Bhojpuri: जब राजनारायण के कार में कमलापति भरउलन तेल, पढ़य पूरी कहानी

कमलापति त्रिपाठी (Kamlapati Tripathi) अउर राजनारायण (Rajnarayan) के बीच गजब के प्रेम देखय के मिलल रहल. दूनों नेता स्वतंत्रता संग्राम में बड़ी भूमिका निभउले रहलन. कई साल जेल में रहलन. दूनों नेतन क पैदाइश कांग्रेस रहल, लेकिन अजादी के बाद दूनों क रस्ता अलग-अलग होइ गयल. लेकिन प्यार अथाह रहल.

पहिले प्रतिद्वद्विता रहल, लेकिन प्रेम भी रहय. कभौ-कभौ त प्रतिद्वद्विता में प्रेम क अइसन उदाहरण देखाइ जाय जवने के हर संबंध अउर प्रेम से बड़ा कहल जाइ सकयला. अइसय एक उदाहरण बनारस क दुइ दिग्गज नेता कमलापति त्रिपाठी अउर राजनारायण के बीच देखय के मिलल रहल. दूनों नेता स्वतंत्रता संग्राम में बड़ी भूमिका निभउले रहलन. कई साल जेल में रहलन. दूनों नेतन क पैदाइश कांग्रेस रहल, लेकिन अजादी के बाद दूनों क रस्ता अलग-अलग होइ गयल. कमलापति कांग्रेस में ही रहि गइलन, लेकिन राजनारायण आचार्य नरेंद्र देव अउर डॉ. राममनोहर लोहिया के सोशलिस्ट पाटी के संगे होइ गइलन. दूनों नेतन क विचारधारा भले अलग-अलग रहल, लेकिन इ अलगाव स्वस्थ प्रतिद्वंद्विता तक ही सीमित रहल. दूनों नेतन के बीच क संबंध भारतीय राजनीति क एक अनमोल उदाहरण हौ.

पहिले प्रतिद्वद्विता रहल, लेकिन प्रेम भी रहय. कभौ-कभौ त प्रतिद्वद्विता में प्रेम क अइसन उदाहरण देखाइ जाय जवने के हर संबंध अउर प्रेम से बड़ा कहल जाइ सकयला. अइसय एक उदाहरण बनारस क दुइ दिग्गज नेता कमलापति त्रिपाठी अउर राजनारायण के बीच देखय के मिलल रहल. दूनों नेता स्वतंत्रता संग्राम में बड़ी भूमिका निभउले रहलन. कई साल जेल में रहलन. दूनों नेतन क पैदाइश कांग्रेस रहल, लेकिन अजादी के बाद दूनों क रस्ता अलग-अलग होइ गयल. कमलापति कांग्रेस में ही रहि गइलन, लेकिन राजनारायण आचार्य नरेंद्र देव अउर डॉ. राममनोहर लोहिया के सोशलिस्ट पाटी के संगे होइ गइलन. दूनों नेतन क विचारधारा भले अलग-अलग रहल, लेकिन इ अलगाव स्वस्थ प्रतिद्वंद्विता तक ही सीमित रहल. दूनों नेतन के बीच क संबंध भारतीय राजनीति क एक अनमोल उदाहरण हौ.

किस्सा 1980 के आम चुनाव क हौ. राजनीति क दूनों दिग्गज वाराणसी संसदीय सीट से एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोकत रहलन. कमलापति हलांकि राजनारायण के सामने चुनाव नाहीं लड़य चाहत रहलन, लेकिन इंदिरा गांधी बनारस में राजनारायण से रायबरेली के हार क बदला लेवय चाहत रहलिन अउर एकरे बदे कमलापति के अलावा दूसर कवनो मजबूत उम्मीदवार ओनके पास नाहीं रहल. इंदिरा गांधी के दबाव में कमलापति के चुनाव मैदान में उतरय के पड़ल. राजनारायण भारतीय लोक दल क प्रत्याशी रहलन. कमलापति त्रिपाठी प्रदेश सरकार में मंत्री अउर मुख्यमंत्री रहि चुकल रहलन, केंद्र सरकार में भी मंत्री रहलन. ओनके पास पार्टी के संसाधन के साथ ही अच्छा खासा निजी संसाधन भी रहल. दूसरे तरफ राजनारायण फक्कड़ फटेहाल. पूरा चुनाव अभियान आम लोगन के चंदा पर निर्भर रहल. कभौ केव गाड़ी में तेल भरावय त कभौ केव भराइ देय. हलांकि राजनारायण भी संपन्न जमींदार परिवार से रहलन, लेकिन घरे से जब कवनो नाता नाहीं त कवने मुंहे से घरे से मदद मांगय अउर घरे वाले काहें ओनकर मदद करय.

राजनारायण एक दिन सबेरय चुनाव प्रचार पर निकलय के तइयार भइलन त ड्राइवर कहलस कि गाड़ी में तेलय नाहीं हौ. कब बंद होइ जाई कवनो ठेकाना नाहीं. राजनारायण के जेबा में पइसा भी नाहीं रहल. ड्राइवर से कहलन कि जहां तक चलि सकय लेइ चल, रस्ते में देखि जाई. एक सभा में जाए के रहल अउर गाड़ी बीच रस्ते ही रुकि गइल. राजनारायण कार से उतरि के सड़क पर. अब अइसने मनई क इंतजार रहल, जे गाड़ी में तेल भराइ देय. एतनय में दूसरी तरफ से कमलापति त्रिपाठी क काफिला उहां आइ पहुंचल. राजनारायण के बीच सड़क पर खड़ा देखि के कमलापति गाड़ी रोेकवाइ देहलन. राजनारायण पास में जाइके पंडित जी के पालागी कइलन.

राजनारायण क तत्कालीन सहयोगी काशी विद्यापीठ छात्रसंघ क भूतपूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप सिंह के कहनानुसार, कमलापति पूछलन कि ‘‘अरे का भाई राजनारायण जी, काहे रस्ता रोक के खड़ा हउवा.’’ राजनारायण जवाब देहलन, ’’पंडित जी गाड़ी में तेल नाहीं हौ, तेल भरइबा तबय गाड़ी इहां से सरकी. जेबा में एकौ पइसा नाहीं हौ.’’ कमलापति हंसय लगलन अउर साथ में मौजूद बहूजी से कहलन कि ’’अरे भाई देखा जवन कुछ होय द एन्हय. इ राजनारायण हउअन. बिना टोल टैक्स लेहल आगे न जाए देइहय.’’ बहूजी राजनारायण के चंदा देहलिन अउर गाड़ी में तेल भी भरउलिन. राजनारायण फिर भी कमलापति के आगे खड़ा होइ गइलन. ’’अइसे कइसे जइबा पंडित जी, बिना आशीर्वाद देहले. विजयी होवय क आशीर्वाद द.’’ कमलापति राजनारायण के कपारे पर हाथ रखि के विजयी होवय क आशीर्वाद देहलन, अउर फिर दूनों नेता अपने-अपने दिशा में प्रस्थान कइलन. इ अलग बात हौ कि राजनारायण चैबीस हजार वोट से चुनाव हारि गइलन. लेकिन दूनों नेतन के बीच आपसी प्रेम क इ कहानी हर जीत अउर हार से बड़ी हौ. आज के जमाने के नेतन के कमलापति अउर राजनारायण से सीखय के चाही

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