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	<title>छतरपुर Archives - Sahet Mahet</title>
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	<title>छतरपुर Archives - Sahet Mahet</title>
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		<title>महोबा मे 174 बीघा वनभूमि पर फर्जी किसानों ने कराया प्रधानमंत्री फसल बीमा…</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Sep 2025 06:01:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>फसल बीमा के घोटाले पर मंगलवार को लिखी खबर नीचे लिंक मे पढ़ें- https://soochanasansar.in/in-mahoba-the-crooks-gobbled-up-the-crop-insurance-scheme-got-government-forest-land-rivers-streams-and-even-mountains-insured/ @आशीष सागर दीक्षित, बाँदा। बांदा/महोबा। बुंदेलखंड के ज़िला महोबा मे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://sahetmahet.com/fake-farmers-got-prime-ministers-crop-insurance-done-on-174-bigha-forest-land-in-mahoba/">महोबा मे 174 बीघा वनभूमि पर फर्जी किसानों ने कराया प्रधानमंत्री फसल बीमा…</a> appeared first on <a href="https://sahetmahet.com">Sahet Mahet</a>.</p>
]]></description>
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<p><strong>फसल बीमा के घोटाले पर मंगलवार को लिखी खबर नीचे लिंक मे पढ़ें- </strong></p>



<p><a href="https://soochanasansar.in/in-mahoba-the-crooks-gobbled-up-the-crop-insurance-scheme-got-government-forest-land-rivers-streams-and-even-mountains-insured/">https://soochanasansar.in/in-mahoba-the-crooks-gobbled-up-the-crop-insurance-scheme-got-government-forest-land-rivers-streams-and-even-mountains-insured/</a></p>



<p>@<strong>आशीष सागर दीक्षित, बाँदा।</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत महोबा मे बांदा और आसपास के रहवासियों ने जंगल विभाग की बेशकीमती वनभूमि पर कूटरचित दस्तावेज लगाकर फसल बीमा क्लेम किया है।</li>



<li>बीमा कंपनी इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस प्राइवेट लिमिटेड के जिला बीमा प्रबंधक निखिल चतुर्वेदी समेत 26 लोगो पर एफआईआर दर्ज है।</li>



<li>करीब 10 लोगों की गिरफ्तारी हुई है लेकिन मुख्य अभियुक्त निखिल चतुर्वेदी अभी तक फरार है।</li>



<li>फर्जी किसानों ने वनविभाग की 174 बीघा जमीन को निजी भूमि दर्शाकर फसल बीमा कराया है।</li>



<li>करीब 48 करोड़ के इस घोटाले पर डीएम गजल भारद्वाज के आदेश से तहसील स्तर की जांच आख्या के बाद कार्यवाही सम्भव हो सकी। लेकिन 2023 के घोटालों की जांच अटकी पड़ी है।</li>



<li>कौन है जो ज़िला बीमा प्रबंधक निखिल चतुर्वेदी को संरक्षण दिये है ? क्या किसानों की फसल बीमा भी अब भ्रस्टाचार की मांद मे दम तोड़ देगी।</li>
</ul>



<p><strong>बांदा/महोबा</strong>। बुंदेलखंड के ज़िला महोबा मे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत हैरतअंगेज कारनामों का खुलासा डीएम के द्वारा गठित जांच कमेटी के बाद हुआ है। <strong>वहीं किसान नेता ग्राम जुझार निवासी गुलाब सिंह राजपूत का आमरण अनशन इस खुलासे के बड़े कारणों मे से एक है।</strong> महोबा मे बाँदा के रहने वाले शातिरों ने महोबा मे फसल बीमा फर्जी किसान बनकर कराया है। क्लेम का दावा भी कर दिया है। स्थानीय किसानों ने जब इसके परतें खोलना शुरू की तो अदभुत भ्रस्टाचार सामने आया है। उत्तरप्रदेश सरकार/केंद्र सरकार की लगभग हर विकास व किसान राहत योजनाओं को बंदरबांट करने वालों ने अन्नदाताओं की फसल बीमा तक को नही बख्शा है। डीएम गजल भारद्वाज के कानों तक आवाज पहुंची तो उन्होंने जांच शुरू करा दी। जिसके बाद भ्रस्टाचार का जिन्न सनसनी बनकर बाहर आ गया। अब तक 6 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई है। करीब 10 गिरफ्तारी हुई है। किंतु मुख्य अभियुक्त बीमा कंपनी इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस प्राइवेट लिमिटेड का जिला प्रबंधक निखिल चतुर्वेदी पुलिस के शिकंजे से बाहर है। </p>



