर रही है। भारत और यूक्रेन इन बदलते घटनाक्रमों पर चर्चा करेंगे और भविष्य की साझेदारी के लिए खास क्षेत्रों पर भी बातचीत करेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>फार्मा से लेकर कृषि और मशीनरी तक फैला है व्यापार</strong><br>भारत-यूक्रेन व्यापार संबंधों पर जयशंकर ने कहा, &#8216;हमारा व्यापार कई क्षेत्रों में फैला हुआ है- फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य और कृषि तथा खाद से लेकर मशीनरी, रसायन और उपभोक्ता सामान तक। जाहिर है, पिछले चार वर्षों में युद्ध की स्थिति और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों के कारण इस व्यापार में कुछ रुकावटें आई हैं।&#8217; इसके बावजूद व्यापारिक संबंधों में मजबूती भी देखने को मिली है और कुछ नई संभावनाएं भी सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि आज की बातचीत में मौजूदा मुद्दों के साथ-साथ भविष्य की संभावनाओं पर भी चर्चा और ध्यान केंद्रित किया जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शिक्षा भी भारत-यूक्रेन सहयोग का अहम हिस्सा</strong><br>मैं यह भी बताना चाहता हूं कि शिक्षा लंबे समय से हमारे सहयोग का एक अहम क्षेत्र रहा है। अभी कई भारतीय छात्र यूक्रेन में पढ़ाई कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने यूक्रेन के विदेश मंत्री के माध्यम से उन अधिकारियों का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने युद्ध के दौरान भारतीय छात्रों का ध्यान रखा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>‘यह दौर युद्ध का नहीं है’</strong><br>विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, &#8216;सबसे पहले मैं युद्ध के मुद्दे पर बात करना चाहूंगा, जो दुर्भाग्य से अब अपने पांचवें साल में है। भारत का हमेशा से यही मानना रहा है कि यह दौर युद्ध का नहीं है और समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेंगे।&#8217; सिर्फ दो दिन पहले बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि अंतहीन युद्ध की जगह अब युद्ध की समाप्ति होनी चाहिए। संघर्ष का हर बीतता दिन और ज्यादा मौतें और तबाही ही लाता है। जाहिर है, इसका रास्ता संबंधित पक्षों को ही खोजना होगा। लेकिन अगर भारत किसी भी तरह से मदद कर सकता है, तो हम तैयार हैं।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>काला सागर में जहाजों की सुरक्षा पर भी हुई चर्चा</strong><br>दोनों विदेश मंत्रियों ने काला सागर में सुरक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रमों पर भी विस्तार से चर्चा की। इस दौरान वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हालिया हमलों का मुद्दा भी बातचीत में शामिल रहा।<br>भारत के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि अतीत में ऐसी घटनाओं में भारतीय नाविक भी प्रभावित हुए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>3 से 5 सितंबर तक चलेगा जयशंकर का दौरा</strong><br>जयशंकर का तीन दिवसीय राजनयिक दौरा 3 से 5 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान वह यूक्रेन और पोलैंड की यात्रा करेंगे। दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना तथा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम घटनाक्रमों पर चर्चा करना है।</p>
<p>The post <a href="https://sahetmahet.com/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a8-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87/">&#8216;यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में भारत मदद के लिए तैयार&#8217;: कीव पहुंचे जयशंकर, बोले- बातचीत से निकलेगा समाधान</a> appeared first on <a href="https://sahetmahet.com">Sahet Mahet</a>.</p>
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		<title>ईरान ने भारत से लगाई युद्ध खत्म कराने की गुहार, राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने पीएम मोदी से की अपील.</title>
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		<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 14:17:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान&#160;ने भारत से पश्चिम एशिया में शांति और सुरक्षा कायम करने के लिए अपनी कूटनीतिक ताकत का इस्तेमाल करने की अपील की है। ईरानी मीडिया एजेंसी तस्नीम न्यूज के मुताबकि पेजेश्कियान&#160;ने कहा कि भारत अपने&#160;संपर्कों का इस्तेमाल संबंधित पक्षों को युद्ध और खूनखराबे से दूर करने तथा बातचीत और समझौते की &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://sahetmahet.com/%e0%a4%88%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7/">ईरान ने भारत से लगाई युद्ध खत्म कराने की गुहार, राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने पीएम मोदी से की अपील.</a> appeared first on <a href="https://sahetmahet.com">Sahet Mahet</a>.</p>
