बिजली बिल ने खोली क़त्ल की अनसुलझी वारदात


कहते है अपराधी कितना ही शातिर क्यों न हो अपने अपराध का कोई न कोई सुराग छोड़ ही जाता है । ऐसा ही कुछ देखने को मिला यूपी के बाराबंकी जिले में जहा हाइवे किनारे दो सूटकेसो में मिली अज्ञात महिला की लाश की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस ने मौका ए वारदात से मिले कागज के एक छोटे से टुकड़े के सहारे मर्डर मिस्ट्री की परत दर परत खोलते हुए न सिर्फ मकतूल की शिनाख्त करी बल्कि क़ातिल के चेहरे से पर्दा उठाते हुए उसे जेल की सलाखो के पीछे पहुचा दिया ।

मामला बीती 7 जुलाई का है जब बाराबंकी की नगर कोतवाली इलाके के केवाड़ी गांव के पास नेशनल हाइवे के किनारे पड़े दो सूटकेसो से एक अज्ञात महिला की छह टुकड़ो में बटी लाश बरामद होने से पूरे इलाके में दहशत फैल गयी थी । मामले की छानबीन में जुटी पुलिस के साथ ही हर किसी के दिमाग मे ये सवाल उठ रहे थे कि आखिर किसने हैवानियत की सारी हदें तोड़ते हुए इस महिला को क़त्ल करने के बाद उसके शरीर के टुकड़े टुकड़े कर डाले और ऐसा करने वालो से आखिर इस महिला की क्या दुश्मनी रही होगी ? लेकिन इन सभी सवालों के जवाब मिलने के लिए ये ज़रूरी था कि पहले मकतूल की पहचान करायी जाए लिहाजा पुलिस ने टुकड़ो में बटी अज्ञात महिला की लाश को जोड़कर उसकी तस्वीरें निकाली और उन तस्वीरों को बाराबंकी और आस पास के पुलिस थानों में शिनाख्त के लिए भेज दिया । लेकिन इस सब के बावजूद पुलिस को महिला की शिनाख्त के बारे में कोई भी सुराग नही मिला । नाउम्मीदी बाराबंकी पुलिस पर हावी होती ही जा रही थी कि तभी इस मामले की जांच के लिए बनायी गयी तीन स्पेशल टीमो में से एक टीम में शामिल सब इंस्पेक्टर संदीप कुमार दुबे और सब इंस्पेक्टर मुन्ना कुमार ने एक बार फिर उन सूटकेसों की बारीकी से जांच का फैसला किया । पुलिस के इस फैसले ने इस ब्लाइंड मर्डर केस की जांच की दशा और दिशा दोनो ही बदल दी क्योंकि सूटकेसो की जांच के दौरान एक सूटकेस की जेब मे पुलिस को बिजली बिल के चार छोटे छोटे टुकड़े बरामद हुए जिन्हें जोड़ने पर बमुश्किल पुलिस सिर्फ बिजली मीटर के नम्बर का ही पता लगा सकी । लेकिन इसके बाद पुलिस ने अपनी जांच की दिशा इस मीटर के नम्बर की तरफ मोड़ दी और बिजली विभाग की मदद से ये पता लगा लिया कि इस नम्बर का मीटर लखनऊ के इंदिरा नगर थाना क्षेत्र की चेतन विहार कालोनी में रहने वाली रिज़वाना नाम की महिला के मकान में लगा हुआ है ।

जिसके बाद रिज़वाना की तलाश में लखनऊ पहुची पुलिस टीम को पता लगा कि रिज़वाना ने डेढ़ वर्ष पहले ही ये मकान समीर नाम के किसी व्यक्ति को बेच दिया है । जिसके बाद पुलिस के शक़ की सुई रिज़वाना के साथ साथ समीर नाम के उस व्यक्ति पर भी घूमने लगी और पुलिस ने समीर नाम के उस व्यक्ति का मोबाइल नम्बर पता लगा कब उसकी सीडीआर निकाली तो मामला 5 जुलाई को उसके मोबाइल की लोकेशन बाराबंकी के उसी स्थान पर पायी गयी जहा सूटकेसों में महिला के शव के टुकड़े पाये गए थे । पुलिस को ये भी जानकारी हाथ लगी कि घटना के बाद समीर का फोन बलरामपुर जाकर बन्द हो गया जिसके बाद सर्विलांस की मदद से समीर के फोन में लगे नये सिम के नम्बर की जानकारी जुटाई और उसके आधार पर पुलिस ने लखनऊ के मुंशीपुलिया इलाके से समीर को गिरफ्तार कर उससे कड़ाई से पूछताछ करी तो उसने अपना जुर्म कबूल करते हुए पुलिस को बताया कि वो मूलता बलरामपुर जिले का रहने वाला है और लखनऊ में कक्षा 5 तक पढ़ाई करने के बाद 2005 में मुंबई चला गया था और वहां बांद्रा स्थित एक चिकन शॉप पर मीट काटने का काम करने लगा । इसी दौरान मालन बादशाह शेख उर्फ आयशा नाम की एक युवती से उसके प्रेम संबंध हो गए और दोनो ने घरवालों को बिना बताए शादी कर ली ।

हालांकि कुछ दिन बाद मालन के घरवालों को इस शादी का पता लग गया और उन्होंने इस शादी को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी लेकिन समीर ने इस शादी की बात को अपने घरवालों से राज़ ही रखा । लॉक डाउन के दौरान मुंबई में समीर का धंधा चौपट हो गया तो समीर अकेले अपने घर बलरामपुर चला आया था । लेकिन बाद में मालन ने उसके पास आने की जिद करी तो समीर ने उसे लखनऊ बुला लिया और लखनऊ के अपने मकान में उसके साथ रहने लगा । इसी दौरान समीर को मालन के चरित्र को लेकर कुछ शक़ पैदा होने लगा जिसको लेकर उनके बीच झगड़े होने लगे और 5 जुलाई को झगड़े के दौरान समीर ने गुस्से में आकर मालन के सर पर लोहे की रॉड से प्रहार कर दिया । जिसके बाद मालन बेहोश होकर गिर गयी और डेढ़ घंटे तक जब उसे होश नही आया तो समीर को लगा कि मालन मर चुकी है । जिसके बाद वो बाजार जाकर मीट काटने वाला चापड़ और छुरी ले आया और मालन के शरीर के छह टुकड़े करने के बाद उन्हें पॉलीथिन में पैक कर घर के कबाड़ में पड़े दो सूटकेसों में भर दिया और रात में अंधेरा होने के बाद उन्हें अपनी गाड़ी में छिपा कर बलरामपुर के लिए निकल गया । रास्ते मे सूनसान इलाका देख कर बाराबंकी के केवाड़ी गांव के बाहर हाइवे किनारे दोनो सूटकेसों को ठिकाने लगाने के बाद वो बलरामपुर भाग गया । अपने गुनाह से बचने के लिए समीर नेपाल भागने के मंसूबे बना रहा था और इसी लिए वो किसी से मिलने लखनऊ आया था लेकिन वो अपने मंसूबों में कामयाब होता उससे पहले ही बाराबंकी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया ।


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