<p><img decoding="async" class="wp-image-16594" style="width: 1400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20250917_104154.jpg" alt=""></p>



<p><strong>चित्रकूट मंडल</strong> और झांसी मंडल के 7 ज़िलों वाला यूपी बुंदेलखंड किसानों की दैवीय आपदा के केंद्रबिंदु रहता है। जलवायु परिवर्तन व नदियों मे बड़े बांध से बाढ़ की त्रासदी,सूखे की तपिश, कर्जखोरी मे किसान आत्महत्या यहां सामान्य चलन है। लेकिन सरकारें इन्हें रोकने के लिए किसानों को सिंचाई, बीज उत्पाद हेतु एफपीओ योजना, क्लस्टर मे किसान क्लब, जैवकीय खेती को बढ़ावा के साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना संचालन कर रही है है। बावजूद इसके प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से सहकारी समिति तक खाद वितरण प्रक्रिया मे व्यापक वित्तीय भ्रस्टाचार हो रहा है। हर ज़िले मे किसानों का खाद को लेकर आंदोलन है। इसके दरम्यान महोबा का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का सूरतेहाल भी दुर्दिनता का शिकार है।</p>



<p><img decoding="async" class="wp-image-16596" style="width: 400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20250917_104216.jpg" alt=""></p>



<p><strong>जंगल विभाग की 174 बीघा जमीन पर फसल बीमा का फर्जीवाड़ा-</strong></p>



<p><img decoding="async" class="wp-image-16567" style="width: 1400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/b738c1b1efb2b9b1ec42d0bd18fe1f381757646347496898_original.webp" alt=""></p>



<p>महोबा मे कुलपहाड़ और करहारा डांग व खौनरिया मे जंगल विभाग की जमीन पर फर्जी किसानों ने फसल बीमा कराया है। खेती की नही और फसल बीमा का क्लेम भी किया है। गौरतलब है कि सूचना संसार के हाथ लगे दस्तावेज बतलाते है की कुलपहाड़ बीट रेंज के मलखान सिंह ने बताया कि यहां फर्जी किसानों ने वनभूमि को अपना दिखाकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लिया है। उन्होंने बताया कि वनभूमि के गाटा संख्या 157,158,160,174 पर देवकरण, अनिल कुमार, कमलेश निवासी जैतपुर पर फर्जी तरीके से अपनी ज़मीन बतलाकर फसल बीमा क्लेम के लिए करने का दावा किया है। अर्थात इन्होंने जंगल भूमि,पहाड़ तक डकार लिए है। वहीं करहारा डांग व खौनरिया मे सगुन पुत्री मोहन ने 1.2539 हेक्टेयर ज़मीन, देवेंद्र पुत्र रामसिंह ने 1.7765 हेक्टेयर ज़मीन, रामकुमारी पत्नी लक्ष्मण ने 4 बार 1.851 हेक्टेयर, निकिता पत्नी सूरज ने 1.2831 हेक्टेयर ज़मीन, प्रदीप पुत्र गोपाल ने 0.251 हेक्टेयर ज़मीन, शिवनाथ पुत्र बारेलाल ने 5.652 हेक्टेयर, मद्रेश पुत्र पन्नालाल ने 5.652 हेक्टेयर, रचना पत्नी धर्मेंद्र ने 5.733 हेक्टेयर ज़मीन, मीनू यादव पुत्र राजेश ने 3.4538 हेक्टेयर, संगीता पत्नी परम ने 1.214 हेक्टेयर, गुरूदयाल पुत्र रामपाल ने 1.214 हेक्टेयर वनभूमि अर्थात 29.7419 हेक्टेयर जंगल ज़मीन पर फर्जी कागजात लगाकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से लाभ लेने की जालसाजी की है। जिस पर एफआईआर लिखी गई है। महोबा को इस प्रधानमंत्री फसल बीमा के व्यापक घोटालों के लिए साल 2025 मे याद किया जाता रहेगा। लेकिन मुख्य आरोपी निखिल चतुर्वेदी को स्थानीय नेताओं या सरकार किसने संरक्षण दिया है यह काबिलेगौर बात है। गरीब और मेहनतकश किसानों की किस्मत को लूटने वाले यह अपराधी क्षमा योग्य नही है। इन पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।</p>
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			</item>
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		<title>हाईकोर्ट ने दिया एसपी बाँदा को निर्देश कानून सम्मत करें जांच,दुष्कर्म पीड़िता ने दिया प्रार्थना पत्र….</title>
		<link>https://sahetmahet.com/the-high-court-directed-sp-banda-to-conduct-the-investigation-as-per-law-the-rape-victim-submitted-an-application/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Sep 2025 06:19:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>रिपोर्ट : आशीष सागर,बांदा बाँदा। चित्रकूट मंडल के बाँदा मे एक राजाभैया यादव किस तर्ज पर पूरी कानून व्यवस्था को कमरबंद बनाकर बैठा है। इसकी बानगी है अतर्रा थाने का&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://sahetmahet.com/the-high-court-directed-sp-banda-to-conduct-the-investigation-as-per-law-the-rape-victim-submitted-an-application/">हाईकोर्ट ने दिया एसपी बाँदा को निर्देश कानून सम्मत करें जांच,दुष्कर्म पीड़िता ने दिया प्रार्थना पत्र….</a> appeared first on <a href="https://sahetmahet.com">Sahet Mahet</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>रिपोर्ट : आशीष सागर,बांदा</strong></p>



