छोटीकाशी में माता के जयकारों की गूंज, भक्‍तों की मनोकामनाएं होंगी पूरी

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर छोटीकाशी सहित प्रदेश भर के अलग-अलग शहरों में माता के जयकारों की गूंज है. नवरात्रा (Navratri 2020) में माता के 9 दिनों नौ रूपों की पूजा आराधना की जाती है. अष्टमी मनाई जा रही है. अष्टमी के दिन मां महागौरी का पूजन किया जाता है. कुछ लोग अष्टमी के दिन कन्या पूजन करके मां को विदा कर देते हैं. तो वहीं कुछ भक्त नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं. मां महागौरी करूणामयी और दयालु हैं. जो भी साधक मां की सच्चे मन से आराधना करता है. मां उस पर अपनी कृपा बरसाती है.
घरों से लेकर मंदिरों में माता रानी के जयकारों के साथ पूजा अर्चनाओं का दौर चल रहा है. नवरात्रि में अष्टमी और नवमी दोनों ही दिन कन्याओं का पूजन किया जाता है. कुछ लोग अष्टमी के दिन कन्याओं को भोजन करा अपने नवरात्रि व्रत का पारण करते हैं. इस दिन देवी शक्ति के महागौरी रूप की अराधना की जाती है. मां दुर्गा का ये रूप निराला है. इस रूप में मां अपने भक्तों का कल्याण करती हैं और उनके सारे दुख हर लेती है.

मां गौरी के नाम से ही पता चलता है कि इनका रंग गौण यानी गोरा है. देवी महागौरी को शंख, चंद्र और कुंद के फूल की उपमा दी गई है. मां के वस्त्र और सभी आभूषण श्वेत रंग के हैं. इसलिए मां महागौरी का एक नाम श्वेताम्बरधरा भी है. मां सिंह के साथ साथ बैल की भी सवारी करती हैं इसलिए इन्हें वृषारूढ़ा कहकर भी संबोधित किया जाता है. मां गौरी की चार भुजाएं है, जिसमें दाहिना हाथ अभय मुद्रा है और नीचे वाला हाथ त्रिशूल धारण किया हुआ है. ऊपर वाले बांए हाथ में डमरू धारण कर रखा है और नीचे वाले हाथ में वर मुद्रा है. इनकी पूरी मुद्रा बहुत शांत है.

आजादी के बाद ये पहला ऐसा समय रहा. जब भक्त मां के दर्शनों से वंचित रह गए. कोरोना के कारण इस बार मंदिर प्रबंधन ने मंदिर को 31 अक्टूबर तक आमजन के प्रवेश के लिए बंद कर रखा है. पुजारी बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि सुबह अष्टमी के निमित्त माता की पूजा की गई. पूजा से पहले माता को नई पोशाक धारण करा विशेष श्रृंगार किया गया. शाम 4.30 बजे नवरात्र पूर्णाहुति होगी. इससे पहले शुक्रवार रात को निशा पूजा की गई. पुजारी ने बताया कोरोना के कारण मंदिर को आमजन के लिए बंद रखा है. हालांकि इस बीच मंदिर में पूरे नवरात्रा सभी अनुष्ठान और पूजा-अर्चना नियमित की गई. नवरात्र में घट स्थापना भी हुई, इस बार छठ का मेला भी नहीं भर पाया.

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