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<p class="wp-block-paragraph">ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान&nbsp;ने भारत से पश्चिम एशिया में शांति और सुरक्षा कायम करने के लिए अपनी कूटनीतिक ताकत का इस्तेमाल करने की अपील की है। ईरानी मीडिया एजेंसी तस्नीम न्यूज के मुताबकि पेजेश्कियान&nbsp;ने कहा कि भारत अपने&nbsp;संपर्कों का इस्तेमाल संबंधित पक्षों को युद्ध और खूनखराबे से दूर करने तथा बातचीत और समझौते की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए कर सकता है। साथ ही यह भी कहा कि ईरान ने कभी युद्ध का स्वागत नहीं किया। लगातार संघर्ष से न ईरान को फायदा है, न पूरे क्षेत्र को और न ही मानवता को। उन्होंने यह बात किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन और शंघाई प्लस शिखर बैठकों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में कही।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>भारत से पेजेश्कियान&nbsp;ने आखिर क्या मदद मांगी?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">पेजेश्कियान&nbsp;ने भारत की क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिति को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत के कई पक्षों के साथ संपर्क हैं और ईरान के साथ उसके पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भी हैं। इसलिए भारत इन संपर्कों का इस्तेमाल संबंधित पक्षों को युद्ध और खूनखराबे से दूर करने तथा बातचीत और समझौते की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए कर सकता है। उनका कहना था कि क्षेत्र और दुनिया के समझदार लोगों की प्राथमिकता शांति, सुरक्षा और स्थिरता होनी चाहिए।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1775.png" alt="" class="wp-image-20059"/></figure>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या ईरान युद्ध से बचने के लिए बातचीत पर जोर दे रहा है?</strong></h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>पेजेश्कियान&nbsp;ने कहा कि उनकी सरकार की शुरुआत से ही ईरान की नीति शांति और स्थिरता कायम करने तथा विवादों को बातचीत और वार्ता के जरिए सुलझाने की रही है।</li>
</ul>



<ul class="wp-block-list">
<li>उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने कूटनीतिक रास्ते के बजाय युद्ध, असुरक्षा और ताकत के जरिए अपनी इच्छा थोपने का रास्ता चुना।&nbsp;</li>



<li>पेजेश्कियान&nbsp;ने कहा कि ईरान अपने लोगों को खतरे और असुरक्षा से बचाना चाहता है और इसके लिए शांति तथा सुरक्षा का माहौल जरूरी है।</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या पेजेश्कियान&nbsp;ने अमेरिका पर समझौते की शर्तें नहीं निभाने का आरोप लगाया?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">पेजेश्कियान&nbsp;ने कहा कि ईरान ने लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए हुए समझौतों के तहत अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी की हैं, लेकिन उनके मुताबिक अमेरिका ने अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कीं। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि तेहरान अभी भी समझौते और आपसी समझ की कोशिश जारी रखे हुए है। उन्होंने तर्क दिया कि तर्क और समझदारी यही कहती है कि युद्ध और युद्ध की राजनीति से बचना चाहिए। उनके मुताबिक कुछ समूह ऐसे हैं, जिन्हें संघर्ष जारी रहने में अपना हित दिखाई देता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या पीएम मोदी भी पेजेश्कियान&nbsp;की शांति वाली बात से सहमत दिखे?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेजेश्कियान&nbsp;से मुलाकात पर संतोष जताया और कहा कि मुश्किल दौर के दौरान भी भारत ने ईरान के साथ अपने संपर्क और सहयोग को बनाए रखने की कोशिश की।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">पीएम मोदी ने पेजेश्कियान&nbsp;के शांति और सुरक्षा से जुड़े विचारों तथा उनके अनुभव का जिक्र करते हुए उन्हें शांति पसंद नेता बताया।&nbsp;<br>उन्होंने कहा कि पेजेश्कियान&nbsp;शांति कायम करने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं और उनकी कोशिशों से सकारात्मक परिणाम आने की उम्मीद है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><em>पीएम मोदी ने पेजेश्कियान&nbsp;की उस बात से भी सहमति जताई कि कुछ समूहों को युद्ध जारी रहने में अपना हित दिखाई देता है। उन्होंने क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों को तेज करने की जरूरत बताई। दोनों नेताओं&nbsp;ने शांति और सुरक्षा को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास जारी रखने पर जोर दिया।</em></h2>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>भारत-ईरान के बीच किन मुद्दों पर हुई चर्चा?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">पीएम मोदी और पेजेश्कियान&nbsp;ने केवल पश्चिम एशिया की स्थिति पर ही चर्चा नहीं की, बल्कि दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़े कई मुद्दों पर भी बात की।&nbsp;<br>इनमें परिवहन और समुद्री सहयोग शामिल रहा। दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम और चाबहार बंदरगाह में सहयोग पर भी चर्चा की।&nbsp;<br>दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए मौजूदा क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या भारत और ईरान के रिश्ते और मजबूत होने की संभावना है?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">पेजेश्कियान&nbsp;ने भारत और ईरान के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने प्रतिबंधों के असर को कम करने की कोशिशों और आपसी सहयोग को बढ़ाने की जरूरत बताई। पेजेश्कियान&nbsp;के मुताबिक अमेरिका और इस्राइली शासन की ओर से ईरान के दूसरे देशों के साथ सहयोग को सीमित करने की कोशिशों के बावजूद तेहरान भारत के साथ विभिन्न क्षेत्रों में रिश्ते बढ़ाने के लिए तैयार है।</p>
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