<p><img decoding="async" class="wp-image-16546" style="width: 400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20250913_084612.jpg" alt=""></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>हाईकोर्ट के निर्देश पर एसपी बाँदा से मिली पीड़िता, हाईकोर्ट ने कहा हम अपेक्षा करतें है वह कानून सम्मत निष्पक्ष जांच करेंगे।</li>



<li>उच्च न्यायालय ने याचिका संख्या 14046/2025 मे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 1973 व 2023 के अनुरुप जांच का आदेश दिया है।</li>



<li>बांदा के थाना अतर्रा मे गत दिसंबर माह मे दर्ज हुआ था मुकदमा अपराध संख्या 0314/2024 आईपीसी की धारा अंतर्गत 376, 504, 506,120 बी एवं 3 (2)5 एससी/एसटी ।</li>



<li>मुख्य मुल्जिम है राजाभैया यादव (संचालक विद्याधाम समिति,अतर्रा),मुबीना खान (संयोजिका चिंगारी संगठन),शिवकुमार गर्ग उर्फ नन्ना।</li>



<li>इस मुकदमे की विगत 8 माह से विवेचना सीओ अतर्रा प्रवीण कुमार यादव के पास लंबित है। अभी तक इस केस मे किसी की गिरफ्तारी नही हुई है।</li>



<li>उक्त दलित पीड़िता के एक अन्य मुकदमे अपराध संख्या 043/2025 थाना अतर्रा मे 21 लोगों को 1100 पेज की चार्जशीट से बाहर कर चुकें है सीओ अतर्रा प्रवीण यादव। केवल राजाभैया को अभियुक्त बनाया है। जिसमे वे फरवरी माह से जून तक ज़िला कारागार बांदा मे थे। ज़िला सत्र न्यायालय एवं विशेष न्यायालय एससी/एसटी कोर्ट से जमानत खारिज होने पर माननीय हाईकोर्ट से जमानत हुई थी।</li>



<li>राजाभैया यादव अपने जेल जाने वाले मुकदमे 043/2025 की चार्जशीट को हाईकोर्ट मे चैलेंज किये है। अगली तारीख 15 सितंबर 2025 है। जाहिर है जब 1100 पेज की लचर चार्जशीट मे 21 लोगों को बाहर किया गया हो तब इतना कदम उठाना तो बनता ही है।</li>



<li>पीड़िता ने उक्त दोनों मुकदमों की पारदर्शी विवेचना और न्यायसंगत कार्यवाही को अब तक एक दर्जन पत्राचार किये है। एक साल से अतर्रा मे डटे सीओ प्रवीण यादव को बदलने का अनुरोध आला अफसरों तक किया। खुद 14 दिन भूख हड़ताल की, विधानसभा लखनऊ पहुंची थी।</li>



<li>बेबसी मे मुकदमा संख्या 043/25 मे राजाभैया यादव की गिरफ्तारी करने वाला थाना अतर्रा आज भी उनका हमदर्द है। पिछले 8 माह से अपराध संख्या 0314/2024 मे जांच कार्यवाही मुनासिब नही हो सकी है।</li>



<li>अपने एनजीओ के आधार पर देशी-विदेशी एजेंसियों से करोड़ों रुपयों की फंडिंग छल-प्रपंच के द्वारा हासिल करने वाले राजाभैया यादव सोशल मीडिया मे अपनी हीरोपंती के चलते पीड़िता पर मानसिक दबाव व समाज को गुमराह करने का स्टंट करते रहते है।</li>



<li>मुल्जिम राजाभैया यादव खांटी अवसरवादी व्यक्ति है। स्त्री उनके लिए भोग्या है। इस मुल्जिम पर कुलजमा अब तक कुल 11 आपराधिक मुकदमे अतर्रा, नरैनी, कोतवाली नगर मे दर्ज है। वहीं यह अपने चिंगारी संगठन की गिरोहबंदी से 11 बेकसूरों को झूठे मुकदमों मे फंसाकर हरिजन एक्ट का रुपया समाज कल्याण से लेने का काम कर चुका है। ज्यादातर गिरोह के सदस्य हरिजन और गैर-पढ़ेलिखे मुस्लिम ग्रामीण है। गौरतलब है मुकदमा अपराध संख्या 0424/2022 थाना नगर कोतवाली के जजमेंट मे 9 पेजों पर विशेष न्यायालय बाँदा ने राजाभैया का पूरा पर्दाफाश जरिये वादी मुकदमा किया है। लेकिन अदने मुकदमों पर हिस्ट्रीशीटर बन जाने वाले अपराधियों पर राजाभैया भारी है। क्योंकि धनवर्षा से कलयुग मे सबकुछ खरीदा जा सकता है।</li>
</ul>



<p><strong>बाँदा</strong>। चित्रकूट मंडल के बाँदा मे एक राजाभैया यादव किस तर्ज पर पूरी कानून व्यवस्था को कमरबंद बनाकर बैठा है। इसकी बानगी है अतर्रा थाने का मुकदमा अपराध संख्या 0314/2024 आईपीसी की धारा अंतर्गत 376, 504, 506, 120-बी व 3(2)5 एससी/एसटी एक्ट। सर्वोच्च न्यायालय और हाईकोर्ट के दिशानिर्देश एवं विशाखा गाइडलाइंस को ताक पर रखकर अतर्रा थाने के सीओ प्रवीण कुमार यादव द्वारा इस मुकदमा को फ़ाइल गार्ड मे रख लिया गया है। </p>



<p><img decoding="async" class="wp-image-16548" style="width: 422px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20250913_115157.jpg" alt=""></p>



<p>मुकदमें मे वादीया ग्राम बगदरी थाना मानिकपुर ज़िला चित्रकूट की मूल निवासी हरिजन महिला है। यह सितंबर 2022 तक राजाभैया यादव की संस्था विद्याधाम समिति / चिंगारी संगठन मे बतौर सामुदायिक कार्यकर्ता काम करती थी। इस दरम्यान राजाभैया यादव हरिजन महिला को हथियार बनाकर दुसरों पर फर्जी मुकदमे लिखवाता था। बदले में सरकार से आर्थिक सहायता स्वरूप समाजकल्याण से रकम मिलती थी। गौरतलब है कि मुकदमा अपराध संख्या 0424/2022 थाना नगर कोतवाली मे भी राजाभैया ने कुल रकम 1.50 लाख रुपया से 75 हजार कथित पीड़िता से ले लिए थे। वहीं ऐसे कुल 11 झूठे मुकदमे राजाभैया यादव ने अपनी एनजीओ विद्याधाम समिति व चिंगारी के जरिये कराए है। इसकी संस्था चिंगारी औजार ज्यादातर गांव की कम पढ़ीलिखी दलित व मुस्लिम महिलाओं का कुनबा होता था। या फिर जो पति छोड़कर, तलाक देकर, गरीबी मे अकेले या पेशेवर जैसा समाज कर्म करती है। सूचना संसार के पास ऐसे 11 मुकदमों की संख्या है जो राजाभैया के शिकार हुए है लेकिन खौफ मे चुप है।</p>



<p><img decoding="async" class="wp-image-16549" style="width: 400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1755926233235.jpg" alt=""></p>



<p><strong><em>अपराध संख्या 314/24 मे जांच नही कर रहे अतर्रा सीओ</em>….</strong></p>



<p><br>माननीय हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने क्रिमिनल रिट प्रिटीशन संख्या 14046/2025 मे पीड़िता के पक्ष को सुनकर एसपी बाँदा को कानून सम्मत / भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 1973 व 2023 के अंतर्गत जांच करने का आदेश दिया है। वहीं पीड़िता को आदेश की प्रति के साथ एसपी बांदा को प्रार्थना पत्र देकर निवेदन करने की बात कही है। उल्लेखनीय है कि बीते दिसंबर माह मे थाना अतर्रा में मुकदमा संख्या 0314/2024 धारा 376,504,506,120 बी व 3(2)5 एससी.एसटी मे केस लिखा गया था। किंतु मुकदमा लिखने से खबर लिखने तक सीओ अतर्रा प्रवीण यादव ने मुख्य अभियुक्त राजाभैया, मुबीना खान, शिवकुमार गर्ग उर्फ नन्ना को गिरफ्तार तो छोड़िए हाथ तक नही लगाया है। वहीं एक अन्य मुकदमा 043/2025 मे दलित महिला के अपहरण, गैंगरेप, जान से मारने के प्रयास पर नामजद 22 मे से 21 लोगो को 1100 पेज की चार्जशीट से बाहर कर दिया है। राजाभैया ने इस लचर चार्जशीट का फायदा उठाकर हाईकोर्ट मे रिट दाखिल की है।</p>



<p><img decoding="async" class="wp-image-16550" style="width: 400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1757340333833.jpg" alt=""></p>



<p> अगली 15 सितंबर को इसकी सुनवाई होगी। वहीं मुकदमा अपराध संख्या 0315/24 वादी मुकदमा की मानें तो आज तक धारा 354 की आख्या अतर्रा कोर्ट नही पहुंची है। दलित पीड़िता मीडिया से कहती है आईओ / विवेचक सीओ अतर्रा सहोदर भाई की तरह सजातीय मुल्जिम राजाभैया यादव के साथ खड़े है। तब जबकिं इससे पूर्व भी 2016 मे ग्राम अनथुआ की विश्वकर्मा परिवार की लड़कीं जो राजाभैया के एनजीओ मे काम करती थी। उसने मुकदमा संख्या 037/2016 थाना अतर्रा में दुष्कर्म व आईटी एक्ट मे लिखाया था। वह केस भी तत्कालीन सपा सरकार के वफादार आईओ राकेश पांडेय की कृपा से 354 मे तरतीम कर दी गई थी। पीड़िता का कहना है उसके साथ ईश्वर और न्यायपालिका है जबकि राजाभैया के साथ रुपया, प्रशासन है। देखना होगा सत्य किस करवट बैठता है। फिलहाल राजाभैया बांद विशेष न्यायालय एससी,एसटी मे कभी स्वास्थ्य तो कभी बाहर रहने की दुहाई देकर चार्ज से बच रहें है। उन्हें हाईकोर्ट के निर्णय तक यह करते रहना ज़रूरत भी है।</p>
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		<title>बेलगाम जुबान और बिगड़ी राजनीतिक समझ का उदाहरण है जीतू पटवारी का विवादित बयान&#8230;</title>
		<link>https://sahetmahet.com/jeetu-patwaris-controversial-statement-is-an-example-of-unbridled-tongue-and-poor-political-understanding/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 06:41:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>@विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार भी अपने कार्यों या किसी सकारात्मक पहल के&#8230; </p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>@<em><strong>विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन</strong></em></p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong><em>आखिर कब लगेगी पटवारी के बेलगाम जुबान को लगाम</em> । </strong></li>
</ul>



<p><br><strong>भोपाल</strong>। मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार भी अपने कार्यों या किसी सकारात्मक पहल के कारण नहीं, बल्कि अपने ही मुख से निकले बिगड़े स्वर के कारण। राजनीति में नेताओं की जुबान ही उनकी सबसे बड़ी ताकत होती है, किंतु यही जुबान यदि बेलगाम हो जाए तो यह न केवल व्यक्ति की छवि पर चोट करती है, बल्कि पूरी पार्टी को भी भारी नुकसान पहुंचा देती है। हाल ही में पटवारी ने एक ऐसा बयान दे डाला, जिसने प्रदेश की महिलाओं को आहत किया और कांग्रेस की राजनीतिक जमीन को और भी खिसकाने का काम किया। पटवारी ने प्रदेश की महिलाओं को शराब की आदी बताकर न केवल असंवेदनशीलता दिखाई, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस आज भी अपने ही नेताओं की जुबान पर नियंत्रण नहीं रख पा रही है।</p>



<p><em><strong>आगामी चुनाव और पटवारी की जुबान</strong></em>&#8211;</p>



<p><img decoding="async" class="wp-image-16378" style="width: 403px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG-20250902-WA0000.jpg" alt=""></p>



<p><br>राजनीति में एक-एक शब्द तोला-मापा जाना चाहिए। चुनाव के ठीक पहले, जब कांग्रेस को हर राज्य में अपनी विश्वसनीयता और स्वीकार्यता के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, ऐसे समय में पटवारी जैसे नेता यदि महिलाओं पर शराब की लत का आरोप लगाने लगें तो इसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ना तय है। मध्यप्रदेश ही नहीं, आने वाले दिनों में बिहार सहित अनेक राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। चुनावी रणभूमि में जनता केवल वादे और घोषणाएँ नहीं देखती, बल्कि नेताओं की नीयत और उनकी वाणी को भी परखती है। ऐसे में कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष यदि बिना सोचे-समझे बयान दे, तो यह कांग्रेस के लिए आत्मघाती कदम से कम नहीं।</p>



<p><strong>भाजपा का पलटवार और कांग्रेस की मुश्किलें</strong>&#8211;</p>



<p><br>पटवारी के इस विवादित बयान को भाजपा ने तुरंत ही मुद्दा बना लिया। भाजपा नेताओं ने न केवल पटवारी को लताड़ लगाई बल्कि कांग्रेस को भी कटघरे में खड़ा कर दिया। भाजपा का यह पलटवार बिल्कुल स्वाभाविक था, क्योंकि विपक्ष की सबसे बड़ी पूंजी सत्ता पक्ष की चूक होती है। अब सवाल यह है कि कांग्रेस बार-बार अपने ही नेताओं के बेतुके और गैर जिम्मेदार बयानों की कीमत क्यों चुकाए? जिस समय कांग्रेस को आक्रामक होकर भाजपा के शासन की विफलताओं पर चोट करनी चाहिए थी, उस समय कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष खुद ही भाजपा को गोल देने का काम कर रहा है।</p>



<p><em><strong>एनएफएचएस के आंकड़े और पटवारी की गलतबयानी</strong></em>&#8211; </p>



<p><br>भारत सरकार के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के अनुसार, शराब सेवन में मध्यप्रदेश की महिलाएँ देश भर में 19वें नंबर पर हैं। शीर्ष पर हैं अरुणाचल प्रदेश की 17.8 प्रतिशत महिलाएं, सिक्किम में 14.8 प्रतिशत, असम में 5.5 प्रतिशत, तेलंगाना में 4.9 प्रतिशत, गोवा में 4.8 प्रतिशत, त्रिपुरा में 4.3 प्रतिशत, लद्दाख में 3.6 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 2.8 प्रतिशत और मध्यप्रदेश में 0.4 प्रतिशत महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। हालांकि पटवारी का बयान तथ्यों से परे, बिना किसी आधार के और पूरी तरह से भ्रामक है। प्रदेश की आधी आबादी को शराब की आदी करार दे दे तो यह उसकी राजनीतिक अपरिपक्वता और असंवेदनशीलता का प्रमाण है।</p>



<p><strong>कांग्रेस में मार्गदर्शन का अभाव</strong>&#8211;</p>



<p><br>जगत विजन जैसे कई राजनीतिक विश्लेषक पहले ही कह चुके हैं कि पटवारी को समझदार और अनुभवी मार्गदर्शक की आवश्यकता है। मगर कांग्रेस नेतृत्व शायद इस बात को गंभीरता से नहीं ले रहा। यही कारण है कि पटवारी बार-बार ऐसे बयान देते हैं, जिनसे पार्टी को नुकसान होता है।</p>



<p><em><strong>कांग्रेस की महिला छवि पर धक्का</strong></em>&#8211;</p>



<p><br>महिलाएँ केवल मतदाता ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के लिए आधार स्तंभ हैं। भाजपा ने लंबे समय से महिलाओं के बीच योजनाएँ और कार्यक्रमों के जरिए अपनी पकड़ मजबूत की है। वहीं कांग्रेस महिलाओं के बीच अपनी स्वीकार्यता खोती जा रही है। अब पटवारी के इस बयान ने कांग्रेस की महिला छवि को और धक्का दे दिया है। कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता खुद इस बयान से असहज हैं। वे कैसे जनता के बीच जाकर प्रचार करेंगी, जब उनके ही प्रदेशाध्यक्ष महिलाओं पर गलत आरोप लगाते हों ?</p>



<p><strong>कांग्रेस का आत्मघाती रास्ता</strong>&#8211;</p>



<p><br>एक बार यह मान भी लें कि पटवारी ने बयान भावनाओं में आकर दिया हो, मगर सवाल यह है कि क्या प्रदेशाध्यक्ष को इतना भी संयम नहीं होना चाहिए कि वे अपनी ही पार्टी की साख और महिला मतदाताओं की अस्मिता से खिलवाड़ न करें? कांग्रेस पहले ही हार-जीत की दहलीज पर खड़ी है। ऐसे में नेतृत्व यदि आत्मघाती रास्ता अपनाएगा तो पार्टी की हालत और भी बदतर हो जाएगी। यह कहना गलत नहीं होगा कि पटवारी के इस बयान से कांग्रेस को आगामी चुनावों में भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।</p>



<p><strong>पटवारी को लगाम की ज़रूरत</strong>&#8211;</p>



<p><br>जीतू पटवारी का यह बयान केवल एक जुबानी फिसलन नहीं है। यह कांग्रेस की उस गहरी समस्या का प्रतीक है, जिसमें संगठन अनुशासन और मार्गदर्शन के अभाव में बिखरा हुआ है। पटवारी को अब यह समझना होगा कि वे प्रदेशाध्यक्ष हैं, कोई साधारण कार्यकर्ता नहीं। उनके एक-एक शब्द का असर लाखों लोगों पर पड़ता है। उन्हें विवेकानंद के संदेश को आत्मसात करना चाहिए, न कि उसे अपने बेतुके बयानों से उलट देना चाहिए। कांग्रेस नेतृत्व को भी अब तय करना होगा कि वह ऐसे बेलगाम नेताओं पर कब लगाम लगाएगा। यदि अभी भी नियंत्रण नहीं किया गया तो कांग्रेस को न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि बिहार और अन्य आगामी राज्यों के चुनावों में भी इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। राजनीति केवल नारों और भाषणों का खेल नहीं है। यह जिम्मेदारी, अनुशासन और संवेदनशीलता का क्षेत्र है। यदि कांग्रेस इस मूलमंत्र को नहीं समझती तो पटवारी जैसे नेता बार-बार उसकी नाव को डुबाने का काम करते रहेंगे।</p>
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